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Pakistan: पाकिस्तान की राजनीति में आसिफा भुट्टो जरदारी की एंट्री, पिता की छोड़ी सीट से भरा नामांकन

Tue, 19 Mar 2024 03:15 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: श्वेता महतो Updated Tue, 19 Mar 2024 03:15 PM IST
सार

उपचुनाव 21 अप्रैल को होने वाला है, जिसमें आसिफा भुट्टो जरदारी का जीतना लगभग तय है। उम्मीद की जा रही है कि राजनीति में शामिल होने के बाद वह अपनी पार्टी और पारिवारिक राजनीति को भी मजबूत करेंगी। 

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Asifa Bhutto Zardari enters in Pakistan politics files nomination papers for bye polls
आसिफा भुट्टो जरदारी

विस्तार

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की छोटी बेटी आसिफा अली जरदारी ने पाकिस्तान की राजनीति में कदम रखा है। उन्होंने सिंध प्रांत की नेशनल असेंबली सीट पर उपचुनाव लड़ने के लिए अपनी उम्मीदवारी दाखिल की। उन्होंने अपनी पिता की छोड़ी सीट से नामांकन दाखिल किया है।  31 वर्षीय आसिफा पिछले कुछ समय से राजनीति में काफी सक्रिय है, लेकिन उनके पिता और पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने उन्हें अबतक संसदीय राजनीति से दूर रखा था।
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आसिफा ने भरा नामांकन
आसिफा ने रविवार को सिंध प्रांत के शहीद बेंजीराबाद जिले के एनए 207 निर्वाचन क्षेत्र से उपचुनाव के लिए अपना नामांकन भरा। बता दें कि आसिफ अली जरदारी ने यहां से चुनाव जीता था, लेकिन राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने यह सीट खाली कर दी।
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आसिफा अली जरदारी की शक्ल उनकी मां बेनजीर भुट्टो से काफी मिलतr है, जिनकी मौत 2007 में रावलपिंडी में बम विस्फोट में हुई थी। बेनजीर भुट्टो पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री भी रह चुकी हैं।  आसिफा का बड़ा भाई बिलावल भुट्टो पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में वह पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष हैं। 
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उपचुनाव में आसिफा की जीत लगभग तय
हाल ही में आसिफ अली जरदारी ने पाकिस्तान के 14वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली। इस्लामाबाद में राष्ट्रपति भवन में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान जरदारी के साथ आसिफा भुट्टो जरदारी भी थी, जिसे प्रथम महिला या फर्स्ट लेडी नामित किया गया। दरअसल, यह दर्जा राष्ट्रपति की पत्नी को दिया जाता है, लेकिन अपनी पत्नी, पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के 2007 में मौत होने के बाद से ही आसिफ अली जरदारी विधुर हैं। 


उपचुनाव 21 अप्रैल को होने वाला है, जिसमें आसिफा का जीतना लगभग तय है। उम्मीद की जा रही है कि राजनीति में शामिल होने के बाद वह अपनी पार्टी और पारिवारिक राजनीति को भी मजबूत करेंगी। 
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