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Amnesty International: बच्चों को मौत की ओर धकेल रहे युद्ध और गरीबी; मानवाधिकार संगठनों की चिंता, विकल्प जरूरी
Fri, 26 Sep 2025 06:52 AM IST
शिव शुक्ला
अमर उजाला नेटवर्क, वाशिंगटन
अमर उजाला नेटवर्क, वाशिंगटन
Published by: शिव शुक्ला
Updated Fri, 26 Sep 2025 06:52 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विश्व मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने चेताया है कि युद्ध, असुरक्षा और गरीबी ने बच्चों को खतरनाक व जानलेवा मार्ग अपनाने के लिए मजबूर कर दिया है। अफगानिस्तान के 13 वर्षीय लड़के के विमान के लैंडिंग-गियर कंपार्टमेंट में छिपकर रविवार को दिल्ली पहुंचने की घटना ने फिर से वैश्विक ध्यान उन बच्चों पर खींचा है, जो जीवन के लिए मौत का जोखिम उठाते हैं।
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हवाई इतिहास में अब तक इस तरह के 130 से अधिक स्टोअवे केस दर्ज किए गए, जिनमें 80% यात्री मारे गए। सिर्फ 25 लोग ही चमत्कारिक रूप से जीवित बचे। एमनेस्टी के अनुसार इस तरह के प्रयास लगभग निश्चित मौत की ओर कदम हैं। दिल्ली एयरपोर्ट पर पकड़े गए 13 वर्षीय लड़के का सुरक्षित बच निकलना भी इसी परिप्रेक्ष्य में असाधारण माना जा रहा है। ऐसे ही बिरले मामलों में पंजाब के दो भाइयों ने ब्रिटिश एयरवेज विमान के लैंडिंग-गियर में छिपकर 1996 में दिल्ली से लंदन तक यात्रा की। एक भाई की मौत हो गई, दूसरा जीवित बच गया।
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मानवाधिकार संगठनों की चिंता, विकल्प जरूरी
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि जब बच्चे अपने भविष्य की तलाश में मौत को गले लगाने वाले रास्तों पर निकल पड़ते हैं, तो यह पूरी दुनिया के लिए शर्म की बात है। यूनिसेफ ने भी इस पर चिंता जताई और जोर दिया कि बच्चों को सुरक्षित प्रवासन-मार्ग और वैध शरण विकल्प मुहैया कराए बिना ऐसे प्रयास रुकने वाले नहीं हैं। मानवाधिकार संगठनों ने इस केस को चेतावनी मानते हुए कहा कि बच्चों को विकल्प देना जरूरी है।
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इस घटना ने न केवल मानवाधिकार संकट को उजागर किया बल्कि वैश्विक हवाई अड्डों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। विशेषज्ञों ने कहा, कड़े सुरक्षा घेरे के बावजूद अगर कोई व्यक्ति विमान के लैंडिंग-गियर तक पहुंचने में सफल हो जाता है, तो इसे सुरक्षा तंत्र की सबसे बड़ी खामी माना जाना चाहिए।