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सऊदी की तेल कंपनी पर हुए हमले के बाद, अमेरिकी अफसर चाहते हैं ईरान के खिलाफ हो कार्रवाई
Wed, 18 Sep 2019 02:36 PM IST
Trainee Trainee
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Trainee Trainee
Updated Wed, 18 Sep 2019 02:36 PM IST
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डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)
सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको पर हुए हमले के बाद अमेरिका ने ईरानी तेल संयंत्रों पर हमले की तैयारी कर ली थी। रिपोर्टस के अनुसार, अमेरिकी सैन्य अफसरों ने सोमवार को राष्ट्रीय सुरक्षा बैठक में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने इसको लेकर योजना भी रखी थी। इसमें अफसरों द्वारा सैन्य हमलों के अलावा साइबर हमलों का विकल्प भी पेश किया गया था।
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अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एनबीसी और पॉलिटिको ने ट्रंप के करीबी अधिकारियों के हवाले से इस बात की जानकारी दी कि ट्रंप अपने चुनावी वादे को पूरा करने के लिए ईरान पर हमला नहीं करना चाहते थे। बता दें कि ट्रंप ने 2016 में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के अभियान में कहा था कि उनके शासन में कोई नया विदेशी विवाद शुरू नहीं होगा।
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वहीं, इस हमले के बाद स्थिति का जायजा लेने बुधवार को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो सऊदी अरब पहुंचेंगे। साथ ही वे यूएई भी जाएंगे। जेद्दा में वह सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ बैठक करेंगे। इसमें दोनों के बीच ईरानी हमले को लेकर मुकाबले की रणनीति बनाने पर चर्चा हो सकती है।
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वही, अन्य रिपोर्टस में दावा किया गया है कि अमेरिका ने सऊदी पर हुए हमले के लिए इस्तेमाल में लाई गई ईरानी लॉन्च साइट का पता लगा लिया है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अफसर ने कहा कि यह जगह दक्षिणी ईरान और खाड़ी के पूर्व में स्थित हैं। हालांकि ईरानी राष्ट्रपति हसन रुहानी ने हमलों में हाथ होने को नकार दिया था।
यमन के हूती विद्रोहियों ने अरामको पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी। हूती विद्रोहियों को ईरान की तरफ से समर्थन प्राप्त हैं। वहीं, अमेरिका और सऊदी अरब लंबे समय से यमन में सैन्य ऑपरेशन चला रहे हैं। दोनों राष्ट्र वहां पूर्व राष्ट्रपति मंसूर हादी को सत्ता में लाना चाहते हैं, जबकि हूती विद्रोही इसके खिलाफ हैं।