China: भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर चीन के दावे से भड़के असदुद्दीन ओवैसी, बोले- क्या मोदी सरकार ने इस पर...
भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी ऐसे ही बेबुनियाद दावे करते रहे हैं। हालांकि, भारत ने पहले ही दिन से साफ कर दिया था कि भारत और पाकिस्तान से संबंधित मामलों में किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के लिए कोई जगह नहीं है।
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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता का चीनी दावा देश का अपमान है और केंद्र सरकार को इसका सख्त रूप से खंडन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चीन के साथ संबंधों में सामान्य स्थिति भारत के सम्मान या उसकी संप्रभुता की कीमत पर नहीं हो सकती। एआईएमआईएम नेता ने बुधवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर सवाल खड़े किए।
'यह भारत का अपमान है' :एआईएमआईएम सांसद
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'अमेरिकी राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) की ओर से हमसे पहले युद्धविराम की घोषणा करने और शांति स्थापित करने के लिए व्यापार प्रतिबंधों का इस्तेमाल करने का दावा करने के बाद, अब चीनी विदेश मंत्री ने भी आधिकारिक तौर पर इसी तरह के दावे किए हैं। यह भारत का अपमान है और सरकार को इसका सख्त खंडन करना चाहिए। चीन के साथ संबंधों में बहाली भारत के सम्मान या संप्रभुता की कीमत पर नहीं हो सकती।'
उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल पूछते हुए कहा, 'क्या प्रधानमंत्री की चीन यात्रा के दौरान मोदी सरकार ने इसी बात पर सहमति जताई थी?' उन्होंने आगे कहा, 'चीनी विदेश मंत्री का मध्यस्थता का दावा आश्चर्यजनक है और केंद्र को आधिकारिक तौर पर इसका खंडन करना चाहिए। देश को आश्वस्त करना चाहिए कि किसी भी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है।'
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चीनी विदेश मंत्री ने क्या किया था दावा?
ओवैसी ने कहा कि चीन दक्षिण एशिया में खुद को सबसे बेहतर साबित करने की कोशिश कर रहा है। इसी वजह से भारत और पाकिस्तान को एक ही स्तर पर रखना चाहता है। गौरतलब है कि चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव उन 'गर्म मुद्दों' की सूची में शामिल था, जिन पर चीन ने इस वर्ष मध्यस्थता की थी।
हालांकि, पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच 7-10 मई को हुए संघर्ष को लेकर नई दिल्ली का साफ कहना रहा है कि समाधान दोनों देशों के सैन्य अभियानों के महानिदेशकों के बीच सीधी बातचीत के जरिये हुआ था।
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