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ASEAN: एशिया प्रशांत क्षेत्र में बढ़ रहा तनाव न बनें युद्ध की वजह, इसकी गारंटी करने में जुटे चीन और आसियान

Sun, 12 Mar 2023 07:00 PM IST
शिव शरण शुक्ला डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 12 Mar 2023 07:00 PM IST
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सार
आसियान और चीन के प्रतिनिधियों की शुक्रवार को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में एक बैठक हुई। उसमें हॉटलाइन कायम करने का प्रस्ताव आया। आसियान के प्रतिनिधियों ने कहा है कि उनकी प्राथमिकता इस क्षेत्र में शांति बनाए रखना है।
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ASEAN and China engaged in making peace amid growing tension in the Asia Pacific region
आसियान

विस्तार

एशिया प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच आसियान और चीन ने दुर्घटनावश युद्ध छिड़ने जैसी सूरत से बचने के उपायों पर विचार शुरू किया है। आसियान दस दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों का संगठन है। इसके सदस्य ज्यादातर देशों के साथ चीन का सीमाई या क्षेत्रीय विवाद हैं, जिसको लेकर टकराव की स्थिति बनती रहती है। 



जकार्ता में हुई बैठक
इसे देखते हुए आसियान और चीन के प्रतिनिधियों की शुक्रवार को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में एक बैठक हुई। उसमें हॉटलाइन कायम करने का प्रस्ताव आया। आसियान के प्रतिनिधियों ने कहा है कि उनकी प्राथमिकता इस क्षेत्र में शांति बनाए रखना है। इंडोनेशिया के विदेश मंत्रालय में आसियान विभाग के महानिदेशक सिद्धार्थो सूर्योधिपुरो ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण घटनाओं को नियंत्रित रखना है। इस वर्ष हम यह कर सकते हैं कि दोनों पक्षों के बीच एक हॉटलाइन बना ली जाए।’ 


संवाद कायम करने पर बनी सहमति
हॉटलाइन संवाद की व्यवस्था है, जिसमें स्थिति बिगड़ने की स्थिति में दोनों पक्ष तुरंत एक दूसरे संपर्क कर सकते हैँ। जानकारों के मुताबिक आसियान और चीन के बीच हॉटलाइन कायम करने पर सहमति कई वर्ष पहले हो गई थी। लेकिन आसियान के दस देशों के बीच इसका सिस्टम कायम ना हो पाने के कारण बात आगे नहीं बढ़ी। सूर्योधिपुरो ने कहा कि अब आसियान के सदस्य सभी दस देश आपसी संचार की ऐसी व्यवस्था बनाएंगे, जिसका संपर्क बीजिंग से जुड़ा होगा। 

जकार्ता में आसियान और चीन के कूटनीतिकों की बैठक तीन दिन तक चली। इंडोनेशिया इस वर्ष आसियान का अध्यक्ष है। इसीलिए उसने इस बैठक की मेजबानी की। इस बैठक में दोनों पक्षों के बीच एक ‘आचार संहिता’ लागू करने के मुद्दे पर भी बातचीत हुई। कूटनीतिकों के मुताबिक क्षेत्रीय या सीमाई विवाद वाले देश आपस में कैसे व्यवहार करें, उसकी संहिता बनाने की जरूरत इस क्षेत्र में काफी समय से महसूस की जा रही है। पिछले महीने आसियान विदेश मंत्रियों के साथ चीन के विदेश मंत्री की हुई बैठक में यथाशीघ्र आचार संहिता पर सहमति बनाने पर जोर दिया गया था। 

एशिया प्रशांत क्षेत्र में भी इस वजह से बढ़ रहा तनाव
विश्लेषकों के मुताबिक चीन के अमेरिका और यूरोप के साथ बढ़ रहे तनाव का असर एशिया प्रशांत क्षेत्र में भी महसूस किया जा रहा है। आसियान के सदस्य देशों के अमेरिका से बेहतर रिश्ते हैं। जबकि चीन इन देशों का सबसे बड़ा व्यापार सहयोगी है। इसलिए आसियान देशों दोनों बड़ी ताकतों के बीच संतुलन बना कर चलना चाहते हैं।

सूर्योधिपुरो ने कहा- ‘हम नया नजरिया अपना कर आगे बढ़ेंगे, ताकि आचार संहिता पर बातचीत में तेजी लाई जा सके। अभी इस सवाल पर चर्चा हो रही है कि आचार संहिता को कानूनी रूप से बाध्य बनाया जाए या नहीं। फिलहाल हम इसे बाध्यकारी बनाने से बचना चाह रहे हैँ।’
इस क्षेत्र में तनाव का सबसे बड़ा स्थल दक्षिण चीन सागर है। पिछले महीने फिलीपीनन्स ने आरोप लगाया था कि स्पार्टली द्वीप समूह के पास उसके जहाजों पर लेजर प्रहार किया गया है। उधर अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉ स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज ने दिसंबर में कहा था कि वियतनाम ने दक्षिण चीन सागर में अपनी चौकियों के पास खुदाई तेज कर दी है। इन घटनाओं से इस क्षेत्र में तनाव अचानक बढ़ गया। इसीलिए तनाव को नियंत्रित रखने की पहल को बेहद अहम समझा जा रहा है। 

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