अमेरिका में टीकाकरण के बारे में नए आदेश: क्या असर होगा वैक्सीन पर जो बाइडन के ताजा दांव का?
जानकारों के मुताबिक कई बड़ी कंपनियों की पहले से इच्छा रही है कि उनके सभी कर्मचारी टीका लगवा लें। लेकिन वैक्सीन विरोधी भावना के आगे वे लाचार रही हैं। अब ऐसी कंपनियों को नए सिरे से प्रयास करने का मौका मिला है...
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अमेरिका में राष्ट्रपति जो बाइडन ने टीकाकरण के बारे में जो ताजा आदेश जारी किए हैं, उनका वहां राजनीति और कारोबारी माहौल पर गहरा असर होने की संभावना है। जानकारों का कहना है कि अमेरिका में अभी माहौल ऐसा है कि टीकाकरण के लिए जारी किसी ऐसे आदेश का असर सिर्फ स्वास्थ्य क्षेत्र तक ही सीमित नहीं रहेगा। न्यूज वेबसाइट एक्सियोस.कॉम ने राजनीतिक टीकाकार हैन्स निकोल्स के मुताबिक व्हाइट हाउस के अधिकारी इस बात के प्रति सचेत हैं कि बाइडन को लोगों ने वोट मुख्य रूप से कोरोना वायरस पर काबू पाने के लिए दिया था। इसलिए अगर वे इसमें सफल नहीं हुए, तो उनके पूरे शासन पर सवाल खड़ा हो जाएगा।
दूसरी तरफ, जिन अमेरिकियों ने टीका लगवा लिया है, उनमें वैक्सीन विरोधियों के प्रति गुस्सा बढ़ता जा रहा है। बाइडन ने अपने ताजा आदेश के लिए उन अमेरिकियों की भावनाओं का ख्याल किया है। इससे उन्होंने उन लगभग आठ करोड़ अमेरिकियों के लिए कठिनाई खड़ी कर दी है, जिन्होंने अब तक टीका नहीं लगवाया है। नए नियमों के मुताबिक अमेरिका सरकार और उसकी वित्तीय मदद से चलने वाले ठेकेदारों के तमाम कर्मचारियों के लिए टीका लगवाना अनिवार्य कर दिया गया है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि बाइडन लगातार कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट से संक्रमण फैलने के लिए टीका न लगवाने वाले अमेरिकियों को दोषी ठहराते रहे हैँ। अब उन्होंने उन लोगों की मुश्किल बढ़ा कर महामारी पर काबू पाने की एक और पहल की है।
विश्लेषकों के मुताबिक डेमोक्रेटिक पार्टी समर्थक ज्यादातर मतदाताओं ने टीका लगवा लिया है। इसलिए बाइडन की ताजा पहल से डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए कोई समस्या खड़ी नहीं होगी। इस निर्णय का विरोध रिपब्लिकन समर्थक करेंगे, जिनसे अब सख्ती से पेश आने का मन बाइडन ने बना लिया है। लेकिन कुछ जानकारों का कहना है कि अगर अधिक संख्या में कर्मचारी टीका ना लगवाने पर अड़े रहे, तो उससे सरकारी कामकाज में कर्मचारियों के अभाव की समस्या आ सकती है। खासकर अगर ऐसा अस्पतालों और नर्सिंग होम्स में हुआ, तो उससे नई दिक्कतें खड़ी हो जाएंगी।
खबरों के मुताबिक प्राइवेट सेक्टर की कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित करने में नाकाम रही हैं। लेकिन अब उन्हें सख्ती दिखाने का नया मौका मिलेगा। अगर बड़ी कंपनियों ने बाइडन के ताजा आदेश को आधार बना कर अपने यहां टीकाकरण अनिवार्य किया, तो उससे छोटी कंपनियां भी ऐसा करने के लिए प्रेरित होंगी।
जानकारों के मुताबिक कई बड़ी कंपनियों की पहले से इच्छा रही है कि उनके सभी कर्मचारी टीका लगवा लें। लेकिन वैक्सीन विरोधी भावना के आगे वे लाचार रही हैं। अब ऐसी कंपनियों को नए सिरे से प्रयास करने का मौका मिला है। एक खबर के मुताबिक तेल क्षेत्र की बड़ी कंपनी शेल ऐसा नियम लागू करने पर विचार कर रही है, जिसके तहत टीका ना लगवाने वाले कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा। उधर डेल्टा एयरलाइंस ने कहा है कि जो कर्मचारी टीका लगवाने से इनकार करेंगे, उनसे कंपनी स्वास्थ्य बीमा अधिभार (सरचार्ज) वसूलेगी।
लेकिन कुछ खबरों में बताया गया है कि वैक्सीन को लेकर संदेह की भावना देश में इतनी गहरी है कि हो सकता है कि कई कर्मचारी टीका लगवाने के बजाय नौकरी छोड़ना पसंद करें। इससे कंपनियों के सामने कर्मचारियों के अभाव की चुनौती आ सकती है। लेकिन जो बाइडन ने ऐसी तमाम संभावनाओं और आशंकाओं के बीच टीकाकरण के पक्ष में एक मजबूत फैसला लिया है। इसका आम तौर पर स्वागत किया गया है।