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India-US Ties: 'टैरिफ और एच-1बी वीजा शुल्क से भारत-अमेरिका रिश्तों पर असर', अमेरिकी सांसदों ने जताई चिंता

Thu, 11 Dec 2025 11:32 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क/ वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क/ वॉशिंगटन Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 11 Dec 2025 11:32 PM IST
सार

India-US Ties: भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर कई अमेरिकी सांसदों ने चिंता जताई है। वहीं इसे लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टैरिफ विवाद सुलझ जाएं और पाकिस्तान को लेकर पुरानी उलझनों का समाधान निकले तो भारत-अमेरिका साझेदारी में आगे काफी बड़ी छलांग संभव है।

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American lawmakers voice concern over tariffs, H1B visa issues impacting India-US ties
अमेरिकी प्रतिनिधि अमी बेरा - फोटो : X @RepBera

विस्तार

अमेरिका में कई सांसदों ने ट्रंप प्रशासन की हालिया नीतियों, जैसे एच-1बी वीजा पर एक लाख डॉलर की भारी फीस और भारत से आयात पर 50% तक टैरिफ, पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि ये कदम न सिर्फ अमेरिकी कंपनियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि भारत-अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे आपसी भरोसे और लोगों के बीच के रिश्तों को भी झटका दे रहे हैं।
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भारत-अमेरिका साझेदारी पर दोनों देशों की राजनीति में सहमति- एमी बेरा
हाउस फॉरेन अफेयर्स की एक सबकमेटी में सुनवाई के दौरान अमेरिकी सांसद एमी बेरा ने कहा कि भारत-अमेरिका साझेदारी को वर्षों से दोनों पार्टियों और कई राष्ट्रपतियों ने मजबूत किया है। उन्होंने कहा, 'हमारे आर्थिक और रणनीतिक हित एक-दूसरे से जुड़े हैं। इंडो-पैसिफिक में शांति और स्थिरता, दोनों देशों की ही जरूरत है।' लेकिन बेरा ने यह भी स्वीकार किया कि एच-1बी वीजा पर एक लाख डॉलर की फीस बढ़ाने का फैसला 'अमेरिकी कंपनियों को सीधे तौर पर नुकसान' पहुंचाएगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी की रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हालिया मुलाकातों से 'कांग्रेस के कई सदस्यों में बेचैनी' देखी जा रही है।
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टैरिफ से दोनों देशों को नुकसान- प्रमिला जयपाल
भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने भी इन नीतियों पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन के 50% टैरिफ से भारत की अर्थव्यवस्था को झटका लग रहा है और अमेरिकी उपभोक्ता भी महंगे उत्पाद झेलने को मजबूर हैं। प्रमिला जयपाल, जो खुद कभी छात्र वीजा और एच-1बी पर अमेरिका आई थीं, ने कहा, 'कानूनी इमिग्रेशन रास्तों को बंद करना हमारी ऐतिहासिक गलतियों को दोहराने जैसा है। इससे लोगों के बीच के रिश्ते टूटते हैं।' उन्होंने बढ़ती 'एंटी-इंडियन हेट' पर भी चिंता जताई और कहा कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय अमेरिका की अर्थव्यवस्था और नवाचार का अहम स्तंभ है, स्टार्टअप्स और फॉर्च्यून 500 कंपनियों में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

तरक्की रुक गई है- ध्रुव जयशंकर
इस सुनवाई में विशेषज्ञ ध्रुव जयशंकर ने कहा कि 1998 के बाद से भारत-अमेरिका रिश्ते कई दौरों से गुजरे हैं, न्यूक्लियर प्रतिबंधों से लेकर रक्षा, व्यापार, टेक और रणनीति में करीबी साझेदारी तक। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इन रिश्तों में अब एक प्रकार की राजनीतिक ठहराव की स्थिति दिख रही है। उनके मुताबिक सबसे बड़ी बाधा ट्रेड और टैरिफ विवाद हैं। उन्होंने बताया कि भारत ने हाल के वर्षों में कई व्यापार समझौते किए हैं और अमेरिका के साथ भी समाधान करीब दिख रहा है।

पाकिस्तान पर अमेरिका का रुख भी चिंता का कारण
ध्रुव जयशंकर ने कहा कि अमेरिका का पाकिस्तान की सेना के साथ नया जुड़ाव भारत में चिंता पैदा कर रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि पाकिस्तान का आतंकवादी समूहों का उपयोग करने का लंबा इतिहास रहा है, और इसीलिए अमेरिका की 'डी-हाइफनेशन नीति, दोनों देशों से अलग-अलग संबंध, पहले बेहतर काम करती थी।

अमेरिकी सांसद डोव ने चेताया-ट्रंप ने रुख न बदला तो भारत को खो देंगे
भारत के प्रति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां रणनीतिक विश्वास और आपसी हितों को वास्तविक और स्थायी नुकसान पहुंचा रही हैं। यदि ट्रंप ने अपना रुख नहीं बदला, तो वह भारत को खो देने वाले राष्ट्रपति साबित होंगे। शीर्ष अमेरिकी सांसद सिडनी कमलागर-डोव ने गुरुवार को दक्षिण और मध्य एशिया विदेश मामलों की उपसमिति की बैठक में ये बातें कहीं। सिडनी ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों को हुई क्षति की भरपाई के लिए वाशिंगटन को तत्काल कदम उठाने होंगे।


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कैलिफोर्निया से डेमोक्रेट सांसद ने कहा, ट्रंप ने भारत को अमेरिका से दूर धकेला और रूसी साम्राज्य को सशक्त बनाया है। यह वह विरासत नहीं है, जिस पर किसी राष्ट्रपति को गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा, जब इतिहास की किताबें लिखी जाएंगी और बताया जाएगा कि भारत के प्रति ट्रंप की शत्रुता कहां से शुरू हुई, तो वे ऐसी चीज की ओर इशारा करेंगी, जिसका हमारे दीर्घकालिक रणनीतिक हितों से कोई लेना-देना नहीं है। यह चीज है उनका नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर व्यक्तिगत जुनून। सिडनी ने भारत के प्रति ट्रंप की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि ये क्रोध में उठाए गए और खुद को नुकसान पहुंचाने वाले कदम ही प्रतीत होते हैं।

मोदी-पुतिन की तस्वीर हजार शब्दों के बराबर
सिडनी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हाल के दिल्ली दौरे के दौरान एक ही कार में सवार मोदी-पुतिन की तस्वीर दिखाते हुए कहा कि यह पोस्टर हजार शब्दों के बराबर है। उन्होंने कहा, दबाव डालकर साझेदारी करना महंगा साबित होता है। यह पोस्टर इसका सबसे बड़ा सबूत है। अमेरिका की दबाव वाली नीति भारत को रूस के करीब धकेल रही है।


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