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'हालात वैसे ही हैं': अब्बास अराघची का अमेरिका पर निशाना, वियतनाम युद्ध और फाइव ओ क्लॉक फॉलीज का किया जिक्र
Sat, 21 Mar 2026 12:58 AM IST
Devesh Tripathi
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 21 Mar 2026 12:58 AM IST
सार
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका के भीतर भी पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अराघची के अनुसार, इतिहास की तरह ही इस बार भी दावों और वास्तविकता के बीच का अंतर साफ दिखाई दे रहा है।
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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची
- फोटो : ANI/Reuters
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विस्तार
पश्चिम एशिया में हर बदलते दिन के साथ संघर्ष और गहराता जा रहा है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ चल रहे तनाव के बीच वियतनाम युद्ध का उदाहरण देते हुए तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी नेतृत्व जमीन की हकीकत से अलग बयान देता था, वैसी ही स्थिति आज ईरान को लेकर भी देखने को मिल रही है।
अब्बास अराघची ने अपने बयान में फाइव ओ क्लॉक फॉलीज का जिक्र किया, जो 1960 के दशक में साइगॉन में अमेरिकी सेना की दैनिक प्रेस ब्रीफिंग को कहा जाता था। इन ब्रीफिंग में युद्ध में जीत का दावा किया जाता था, जबकि वास्तविक स्थिति इसके उलट थी। वियतनाम युद्ध में अमेरिका के 50 हजार से अधिक सैनिक मारे गए थे और कुल मिलाकर करीब 30 लाख लोगों की जान गई थी।
ये भी पढ़ें: West Asia Crisis: मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका-इस्राइल पर जीत का किया दावा; परमाणु हथियारों पर बोले पेजेशकियन
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वियतनाम युद्ध पर क्या बोले ईरानी विदेश मंत्री?
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि उस समय भी अमेरिकी जनरल विलियम वेस्टमोरलैंड ने देश लौटकर यह भरोसा दिलाया था कि युद्ध में प्रगति हो रही है और जीत करीब है। लेकिन जनवरी 1968 में टेट ऑफेंसिव के बाद यह धारणा पूरी तरह टूट गई, जब उत्तर वियतनाम और वियतकॉन्ग ने एक साथ 100 से ज्यादा शहरों पर हमला किया।
अराघची ने मौजूदा हालात की तुलना करते हुए कहा कि आज भी अमेरिकी सरकार और जमीनी सच्चाई में अंतर दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि जहां अमेरिका ईरान की वायु रक्षा प्रणाली के खत्म होने की बात कह रहा है, वहीं एक एफ 35 लड़ाकू विमान को ईरानी हमले के बाद इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी।
एफ 35 लड़ाकू विमान पर क्या बोला अमेरिका?
इस घटना पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा कि एक एफ 35 विमान ने ईरान के ऊपर मिशन के बाद क्षेत्रीय एयरबेस पर सुरक्षित लैंडिंग की है और मामले की जांच की जा रही है।
अराघची ने यह भी कहा कि अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती को लेकर किए जा रहे दावों के विपरीत, यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन जैसे विमानवाहक पोत अपने अग्रिम मोर्चों से पीछे हटे हैं। हालांकि, जानकारी के अनुसार यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड में आग लगने के बाद उसे मरम्मत के लिए ग्रीस के क्रेट द्वीप की ओर ले जाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि यह घटना युद्ध से जुड़ी नहीं थी।
ये भी पढ़ें: West Asia Crisis: 'कायरों हम इसे याद रखेंगे', ईरान युद्ध में शामिल न होने पर NATO देशों पर फिर भड़के ट्रंप
ईरान ने अमेरिकी नुकसान पर किया क्या दावा?
ईरान का दावा है कि मौजूदा संघर्ष में अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है और करीब 200 घायल हुए हैं। वहीं ईरान में 1400 से अधिक लोगों की जान गई है और 18000 लोग घायल हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने इस संघर्ष में 12 एमक्यू 9 रीपर ड्रोन भी खो दिए हैं और मार्च महीने में चार अन्य मानवयुक्त विमान भी दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं।
वियतनाम युद्ध और टेट ऑफेंसिव
उत्तर वियतनाम (वामपंथी) और दक्षिण वियतनाम (अमेरिका समर्थित) के बीच लड़ी गई यह जंग शीत युद्ध की राजनीति से जुड़ी थी। इसमें अमेरिका ने वामपंथ को फैलने से रोकने के लिए हस्तक्षेप किया, जबकि सोवियत संघ और चीन ने उत्तर वियतनाम का समर्थन किया। यह युद्ध 1955 से 1975 तक चला और आखिरकार उत्तर वियतनाम की जीत हुई।
इस युद्ध में लाखों लोगों की जान गई और अमेरिका को सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ा। वहीं, टेट ऑफेंसिव को वियतनाम युद्ध का निर्णायक मोड़ माना जाता है, जिसने अमेरिका की वापसी की दिशा तय कर दी। 1968 में एक बड़ा सैन्य अभियान हुआ, जो टेट ऑफेंसिव कहलाया।
इसमें उत्तर वियतनाम और वियतकॉन्ग ने टेट त्योहार के दौरान अचानक दक्षिण वियतनाम और अमेरिकी ठिकानों पर व्यापक हमले किए। हालांकि अमेरिका और दक्षिण वियतनाम ने इन हमलों को सैन्य रूप से विफल कर दिया, लेकिन इस घटना का मनोवैज्ञानिक असर बहुत गहरा था। इसने अमेरिकी जनता का युद्ध पर भरोसा हिला दिया और यह साफ कर दिया कि वियतनाम युद्ध जीतना आसान नहीं है।
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अब्बास अराघची ने अपने बयान में फाइव ओ क्लॉक फॉलीज का जिक्र किया, जो 1960 के दशक में साइगॉन में अमेरिकी सेना की दैनिक प्रेस ब्रीफिंग को कहा जाता था। इन ब्रीफिंग में युद्ध में जीत का दावा किया जाता था, जबकि वास्तविक स्थिति इसके उलट थी। वियतनाम युद्ध में अमेरिका के 50 हजार से अधिक सैनिक मारे गए थे और कुल मिलाकर करीब 30 लाख लोगों की जान गई थी।
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वियतनाम युद्ध पर क्या बोले ईरानी विदेश मंत्री?
