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Politics: पीओजेके में हिंसक प्रदर्शनों के बाद अब सियासी तूफान, तीन मंत्रियों का इस्तीफा

Sun, 19 Oct 2025 05:13 AM IST
लव गौर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फराबाद।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फराबाद। Published by: लव गौर Updated Sun, 19 Oct 2025 05:13 AM IST
सार

Pok Political Crisis Pakistan: पीओजेके में हिंसक प्रदर्शनों के बाद अब सियासी तूफान मच गया है। तीन मंत्रियों ने इस्तीफा दिया है। इन पर पाकिस्तान में रह रहे 25 लाख कश्मीरी शरणार्थियों की उपेक्षा का आरोप है।  

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After violent protests in PoJK chaudhary anwarul haq cabinet three ministers resign
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में तीन वरिष्ठ मंत्रियों का इस्तीफा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर (पीओजेके) में प्रधानमंत्री चौधरी अनवारुल हक के मंत्रिमंडल के तीन वरिष्ठ मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया। पीओजेके में हाल ही में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इन मंत्रियों ने अनवारुल हक पर पीओके निवासियों और पाकिस्तान में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया। तीन मंत्रियों के इस्तीफे से पीओके में पैदा हुआ राजनीतिक संकट पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार के सामने नई चुनौती बन सकता है।
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पाकिस्तानी वेबसाइट द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, पीओके के सूचना मंत्री पीर मजहर सईद ने सबसे पहले इस्तीफा दिया था। इसके बाद शनिवार को वित्त मंत्री अब्दुल मजीद खान, खाद्य मंत्री चौधरी अकबर इब्राहिम और असीम शरीफ बट ने इस्तीफे की घोषणा कर दी। इन नेताओं ने इस्तीफे के बाद जारी बयान में कहा कि हक की सरकार पीओके के लोगों और पाकिस्तान में रह रहे 25 लाख कश्मीरी शरणार्थियों के मुद्दे पर फेल होने की वजह से नैतिक और राजनीतिक वैधता खो चुकी है। उन्होंने कश्मीरी शरणार्थियों के सांविधानिक और राजनीतिक अधिकारों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया।
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कश्मीरियों के हक सुरक्षित नहीं होने का आरोप
इस्तीफा देने वाले मंत्रियों ने पीएम अनवारुल हक के भी इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि हक को सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। इन मंत्रियों ने हालिया अशांति से निपटने के सरकार के तरीके की भी कड़ी आलोचना की है। त्यागपत्र में वित्त मंत्री अब्दुल मजीद खान ने कहा कि उनका रुख कश्मीरी शरणार्थियों के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा में निहित है। वह शरणार्थियों के अधिकारों के प्रति निष्ठा की वजह से सरकार से अलग हो रहे हैं।
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आने वाले समय में पाकिस्तान की सिरदर्दी और बढ़ने वाली है। तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) सहित पाकिस्तान के कई धार्मिक समूहों ने एक साथ मिलकर अहल-ए-सुन्नाह पाकिस्तान नामक नया गठजोड़ बनाया है। मुरीदके नरसंहार को लेकर इस गठजोड़ में शामिल संगठन काफी उग्र हो गए हैं। इसने मांगे न माने जाने पर सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है। मुरीदके में विरोध प्रदर्शन के दौरान टीएलपी के कई लोग मारे गए थे।

जम्मू-कश्मीर साझा कार्रवाई समिति की तीखी आलोचना  
पीओजेके में वित्त मंत्री के तौर पर इस्तीफा देने वाले अब्दुल मजीद खान ने जम्मू-कश्मीर साझा कार्रवाई समिति (जेएएसी) की तीखी आलोचना की, क्योंकि उन्होंने विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटें खत्म करने की विभाजनकारी और अवसरवादी मांग को आगे बढ़ाया है। खान ने तर्क दिया कि जेएएसी और संघीय प्रतिनिधियों के बीच हुए समझौते में वैधता तथा आम सहमति का अभाव था। इस कारण हजारों विस्थापित कश्मीरियों के अधिकारों पर जोर दिया गया।

शरणार्थी मात्र राजनीतिक संख्या नहीं देशभक्त पाकिस्तानी: इब्राहिम
खाद्य मंत्री चौधरी अकबर इब्राहिम ने कहा कि शरणार्थी मात्र राजनीतिक संख्या नहीं, बल्कि देशभक्त पाकिस्तानी हैं, जिन्होंने दशकों तक अलगाव और कष्ट सहे हैं। उन्होंने हक सरकार पर उनकी सांविधानिक स्थिति की रक्षा करने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे नेतृत्व में सेवा जारी रखना असंभव हो गया है। उन्होंने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।

बलूचिस्तान में लोगों को जबरन उठाने की घटनाएं बढ़ीं
सियासी उथल-पुथल के बीच बलूचिस्तान की ताजा रिपोर्टें पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर जबरन गुमशुदगी की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि दर्शा रही हैं। इस कारण असहमति दबाने के लिए राज्य द्वारा अपहरण की रणनीति के लगातार इस्तेमाल पर नए सिरे से आक्रोश फैल रहा है। बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के दिनों में एक किशोर छात्र सहित कई नागरिकों को जबरन अगवा कर लिया गया है। इनमें अब्दुल्ला दसवीं का छात्र है। उसे सुरक्षाकर्मियों ने केच जिले के टंप के तजाबन क्षेत्र में उसके घर से हिरासत में लिया।


शीर्ष अफसर का अपहृत बेटा मिला
पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत के जियारत क्षेत्र के निकट एक शीर्ष सरकारी अधिकारी के अपहृत बेटे को ढूंढ़ निकाला है। जियारत के सहायक आयुक्त (एसी) मुहम्मद अफजल बकी और उनके बेटे का लगभग दो माह पूर्व जियारत के पास से अपहरण कर लिया गया था। पुलिस ने कहा, हमने सहायक आयुक्त के बेटे मुस्तानसर बिलाल को हरनाई के जर्दालो इलाके में पहुंचने के बाद बरामद कर लिया है।
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