America : अमेरिका में फिर गोलीबारी, अब ओक्लाहोमा का अस्पताल परिसर बना निशाना, पांच की मौत
अमेरिका में लचर शस्त्र लाइसेंस कानून के चलते अक्सर गोलीबारी की घटनाएं सामने आती रहती हैं, जिनमें निर्दोष लोग मारे जाते हैं। बीते दिनों उवाल्डे के एक प्राथमिक स्कूल में हुई गोलीबारी में 19 बच्चों समेत 23 की मौत हो गई थी।
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अमेरिका में एक बार फिर गोलीबारी की घटना हो गई। इस बार ओक्लाहोमा के टुल्सा शहर के सेंट फ्रांसिस अस्पताल परिसर की नैटेली बिल्डिंग में गोलीबारी हुई। टुल्सा पुलिस के अनुसार अज्ञात हमलावर ने चार लोगों को गोलियों से भून दिया। सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पहुंची पुलिस ने शूटर को मार गिराया।
अमेरिका में लचर शस्त्र लाइसेंस कानून के चलते अक्सर गोलीबारी की घटनाएं सामने आती रहती हैं, जिनमें निर्दोष लोग मारे जाते हैं। 24 मई को उवाल्डे के एक प्राथमिक स्कूल में हुई गोलीबारी में 19 बच्चों समेत 23 की मौत हो गई थी। राष्ट्रपति जो बाइडन ने इन पर चिंता जताते हुए कहा था कि अब इस दिशा में कदम उठाने का वक्त आ गया है।
टुल्सा के अस्पताल परिसर में हुई गोलीबारी की सूचना राष्ट्रपति जो बाइडन को भी दी गई। व्हाइट हाउस द्वारा स्थानीय समयानुसार बुधवार को जारी बयान में कहा गया है कि वह हालात पर नजर रखे हुए है। सीएनएन के अनुसार टुल्सा पुलिस ने अपनी फेसबुक पोस्ट में बताया कि एक अज्ञात राइफलधारी नैटेली बिल्डिंग में घुस गया और उसने अंधाधुंध गोलियां चलाकर चार लोगों की जान ले ली।
एक दिन पहले स्कूल में गोलीबारी हुई
अमेरिका में गोलीबारी की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही है। टुल्सा में फायरिंग से एक दिन पहले यानी मंगलवार को न्यू ऑरलियन्स के स्नातक दीक्षांत समारोह में शूटिंग हुई थी। इसमें एक वृद्धा की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए थे। इसके पहले उवाल्डे के रॉब एलीमेंट्री स्कूल में हुई गोलीबारी में 19 बच्चों समेत 23 लोग मारे गए थे।
बाइडन ने न्यूजीलैंड की पीएम से लिया परामर्श
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने कल ही देश में बढ़ती फायरिंग की घटनाओं पर नियंत्रण को लेकर न्यूजीलैंड की पीएम जेसिंडा आर्डर्न से परामर्श किया था। बाइडन ने आर्डर्न से इसलिए परामर्श किया क्योंकि 2019 में न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में मुसलमानों को निशाना बनाकर की गई गोलीबारी में 51 लोगों की मौत के बाद वहां की सरकार ने सख्त कदम उठाए थे। न्यूजीलैंड में सेना जैसी राइफलों की बिक्री पर पाबंदी लगाने के साथ ही बंदूकों की सरकार द्वारा पुन: खरीदी (buy-back) भी की गई।