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अमेरिका-यूरोप पर मंडरा रहा है धुर दक्षिणपंथी आतंकवाद का खतरा
Fri, 27 Nov 2020 03:07 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 27 Nov 2020 03:07 PM IST
सार
- पश्चिमी देशों में हुए 2014 के बाद हर साल ऐसे 35 हमले, 2019 में 49 हमले
- धुर दक्षिणपंथी आतंकवादी हमलों का सबसे बड़ा शिकार रहा है अमेरिका
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प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई
- फोटो : PTI (File)
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विस्तार
यूरोप में धुर दक्षिणपंथी आतंकवाद का खतरा गहराता जा रहा है। ये बात एक ताजा वैश्विक आतंकवाद इंडेक्स में कही गई है। इंडेक्स इंस्टीट्यूट फॉर इकॉनोमिक्स एंड पीस नाम के थिंक टैंक ने जारी किया है। इसमें कहा गया है- पिछले पांच साल का सबसे चिंताजनक घटनाक्रम धुर दक्षिणपंथी आतंकवाद का उभार है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी देशों में 2014 के बाद से हर साल धुर दक्षिणपंथी आतंकवादी संगठनों ने कम से कम 35 हमले किए। 2019 में ये संख्या 49 तक पहुंच गई। जबकि 2010 में ऐसी सिर्फ एक घटना हुई थी।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि धुर दक्षिणपंथी आतंकवाद का सबसे बड़ा शिकार अमेरिका है। 2002 से 2019 के बीच इस तरह के जो 332 हमले पश्चिमी देशों में हुए, उसकी आधी संख्या सिर्फ अमेरिका में दर्ज की गई। ब्रिटेन, फ्रांस और स्वीडन में ऐसी 132 घटनाएं हुईं। अमेरिका में हुए उन हमलों में 113 लोगों की जान गई। जान गंवाने के मामले में नॉर्वे दूसरे नंबर पर है, जहां 78 लोग धुर दक्षिणपंथी आतंकवाद का शिकार बने। न्यूजीलैंड में 51, जर्मनी में 19 और कनाडा में 16 लोग ऐसी घटनाओं की भेंट चढ़े।
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दूसरी मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि 2020 में धुर दक्षिणपंथी संगठनों ने यूरोप की राजनीति में खुली भूमिका बना ली है। कोरोना महामारी के कारण लागू किए लॉकडाउन और दूसरे प्रतिबंधों को मुद्दा बना कर उन्होंने अपने जन समर्थन में काफी विस्तार किया है। लॉकडाउन और मास्क पहनना अनिवार्य किए जाने के खिलाफ जनता के एक हिस्से की गोलबंदी करने में वे कामयाब हुए हैं। इन उपायों के जरिए कैसे लोगों की जिंदगी को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है, इस बारे में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हुए षडयंत्र की कहानियां फैलाने में वे सफल रहे हैं।
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पिछले अगस्त में जर्मनी में हजारों लॉकडाउन विरोधी प्रदर्शनकारी जर्मनी की सड़कों पर उतरे थे। उनमें से कुछ ने जर्मन संसद रिचस्टैग पर धावा बोल देने की कोशिश की थी। स्लोवाकिया में पिछले महीने सैकड़ों लोगों ने फुटबॉल मैच के दौरान दर्शकों को स्टेडियम में ना जाने देने के सरकारी नियम के विरोध में बड़ा जन प्रदर्शन किया। इसका ओयजन फासीवादी विचारधारा मानने वाली पीपुल्स पार्टी ने किया था।
अब यूरोप में यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या धुर दक्षिणपंथी पार्टियो को मिला ऐसा समर्थन चुनावों में वोट में तब्दील हो सकता है। टीवी चैनल यूरो न्यूज की वेबसाइट पर छपी एक रिपोर्ट में चेक रिपब्लिक के मेंडेल यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर रिचर्ड क्यू टर्कसानयी के हवाले से कहा गया है कि इस लिहाज से चेक रिपब्लिक और स्लोवाकिया एक दोराहे पर खड़े हैं। 1993 में हुए विभाजन तक ये दोनों गणराज्य एक ही देश- चेकोस्लोवाकिया का हिस्सा थे। प्रो. टर्कसानयी ने कहा- अलोकप्रिय और अप्रभावी सरकारों के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें धुर दक्षिणपंथी भी शामिल होते हैं। लेकिन हालिया सर्वेक्षणों से ऐसा संकेत नहीं मिला है कि उनके लिए जन समर्थन में कोई बहुत बड़ी बढ़ोतरी हुई हो।
इस बात के सबूत हाल में हुए चुनावों में भी देखने को मिले हैं। बीते अक्टूबर में ऑस्ट्रिया में हुए चुनाव में धुर दक्षिणपंथी फ्रीडम पार्टी का वोट शेयर 31 से घट कर सात फीसदी पर आ गया। जर्मनी में भी धुर दक्षिणपंथी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी के समर्थन आधार में 2019 में लगभग एक चौथाई की गिरावट देखने को मिली थी। मध्य यूरोपीय देशों में धुर दक्षिणपंथी पार्टियों का समर्थन हाल में या तो जस का तस रहा है या फिर उसमें मामूली इजाफा हुआ है।
लेकिन जानकारों का कहना है कि चुनावी जीत की संभावना ना रहने पर धुर दक्षिणपंथी संगठन अधिक से अधिक उग्र रुख अपनाते हैं और उनका एक हिस्सा आतंकवादी तौर-तरीकों में यकीन करने लगता है। हाल में ऐसी आतंकवादी घटनाओं में बढ़ोतरी के पीछे यह भी एक वजह है।