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अफगानिस्तान: तालिबान के खौफ से अंतिम बची 83 साल की यहूदी महिला टोवा मोरादी ने भी देश छोड़ा
Sat, 30 Oct 2021 02:52 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, यरुशलम
एजेंसी, यरुशलम
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sat, 30 Oct 2021 02:52 AM IST
सार
यहूदी समुदाय की 83 साल की टोवा मोरादी नाम की एक बुजुर्ग महिला ने तालिबान की खौफ के बीच देश छोड़ दिया है। इससे पहल बीते सितंबर में जेबुलोन सिमेंटोव नाम के एक शख्स ने दावा किया था कि वह अफगानिस्तान में आखिरी यहूदी है और उसके जाने के बाद से अफगानिस्तान में कोई भी यहूदी नहीं बचा है।
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old women
- फोटो : Social Media
विस्तार
अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता पर काबिज होने के बाद पहली बार अफगानिस्तान में यहूदी समुदाय का कोई नहीं बचा है। यहूदी समुदाय की 83 साल की टोवा मोरादी नाम की एक बुजुर्ग महिला ने तालिबान की खौफ के बीच देश छोड़ दिया है।
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इससे पहल बीते सितंबर में जेबुलोन सिमेंटोव नाम के एक शख्स ने दावा किया था कि वह अफगानिस्तान में आखिरी यहूदी है और उसके जाने के बाद से अफगानिस्तान में कोई भी यहूदी नहीं बचा है। हालांकि बाद में पता चला कि वह अफगानिस्तान में रह रहा आखिरी यहूदी नहीं था। जेबुलोन सिमेंटोव की चचेरी बहन मोरादी का जन्म अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में ही हुआ था।
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पूरी जिंदगी अफगानिस्तान में बिताने के बाद आज मोरादी कहती है कि वह अपने देश अफगानिस्तान से बहुत प्यार करती हैं, लेकिन अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए उसे देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। मोरादी ने कहा कि पिछले महीने उसके चचेरे भाई सिमेंटोव ने देश छोड़ा था। अब उसे अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए देश छोड़ना पड़ रहा है। मोरादी के दस भाई-बहन हैं, जो यरुशलम में रहते थे।
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16 साल की उम्र में मोरादी ने घर छोड़कर एक मुस्लिम युवक से शादी की थी और अफगानिस्तान में अपना घर बसाया था। मोरादी कहती है कि उसने कभी अपना धर्म नहीं बदला। वह आज भी यहूदी परंपराओं को अपना रही है। मोरादी ने कहा कि जब वह युवा थी, उस वक्त देश की स्थिति आज जैसी खतरनाक नहीं थी। उसका अपने मुस्लिम पड़ोसियों से अच्छा रिश्ता है। उसके पड़ोसियों को इस बात से कोई आपत्ति नहीं है कि वह यहूदी है।