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Myanmar: म्यांमार में हवाई हमले में मारे गए 25 रोहिंग्या, यूएन प्रमुख ने लगातार बढ़ती हिंसा पर जताई चिंता
Wed, 20 Mar 2024 08:24 AM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता महतो
Updated Wed, 20 Mar 2024 08:24 AM IST
सार
म्यांमार के थाडा गांव में सोमवार देर रात करीब 1:30 बजे दो बम गिराए गए थे। इस बमबारी में 25 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में छह बच्चे भी शामिल हैं। गांववालों ने बताया कि पीड़ितों में वे लोग भी शामिल हैं जो युद्ध के दौरान आसपास के गांवों में भाग गए थे।
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संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस।
- फोटो : ANI (फाइल फोटो)
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विस्तार
पश्चिमी म्यांमार में सैन्य हवाई हमले में कुछ बच्चों समेत 25 रोहिंग्या मुस्लिम मारे गए हैं। स्थानीय मीडिया ने इस घटना की जानकारी दी है। इस हमले पर संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख ने चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार देर रात हुए इस हवाई हमले में रखाइन राज्य में मिनब्या टाउनशिप के उत्तर में स्थित थाडा गांव को निशाना बनाया गया था।
यूएन प्रमुख ने जताई चिंता
इस सैन्य हवाई हमले में कम से कम अन्य 25 लोग घायल भी हुए हैं। सैन्य सरकार ने अबतक इस हमले पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने इस हमले पर दुख जताया है। उन्होंने म्यांमार की बिगड़ती स्थिति और बढ़ते संघर्ष पर चिंता व्यक्त की है। गुटेरेस के उप प्रवक्ता ने कहा कि यूएन प्रमुख सभी प्रकार की हिंसा की निंदा करते हैं और उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा और हिंसा को समाप्त करने के लिए लिए अपने आह्वान को दोहराया।
फरवरी 2021 में आंग सान सू की से सरकार छीनने के बाद से ही म्यांमार की सेना अपने शासक के खिलाफ व्यापक सशस्र संघर्ष का मुकाबला करने के लिए हवाई हमलों में तेजी ला रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सेना के 2021 में तख्तापलट करने के बाद से 1,652 हवाई हमलों में 936 नागरिक मारे गए और 878 घायल हो गए। वहीं, इन हवाई हमलों में 137 धार्मिक इमारतें, 76 स्कूल और 28 अस्पताल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
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मरने वालों में छह बच्चे भी शामिल
थाडा का रोहिंग्या आबादी वाला गांव म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले से 340 किलोमीटर दूर है। यहां के 90 फीसदी लोग बौद्ध हैं। थाडा के पास स्थित दो गांवों ने बताया कि सोमवार को रात के करीब 1:30 बजे दो बम गिराए गए थे। इसमें 25 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में छह बच्चे भी शामिल हैं। गांववालों ने बताया कि पीड़ितों में वे लोग भी शामिल हैं जो युद्ध के दौरान आसपास के गांवों में भाग गए थे।
बता दें कि रोहिंग्या अल्पसंख्यकों को बौद्ध बहुल देश म्यांमार में लंबे समय से ही प्रताड़ित किया जा रहा है। करीबन 74,000 रोहिंग्या म्यांमार से भागकर बांग्लादेश में शरणार्थी शिविरों में चले गए। बौद्ध रखाइन, रखाइन का बहुसंख्यक जातीय समूह है, जिसे इनके पुराने नाम अराकान से भी जाना जाता है। अन्य जातीय समूहों की तरह रखाइन भी केंद्र सरकार से अपनी स्वायत्ता की मांग कर रही है।
पिछले साल नवंबर से ही हथियारों से लैस अराकान सेना रखाइन में सेना की चौकियों पर हमले कर रही है। उन्होंने पिछले तीन-चार महीनों में दो शहरों और पांच टाउनशिप में सैन्य ठिकानों पर कब्जा करने का दावा भी किया है।
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यूएन प्रमुख ने जताई चिंता
इस सैन्य हवाई हमले में कम से कम अन्य 25 लोग घायल भी हुए हैं। सैन्य सरकार ने अबतक इस हमले पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने इस हमले पर दुख जताया है। उन्होंने म्यांमार की बिगड़ती स्थिति और बढ़ते संघर्ष पर चिंता व्यक्त की है। गुटेरेस के उप प्रवक्ता ने कहा कि यूएन प्रमुख सभी प्रकार की हिंसा की निंदा करते हैं और उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा और हिंसा को समाप्त करने के लिए लिए अपने आह्वान को दोहराया।
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फरवरी 2021 में आंग सान सू की से सरकार छीनने के बाद से ही म्यांमार की सेना अपने शासक के खिलाफ व्यापक सशस्र संघर्ष का मुकाबला करने के लिए हवाई हमलों में तेजी ला रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सेना के 2021 में तख्तापलट करने के बाद से 1,652 हवाई हमलों में 936 नागरिक मारे गए और 878 घायल हो गए। वहीं, इन हवाई हमलों में 137 धार्मिक इमारतें, 76 स्कूल और 28 अस्पताल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
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मरने वालों में छह बच्चे भी शामिल
थाडा का रोहिंग्या आबादी वाला गांव म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले से 340 किलोमीटर दूर है। यहां के 90 फीसदी लोग बौद्ध हैं। थाडा के पास स्थित दो गांवों ने बताया कि सोमवार को रात के करीब 1:30 बजे दो बम गिराए गए थे। इसमें 25 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में छह बच्चे भी शामिल हैं। गांववालों ने बताया कि पीड़ितों में वे लोग भी शामिल हैं जो युद्ध के दौरान आसपास के गांवों में भाग गए थे।
बता दें कि रोहिंग्या अल्पसंख्यकों को बौद्ध बहुल देश म्यांमार में लंबे समय से ही प्रताड़ित किया जा रहा है। करीबन 74,000 रोहिंग्या म्यांमार से भागकर बांग्लादेश में शरणार्थी शिविरों में चले गए। बौद्ध रखाइन, रखाइन का बहुसंख्यक जातीय समूह है, जिसे इनके पुराने नाम अराकान से भी जाना जाता है। अन्य जातीय समूहों की तरह रखाइन भी केंद्र सरकार से अपनी स्वायत्ता की मांग कर रही है।
पिछले साल नवंबर से ही हथियारों से लैस अराकान सेना रखाइन में सेना की चौकियों पर हमले कर रही है। उन्होंने पिछले तीन-चार महीनों में दो शहरों और पांच टाउनशिप में सैन्य ठिकानों पर कब्जा करने का दावा भी किया है।