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बलूचिस्तान में हिंसा से टूटी अमेरिकी उम्मीदें: ट्रंप की निवेश योजनाएं अटकी, कई कंपनियां भी कदम खींच रहीं पीछे

Tue, 05 May 2026 07:54 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Tue, 05 May 2026 07:54 AM IST
सार

बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा ने अमेरिका की निवेश योजनाओं को बड़ा झटका दिया है। ट्रंप और मुनीर की मुलाकात के बाद बने आर्थिक संबंध अब कमजोर पड़ गए हैं। बीएलए के हमलों ने खनन परियोजनाओं और विदेशी निवेश को प्रभावित किया है। सुरक्षा हालात खराब होने से कंपनियां पीछे हट रही हैं। आइए, विस्तार से मामले को जानते हैं।

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Balochistan Conflict US Investment plan Reko Diq Project Mining Sector in between BLA Attacks
पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर - फोटो : एएनआई

विस्तार

बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा ने अमेरिका की बड़ी आर्थिक योजनाओं को झटका दे दिया है। पिछले साल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की मुलाकात के बाद जो नई शुरुआत दिखी थी, वह अब जमीन पर कमजोर पड़ती नजर आ रही है। खनिज संपदा से भरपूर इस क्षेत्र में निवेश की उम्मीदें थीं, लेकिन लगातार हमलों ने हालात बिगाड़ दिए हैं।
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ट्रंप प्रशासन ने चीन को टक्कर देने के लिए पाकिस्तान के खनन क्षेत्र में निवेश का जोखिम उठाया था। सितंबर 2025 में दोनों देशों के बीच रिश्ते मजबूत करने की कोशिश हुई और 1.3 अरब डॉलर के निवेश का रास्ता खुला। लेकिन बलूच लिबरेशन आर्मी के बढ़ते हमलों ने इन योजनाओं को रोक दिया। जनवरी से लगातार हमलों के कारण अमेरिका अब यहां निवेश करने से पीछे हटता दिख रहा है।
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क्या हिंसा ने निवेश की राह पूरी तरह रोक दी?
बलूचिस्तान में हालात तेजी से बिगड़े हैं। 31 जनवरी को हुए बड़े हमले में करीब 500 लड़ाकों ने 58 लोगों की जान ले ली। इसके बाद से कई हमले हुए, जिनमें सैन्य ठिकानों और नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचा। इन घटनाओं के कारण विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है और कई कंपनियां अपने कदम पीछे खींच रही हैं।
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खनिज संपदा के रास्ते क्यों बन गए खतरे का केंद्र?
बलूचिस्तान सोने और तांबे के बड़े भंडार के लिए जाना जाता है। रेको दीक जैसे क्षेत्रों तक जाने वाले रास्तों पर लगातार हमले हो रहे हैं। यह मार्ग अब असुरक्षित हो चुका है, जिससे खनन परियोजनाओं पर सीधा असर पड़ा है। अमेरिका और पाकिस्तान की आर्थिक योजनाएं इसी क्षेत्र पर टिकी थीं, लेकिन सुरक्षा संकट ने इन्हें कमजोर कर दिया है।

क्या विद्रोह ने विदेशी योजनाओं को खत्म कर दिया?
बलूचिस्तान में विद्रोह अब नया रूप ले चुका है। पहले जहां स्थानीय नेतृत्व था, अब शिक्षित युवाओं की भागीदारी बढ़ गई है। उनका आरोप है कि उनकी जमीन और संसाधनों का शोषण हो रहा है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक, पिछले एक साल में 1200 से ज्यादा लोग लापता हुए हैं। इन हालातों ने इस क्षेत्र को विदेशी निवेश के लिए जोखिम भरा बना दिया है और इसे बाहरी महत्वाकांक्षाओं का कब्रिस्तान कहा जाने लगा है।

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