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चीन और रूस का दावा: उत्तर कोरियाई कर्मचारियों को वापस भेजा जा रहा उनके देश
Wed, 27 Mar 2019 02:08 PM IST
Shilpa Thakur
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shilpa Thakur
Updated Wed, 27 Mar 2019 02:08 PM IST
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किम जोंग उन और डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : File Photo
चीन और रूस अपने यहां काम कर रहे आधे से ज्यादा उत्तर कोरिया के लोगों को उनके घर वापस भेज चुके हैं। माना जा रहा है कि ये संख्या हजारों में है। उत्तर कोरियाई सिक्योरिटी काउंसिल सैंक्शन कमिटि को सौंपी गई रिपोर्ट में ये बात कही गई है।
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रूस की रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर कोरिया के वैध कार्य परमिट वाले लोगों की संख्या घटकर 30,023 से 11,490 हो गई है। उत्तर कोरिया के मजबूत सहयोगी चीन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उसने आधे से ज्यादा आय अर्जित करने वाले उत्तर कोरियाई नागरिकों को वापस भेज दिया है।
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र के एक राजनयिक ने पुष्टि की है कि बीजिंग और मॉस्को की एक पेज की रिपोर्ट को सैंक्शन कमिटि को सौंपा गया है। दिसंबर 2017 के परिषद के प्रस्ताव के अनुसार आवश्यक है कि इस साल के अंत तक सभी उत्तर कोरियाई श्रमिकों को स्वदेश वापस भेज दिया जाए। हालांकि इस खबर की पुष्टि सीएनएन ने भी नहीं की है।
चीन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वो नहीं चाहता कि इस बारे में लोगों को पता चले। पत्रकारों से बात करते हुए मंगलवार को चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि चीन उत्तर कोरिया के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को "ईमानदारी से और सख्ती से" लागू कर रहा था।
हाल के वर्षों में अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध को लेकर जोर देने की बात कही है। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने कहा है, "सभी को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि कोई भी अपनी गतिविधियों से उत्तर कोरिया पर लगाए गए प्रतिबंधों में शामिल तो नहीं है।"
अमेरिका का मानना है कि उत्तर कोरिया के विदेश में करीब एक लाख कर्मचारी हैं। इनमें सबसे ज्यादा लोग रूस और चीन में रह रहे हैं। माना जाता है कि इन्हीं लोगों द्वारा लाए गए पैसे से परमाणु मिसाइल प्रोग्राम को विकसित किया जाता है। इससे पहले अमेरिकी विदेश विभाग ये बोल चुका है कि उत्तर कोरिया के श्रमिक रूस में दास की तरह काम करते हैं।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार ये सच भी है कि ये श्रमिक बेहद ही जर्जर वाली जगहों में रहने को मजबूर हैं। वहीं उत्तर कोरिया भी लंबे समय से इन प्रतिबंधों को हटाने की मांग कर रहा है क्योंकि इनसे उसकी अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। इन प्रतिबंधों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की दो वार्ताओं के बाद भी नहीं हटाया गया है।