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ट्रंप के अमेरिका को किस यूरोपीय देश ने बताया खतरा?: रूस और चीन के साथ जुड़ा नाम; जानें क्यों जाहिर की गई चिंता

Thu, 11 Dec 2025 05:40 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोपनहेगन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोपनहेगन Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 11 Dec 2025 05:40 PM IST
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Denmark marks US under Donald Trump Potential security concern along Russia and China over Greenland Issue new
डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति में बदलते रुख के बाद डेनमार्क सतर्क। - फोटो : अमर उजाला
डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका की विदेश नीति पिछले प्रशासनों के मुकाबले ज्यादा आक्रामक हुई है। खासकर अमेरिका के करीबी देशों के लिए स्थिति काफी चिंता बढ़ाने वाली है। दरअसल, ट्रंप ने राष्ट्रपति पद संभालने के बाद से ही रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर यूरोप के देशों और आव्रजन-आयात के मुद्दे पर लगभग पूरी दुनिया को निशाना बनाया है। इतना ही नहीं ट्रंप ने कनाडा और ग्रीनलैंड को तो अमेरिका के साथ मिलाने तक के संकेत दिए हैं। ट्रंप की इन बातों को लेकर कभी अमेरिका के सबसे करीबी रहे देशों में भी अब शंकाएं पैदा होने लगी हैं। 
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अब सामने आया है कि यूरोप के देश डेनमार्क की खुफिया एजेंसी ने अमेरिका को अपनी सुरक्षा के लिए जोखिम के तौर पर चिह्नित किया है। यह पहली बार है, जब किसी नॉर्डिक यूरोपीय देश ने ऐसा कदम उठाया है। डेनमार्क की एजेंसी ने अमेरिका को उसी वर्ग में रखा है, जिसमें वह रूस, चीन और अपनी सुरक्षा के लिए खतरा बन सकने वाले देशों को रखता है। 
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डेनमार्क की खुफिया एजेंसी ने अमेरिका को लेकर क्या कहा?
डेनिश डिफेंस इंटेलिजेंस सर्विस (रक्षा खुफिया सेवा), जो कि इस देश की दो प्रमुख खुफिया एजेंसियों में से एक है, ने कहा, 

इस एजेंसी ने खुफिया मामलों का सार बताती हुई 2025 की रिपोर्ट को बुधवार को ही प्रकाशित किा है। इसमें वॉशिंगटन की ग्रीनलैंड की तरफ बढ़ती दिलचस्पी को लेकर चिंता जताई गई है। बता दें कि ग्रीनलैंड लंबे समय से डेनमार्क के शासन के अंतर्गत आता है। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से इसे अमेरिका के हिस्से में करने की बात कहते रहे हैं। वे ग्रीनलैंड को खरीदने की पेशकश तक कर चुके हैं।
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रूस और चीन सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा


1. रिपोर्ट में रूस को लेकर क्या?
डेनमार्क की एजेंसी ने जो रिपोर्ट जारी की है, उसमें रूस और चीन को अब भी सबसे बड़ा खतरा बताया गया है। इसमें कहा गया है कि मौजूदा समय में इन देशों से खतरा और गंभीर होता जा रहा है। इसकी वजह है कि अमेरिका अब यूरोप के सुरक्षा गारंटर की प्रतिबद्धता से पीछे हट रहा है, जिससे ऐसी कूटनीतिक दरारें पैदा हो रही हैं, जिनका रूस फायदा उठा सकता है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की तरफ से किसी भी तरह की अनिश्चितता रूस के लिए नाटो के खिलाफ अपने हाइब्रिड अभियानों को बढ़ाने के मौके की तरह होंगे। वह नाटो सदस्यों के खिलाफ साइबर अटैक, गलत सूचनाएं फैलाने के अभियानों, राजनीतिक दखल और अन्य दबाव के तरीकों को आजमाना शुरू कर सकता है, जिससे पश्चिमी देशों का गठबंधन कमजोर पड़ जाए। 

2. चीन किस तरह बन सकता है खतरा?
एजेंसी ने इसी रिपोर्ट में कहा है कि चीन लगातार पश्चिमी प्रभाव के लिए चुनौती बना हुआ है। वह आर्थिक मजबूती, तकनीकी बढ़त और सैन्य ताकत के जरिए पश्चिम के लिए खतरा बन रहा है। बीजिंग का अपने वैश्विक प्रभाव को बढ़ाना, खासकर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों और कूटनीतिक इंडस्ट्री के क्षेत्र में, यूरोप के लिए जोखिम पैदा करता है। 

रिपोर्ट में कहा गया कि साथ में यह सभी घटनाक्रम एक ऐसा भू-राजनीतिक माहौल पैदा कर रहे हैं, जिससे दोनों (रूस और चीन) डेनमार्क पर ज्यादा दृढ़, बहुआयामी दबाव बना सकते हैं। ऐसे में देश को इन स्थितियों से निपटने के लिए तैयार रहना होगा। 

अमेरिका को लेकर क्यों आशंकित है डेनमार्क?
ट्रंप ने अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद से ही ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर कई बयान दिए हैं। उन्होंने पहले कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा और पूरी दुनिया में आजादी के लिए, अमेरिका को लगता है कि ग्रीनलैंड का हक और नियंत्रण बेहद जरूरी है। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद इसे लेकर एक विधेयक तक लाए थे, जिसमें राष्ट्रपति को बातचीत शुरू करने की ताकत से जुड़े प्रस्ताव थे।

इस साल अगस्त के महीने में खुलासा हुआ था कि ट्रंप से जुड़े तीन अमेरिकी नागरिक ग्रीनलैंड में गुप्त रूप से प्रभाव डालने की कोशिश कर रहे हैं। इसे लेकर तब डेनमार्क के विदेश मंत्री ने अमेरिका के शीर्ष राजनयिक को तलब किया था और उन्हें गोपनीय तरीके से किसी भी तरह की दखलअंदाजी न करने की चेतावनी दे दी थी। इस बीच डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने साफ किया था कि अमेरिका किसी भी दूसरे देश पर कब्जा नहीं कर सकता है।

यह भी पढ़ें: Economy: डेनमार्क के राजदूत बोले- भारत दुनिया की सबसे तेजी बढ़ती अर्थव्यवस्था, निवेश के लिए बेहतरीन जगह

डेनमार्क को इससे क्यों चिंता?
  • ग्रीनलैंड स्वायत्त शासन वाला देश है। हालांकि, यह अभी भी डेनमार्क साम्राज्य का हिस्सा है। यानी परोक्ष रूप से यहां यूरोपीय देश डेनमार्क का ही शासन है।
  • चौंकाने वाली बात यह है कि ग्रीनलैंड खुद यूरोप का हिस्सा नहीं है। यह उत्तरी अमेरिका महाद्वीप का हिस्सा है और संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) से करीब 5000 किमी दूर है। इस लिहाज से अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड की कूटनीतिक महत्ता बढ़ जाती है। 
  • ग्रीनलैंड सागर के जरिए आर्कटिक महासागर से सीधे जुड़े होने की वजह से ग्रीनलैंड का यह पूरा क्षेत्र कूटनीतिक तौर पर अहमियत रखता है। इतना ही नहीं 21 लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला ग्रीनलैंड पूरे अमेरिका के करीब एक-चौथाई के बराबर है और रहने के लिए कई संभावनाओं से भरा रहा है। 



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