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Jaishankar: 'अमेरिकी बुरा न माने, भारत को भी आपकी टिप्पणी पर टिप्पणी करने का अधिकार', जयशंकर की दो टूक

Wed, 02 Oct 2024 08:53 AM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, वॉशिंगटन
पीटीआई, वॉशिंगटन Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 02 Oct 2024 08:53 AM IST
सार

जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत ने कभी डॉलर को सक्रियता से निशाना नहीं बनाया। यह उसकी आर्थिक, राजनीति एवं रणनीतिक नीति का हिस्सा नहीं रहा है। उन्होंने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि अमेरिका की कुछ नीतियों के कारण भारत को अपने कुछ व्यापार भागीदारों के साथ डॉलर आधारित व्यापार करने में कठिनाई हो रही है।

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Americans should not mind India also has the right to comment on your comments Jaishankar said bluntly
Jaishankar - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को अमेरिका को सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जब भारत अपने आंतरिक मामलों पर उनकी टिप्पणियों प्रतिक्रिया व्यक्त करता है तो उन्हें बुरा नहीं मानना चाहिए। जयशंकर ने अमेरिका के शीर्ष थिंक टैंक 'कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस' में एक सवाल के जवाब में कहा कि अगर आप दो देशों, दो सरकारों के स्तर पर देखें तो हमें लगता है कि यह महत्वपूर्ण है कि लोकतंत्र का परस्पर सम्मान होना। ऐसा नहीं हो सकता कि एक लोकतंत्र को दूसरे पर टिप्पणी करने का अधिकार हो और यह वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र को बढ़ावा देने का हिस्सा है, लेकिन जब दूसरे ऐसा करते हैं तो यह विदेशी हस्तक्षेप बन जाता है।

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उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि विदेशी हस्तक्षेप विदेशी हस्तक्षेप है, चाहे वह कोई भी करे और कहीं भी हो। मेरा व्यक्तिगत विचार है, जिसे मैंने कई लोगों के साथ साझा किया है। आपको टिप्पणी करने का पूरा अधिकार है, लेकिन मुझे आपकी टिप्पणी पर टिप्पणी करने का भी पूरा अधिकार है। इसलिए जब मैं ऐसा करता हूं तो बुरा नहीं मानना चाहिए।
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'जरूरी नहीं कि सियासत राष्ट्रीय सीमाओं के भीतर ही रहे'
विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका और भारत दुनिया के उन अग्रणी देशों में से हैं, जहां लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था है। यहां अमेरिका में हमारे लोकतंत्र में कई मुद्दों पर बहस होती है, लेकिन कई बार अमेरिका के नेता भारत के लोकतंत्र के बारे में टिप्पणी करते हैं। दुनिया बहुत वैश्वीकृत हो गई है और इसलिए किसी भी देश की राजनीति जरूरी नहीं कि उस देश की राष्ट्रीय सीमाओं के भीतर ही रहे।
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'वैश्वीकृत युग में एजेंडे भी वैश्वीकृत'
जयशंकर ने टिप्पणी की, 'अब अमेरिका निश्चित रूप से यह सुनिश्चित करने की कोशिश करता है कि ऐसा न हो। यह इस बात का हिस्सा है कि आपने कई वर्षों से अपनी विदेश नीति कैसे चलाई है। अब वैश्वीकृत युग में एजेंडे भी वैश्वीकृत हैं। ऐसे पक्ष हैं जो न केवल अपने देश या अपने क्षेत्र की राजनीति को आकार देना चाहते हैं, बल्कि सोशल मीडिया, आर्थिक ताकतें, वित्तीय प्रवाह, ये सभी आपको ऐसा करने का अवसर देते हैं।


'कभी डॉलर को सक्रियता से निशाना नहीं बनाया'
जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत ने कभी डॉलर को सक्रियता से निशाना नहीं बनाया। यह उसकी आर्थिक, राजनीति एवं रणनीतिक नीति का हिस्सा नहीं रहा है। उन्होंने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि अमेरिका की कुछ नीतियों के कारण भारत को अपने कुछ व्यापार भागीदारों के साथ डॉलर आधारित व्यापार करने में कठिनाई हो रही है।

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