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि उस समय भी अमेरिकी जनरल विलियम वेस्टमोरलैंड ने देश लौटकर यह भरोसा दिलाया था कि युद्ध में प्रगति हो रही है और जीत करीब है। लेकिन जनवरी 1968 में टेट ऑफेंसिव के बाद यह धारणा पूरी तरह टूट गई, जब उत्तर वियतनाम और वियतकॉन्ग ने एक साथ 100 से ज्यादा शहरों पर हमला किया।
अराघची ने मौजूदा हालात की तुलना करते हुए कहा कि आज भी अमेरिकी सरकार और जमीनी सच्चाई में अंतर दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि जहां अमेरिका ईरान की वायु रक्षा प्रणाली के खत्म होने की बात कह रहा है, वहीं एक एफ 35 लड़ाकू विमान को ईरानी हमले के बाद इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी।
एफ 35 लड़ाकू विमान पर क्या बोला अमेरिका?
इस घटना पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा कि एक एफ 35 विमान ने ईरान के ऊपर मिशन के बाद क्षेत्रीय एयरबेस पर सुरक्षित लैंडिंग की है और मामले की जांच की जा रही है।
अराघची ने यह भी कहा कि अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती को लेकर किए जा रहे दावों के विपरीत, यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन जैसे विमानवाहक पोत अपने अग्रिम मोर्चों से पीछे हटे हैं। हालांकि, जानकारी के अनुसार यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड में आग लगने के बाद उसे मरम्मत के लिए ग्रीस के क्रेट द्वीप की ओर ले जाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि यह घटना युद्ध से जुड़ी नहीं थी।
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ईरान ने अमेरिकी नुकसान पर किया क्या दावा?
ईरान का दावा है कि मौजूदा संघर्ष में अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है और करीब 200 घायल हुए हैं। वहीं ईरान में 1400 से अधिक लोगों की जान गई है और 18000 लोग घायल हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने इस संघर्ष में 12 एमक्यू 9 रीपर ड्रोन भी खो दिए हैं और मार्च महीने में चार अन्य मानवयुक्त विमान भी दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं।
वियतनाम युद्ध और टेट ऑफेंसिव
उत्तर वियतनाम (वामपंथी) और दक्षिण वियतनाम (अमेरिका समर्थित) के बीच लड़ी गई यह जंग शीत युद्ध की राजनीति से जुड़ी थी। इसमें अमेरिका ने वामपंथ को फैलने से रोकने के लिए हस्तक्षेप किया, जबकि सोवियत संघ और चीन ने उत्तर वियतनाम का समर्थन किया। यह युद्ध 1955 से 1975 तक चला और आखिरकार उत्तर वियतनाम की जीत हुई।
इस युद्ध में लाखों लोगों की जान गई और अमेरिका को सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ा। वहीं, टेट ऑफेंसिव को वियतनाम युद्ध का निर्णायक मोड़ माना जाता है, जिसने अमेरिका की वापसी की दिशा तय कर दी। 1968 में एक बड़ा सैन्य अभियान हुआ, जो टेट ऑफेंसिव कहलाया।
इसमें उत्तर वियतनाम और वियतकॉन्ग ने टेट त्योहार के दौरान अचानक दक्षिण वियतनाम और अमेरिकी ठिकानों पर व्यापक हमले किए। हालांकि अमेरिका और दक्षिण वियतनाम ने इन हमलों को सैन्य रूप से विफल कर दिया, लेकिन इस घटना का मनोवैज्ञानिक असर बहुत गहरा था। इसने अमेरिकी जनता का युद्ध पर भरोसा हिला दिया और यह साफ कर दिया कि वियतनाम युद्ध जीतना आसान नहीं है।
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