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Afghan-PAK Conflict: पानी की बूंद-बूंद के लिए तरसेगा पाकिस्तान! भारत के बाद अब अफगानिस्तान नकेल कसने को तैयार
Fri, 24 Oct 2025 06:25 PM IST
पवन पांडेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
Published by: पवन पांडेय
Updated Fri, 24 Oct 2025 06:25 PM IST
सार
Afghanistan-Pakistan Conflict: भारत के बाद अब अफगानिस्तान भी पाकिस्तान पर नकेल कसने के लिए तैयारी कर रहा है। तालिबान सरकार की तरफ से कुनर नदी पर बांध बनाया जाएगा, इसके लिए उसके सर्वोच्च नेता ने आदेश भी जारी किया है। कुनर नदी पर बांध बनने से काबुल नदी पर असर पड़ेगा, जिससे पाकिस्तान में पानी की भारी किल्लत होनी तय है।
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पाकिस्तान पर नकेल कसने की तैयारी में तालिबान (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : ANI
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विस्तार
तालिबान के नेतृत्व वाली अफगानिस्तान सरकार ने पाकिस्तान को मिलने वाले पानी को नियंत्रित करने की तैयारी शुरू कर दी है। अफगानिस्तान के सर्वोच्च नेता मौलवी हिबातुल्लाह अखुंजदा ने कहा है कि कुनर नदी पर जल्द से जल्द बांध बनाया जाएगा। तालिबान सरकार की तरफ से यह फैसला उस समय लिया गया है जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुई लड़ाई में सैकड़ों लोग मारे गए थे। तालिबान के सूचना मंत्रालय ने बताया कि सरकार ने देशी कंपनियों के साथ ही इस परियोजना के ठेके करने का निर्देश दिया है।
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क्यों महत्वपूर्ण है कुनर नदी?
कुनर नदी लगभग 480 किलोमीटर लंबी है और हिंदू कुश पर्वत से निकलकर पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में मिलती है, जहां यह काबुल नदी में जुड़ती है। काबुल नदी, जो बाद में सिंधु नदी में मिलती है, पाकिस्तान के लिए सिंचाई और जल आपूर्ति का मुख्य स्रोत है। अगर कुनर नदी का पानी कम हुआ, तो सिंधु नदी और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत पर भी असर पड़ेगा।
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भारत ने पाकिस्तान पर कसी नकेल
भारत ने अप्रैल 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ सिंधु जल संधि को फिलहाल के लिए निलंबित कर दिया था। उसके बाद अफगानिस्तान ने भी पाकिस्तान के पानी पर नियंत्रण करने का कदम उठाया। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कोई औपचारिक जल-साझा समझौता नहीं है।
भारत और अफगानिस्तान के बीच सहयोग
अफगान विदेश मंत्री एम आमिर खान मुत्ताकी हाल ही में भारत आए और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मिले। दोनों देशों ने हाइड्रोपावर और बांध परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। अफगान-भारत मित्रता (सलमा बांध), 2016 में भारत के 300 मिलियन डॉलर की मदद से बना, 42 मेगावॉट बिजली देता है और 75000 हेक्टेयर में सिंचाई करता है। शाहतूत बांध, काबुल नदी की सहायक नदी मैदन पर 2021 में भारत के 250 मिलियन डॉलर निवेश से बनने जा रहा है। यह दो मिलियन लोगों को पीने का पानी देगा और 4,000 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में सिंचाई करेगा।
यह भी पढ़ें - Ukraine: यूक्रेन को 2027 तक वित्तीय मदद देगा यूरोपीय संघ, जेलेंस्की ने जताई खुशी; अमेरिकी फैसले की भी तारीफ की
अफगानिस्तान का उद्देश्य, लेकिन बढ़ेगा तनाव
तालिबान की यह पहल अफगानिस्तान की जल संप्रभुता को मजबूत करने और पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। इससे पाकिस्तान में जल संकट, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। पाकिस्तान ने पहले ही चेतावनी दी है कि यह कदम क्षेत्रीय जल संकट और ऊर्जा-खाद्य सुरक्षा पर गंभीर असर डाल सकता है। भारत के बाद अब अफगानिस्तान भी पाकिस्तान के पानी पर नियंत्रण की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। यह क्षेत्रीय जल-सुरक्षा और राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकता है।
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क्यों महत्वपूर्ण है कुनर नदी?
कुनर नदी लगभग 480 किलोमीटर लंबी है और हिंदू कुश पर्वत से निकलकर पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में मिलती है, जहां यह काबुल नदी में जुड़ती है। काबुल नदी, जो बाद में सिंधु नदी में मिलती है, पाकिस्तान के लिए सिंचाई और जल आपूर्ति का मुख्य स्रोत है। अगर कुनर नदी का पानी कम हुआ, तो सिंधु नदी और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत पर भी असर पड़ेगा।
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भारत ने पाकिस्तान पर कसी नकेल
भारत ने अप्रैल 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ सिंधु जल संधि को फिलहाल के लिए निलंबित कर दिया था। उसके बाद अफगानिस्तान ने भी पाकिस्तान के पानी पर नियंत्रण करने का कदम उठाया। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कोई औपचारिक जल-साझा समझौता नहीं है।
भारत और अफगानिस्तान के बीच सहयोग
अफगान विदेश मंत्री एम आमिर खान मुत्ताकी हाल ही में भारत आए और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मिले। दोनों देशों ने हाइड्रोपावर और बांध परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। अफगान-भारत मित्रता (सलमा बांध), 2016 में भारत के 300 मिलियन डॉलर की मदद से बना, 42 मेगावॉट बिजली देता है और 75000 हेक्टेयर में सिंचाई करता है। शाहतूत बांध, काबुल नदी की सहायक नदी मैदन पर 2021 में भारत के 250 मिलियन डॉलर निवेश से बनने जा रहा है। यह दो मिलियन लोगों को पीने का पानी देगा और 4,000 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में सिंचाई करेगा।
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अफगानिस्तान का उद्देश्य, लेकिन बढ़ेगा तनाव
तालिबान की यह पहल अफगानिस्तान की जल संप्रभुता को मजबूत करने और पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। इससे पाकिस्तान में जल संकट, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। पाकिस्तान ने पहले ही चेतावनी दी है कि यह कदम क्षेत्रीय जल संकट और ऊर्जा-खाद्य सुरक्षा पर गंभीर असर डाल सकता है। भारत के बाद अब अफगानिस्तान भी पाकिस्तान के पानी पर नियंत्रण की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। यह क्षेत्रीय जल-सुरक्षा और राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकता है।