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ईशनिंदा: आसिया बीबी ने बताया पाक की जेल का हाल, कैसे होता था उनके साथ बर्ताव

Thu, 30 Jan 2020 08:56 AM IST
Sneha Baluni वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 30 Jan 2020 08:56 AM IST
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Asia bibi recounts her days of horror in pak jail, talk about prison days and new life after exile
आसिया बीबी- फ्रांस की पत्रकार एन्ने-इसाबेले टोलेट - फोटो : Asmatullah Niazi Twitter

ईशनिंदा के आरोप में आठ साल पाकिस्तान की जेल में बिताने और फिर निर्वासन की पीड़ा सहने वाली ईसाई महिला आसिया बीबी ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। उनके मामले पर अतंरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध हुआ था। आसिया ने पहली बार अपने पीड़ादायक दिनों के बारे में बात की है। 

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आसिया को ईशनिंदा के आरोप में साल 2010 में पाकिस्तान की एक अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी लेकिन 2018 में उन्हें बरी कर दिया गया। अब वह कनाडा में एक अज्ञात स्थान पर रहती हैं। फ्रांस की पत्रकार एन्ने-इसाबेले टोलेट ने उनके बारे में एक किताब लिखी है। वह अकेली ऐसी पत्रकार हैं जो कनाडा में बीबी से मिली हैं। 
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किताब का नाम एनफिन लिबरे यानी फाइनली फ्री (आखिरकार आजादी) है। जो फ्रेंच में प्रकाशित हुई है और सितंबर में इसका अंग्रेजी संस्करण प्रकाशित होगा। इसमें बीबी ने अपनी गिरफ्तारी, जेल की हालत, बरी होने की राहत के साथ ही नई जिंदगी में समायोजन बैठाने में आई दिक्कतों के बारे में बताया है।  
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किताब में आसिया बीबी कहती है, 'आप मीडिया के जरिए मेरी कहानी जानते हैं। लेकिन आप जेल में मेरे दैनिक जीवन या मेरे नए जीवन को समझने से बहुत दूर हैं। मैं कट्टरता के कारण कैदी बनी। जेल में केवल आंसू मेरे साथी थे।' उन्होंने पाकिस्तान जेल की भयावह स्थिति के बारे में बताया जहां उन्हें चेन से बांधकर रखा जाता था और अन्य बंदी उनका मजाक उड़ाते थे। 

बीबी ने बताया, 'मेरे हाथों में हथकड़ियां थीं, मेरे लिए सांस लेना भी मुश्किल था। मेरी गर्दन पर लोहे का एक कॉलर रहता था जिसके नट को गार्ड टाइट करता था। खींचने के लिए गंदी जमीन पर लंबी चेनें रहती थीं। यह चेन मेरी गर्दन और हथकड़ियों से जुड़ी रहती थी। वह मुझे कुत्तों की तरह खींचते थे। एक डर मुझे अंधकार की गहराइयों में ले जाता था। यह डर मेरा साथ कभी नहीं छोड़ेगा।'


आसिया ने कहा, 'मेरी रिहाई के बावजूद पाकिस्तान में ईसाईयों के लिए माहौल में कोई बदलाव नहीं आया है और उनपर कई तरह के अत्याचार हो सकते हैं। वह अपने सिर पर तलवार लेकर चल रहे हैं।' कनाडा ने बेशक उन्हें एक सुरक्षित स्थान दिया है बेहतर भविष्य दिया है। लेकिन वापस कभी अपनी मातृभूमि में कदम न रखने की शर्त भी रखी है। उन्होंने कहा, 'इस नए देश में मैं एक नए भविष्य और नई जिंदगी के लिए तैयार लेकिन किस कीमत पर?'

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