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India In UNGA: खतरों का दृढ़ता से सामना करने पर जोर, आतंकवाद का मुकाबला हमारी प्राथमिकता; यूएन में बोले जयशंकर

Sun, 28 Sep 2025 12:01 AM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु चंदेल Updated Sun, 28 Sep 2025 12:01 AM IST
सार

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर 80वें संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। महासभा में उन्होंने आतंकवाद से लेकर टैरिफ तक कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने यूएन महासभा में पाकिस्तान पर कड़ा प्रहार किया और कहा कि वहां आतंकवादी ठिकाने संचालित हो रहे हैं और आतंकियों को सार्वजनिक रूप से महिमामंडित किया जाता है। 

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80th UNGA EAM Jaishankar Address Russia LAVROV aggression against country and other country leaders statement
एस. जयशंकर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

80वें संयुक्त राष्ट्र महासभा के सामान्य बहस सत्र में आइसलैंड की विदेश मंत्री के बाद भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने अपना संबोधन शुरू किया है। उन्होंने भारत के लोगों की ओर से नमस्कार करते हुए अपने भाषण की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि हम इस अद्वितीय संस्था की स्थापना के आठ दशक बाद यहां एकत्रित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र चार्टर हमसे न केवल युद्ध रोकने, बल्कि शांति स्थापित करने का आह्वान करता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा को बताया कि सतत विकास लक्ष्य यानी एसडीजी एक दुखद तस्वीर पेश करते हैं।
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आगे उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि हमें खुद से पूछना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरा है। इसी दौरान उन्होंने आतंकवाद के वित्तीय संसाधनों को बंद करने पर भी जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने यूएन की वैश्विक भूमिका, वैश्वीकरण के साथ इसके विस्तार और टैरिफ अस्थिरता के चलते व्यापारिक अनिश्चितता पर चिंता जताई, और पारदर्शिता एवं स्थिरता की आवश्यकता को रेखांकित किया। आइए जानते हैं जयशंकर ने वैश्विक मंच से क्या-क्या कहा।
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वैश्वीकरण के साथ यूएन की भूमिका बढ़ी- जयशंकर

विदेश मंत्री जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी सदस्यता के विस्तार का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद से इतिहास द्वारा उन्मुक्त शक्तियों ने इस निकाय को आगे बढ़ाया है। जैसे-जैसे उपनिवेशवाद का अंत हुआ, दुनिया अपनी प्राकृतिक विविधता की ओर लौटने लगी। संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता चौगुनी हो गई और संगठन की भूमिका और कार्यक्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। वैश्वीकरण के युग में, इसका एजेंडा और भी विकसित हुआ। विकास लक्ष्य केंद्र में आ गए, जबकि जलवायु परिवर्तन एक साझा प्राथमिकता के रूप में उभरा। व्यापार को अधिक प्रमुखता मिली, जबकि खाद्य और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच को वैश्विक कल्याण के लिए आवश्यक माना गया।
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जयशंकर ने पाकिस्तान पर किया कड़ा प्रहार

यूएन महासभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में औद्योगिक स्तर पर आतंकवादी ठिकाने संचालित हो रहे हैं और आतंकियों को सार्वजनिक रूप से महिमामंडित किया जाता है। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के वित्तीय संसाधनों को पूरी तरह से बंद करना आवश्यक है। उनका यह बयान आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त नीति को स्पष्ट करता है।

टैरिफ अस्थिरता पर जताई चिंता

यूएन महासभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने टैरिफ अस्थिरता और बाजार तक अनिश्चित पहुंच को भारत के लिए गंभीर चुनौती बताया। उनका यह बयान अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ नीतियों के परिप्रेक्ष्य में आया। जयशंकर ने वैश्विक व्यापार में स्थिरता और न्यायसंगत नियमों के महत्व पर जोर दिया। उनका संदेश यह था कि व्यापारिक नीति में पारदर्शिता और पूर्वानुमेयता सुनिश्चित करनी होगी।

देश को 'भारत' कहकर किया संबोधित

जयशंकर ने अपने संबोधन की शुरुआत में अंग्रेजी में कहा, 'नमस्कार फ्रॉम द पीपल ऑफ भारत'। यानी वो भारत के लोगों की ओर से सभी को नमस्कार करत हैं। इसमें गौर करने वाली बात ये है कि अंग्रेजी में भी बोलते हुए जयशंकर ने वैश्विक मंच पर देश को भारत कहकर संबोधित किया।
 

भारत ने वैश्विक शांति, सुरक्षा और मानवीय सहायता में निभाई अहम भूमिका

इस दौरान विदेश मंत्री ने भारत की वैश्विक भूमिका और पड़ोसी देशों की सहायता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत ने हाल की भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय अफगानिस्तान और म्यांमार की जनता की मदद की। इसके साथ ही भारत ने उत्तरी अरब सागर में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने, समुद्री डकैती रोकने और शिपिंग पर हमलों को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जयशंकर ने भारत की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों की व्यापकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिक शांति बनाए रखते हैं, नौसेना जहाजों की सुरक्षा करती है, सुरक्षा बल आतंकवाद का मुकाबला करते हैं, डॉक्टर और शिक्षक वैश्विक मानव विकास में योगदान देते हैं, उद्योग किफायती उत्पाद तैयार करता है और तकनीकी विशेषज्ञ डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देते हैं। इसके साथ ही भारत के प्रशिक्षण संस्थान दुनिया के लिए खुले हैं।

उनका यह भाषण भारत की विदेश नीति की केंद्रीय प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है, जिसमें शांति, सुरक्षा, मानवीय सहायता और वैश्विक विकास को बढ़ावा देना शामिल है। जयशंकर ने वैश्विक नेताओं को याद दिलाया कि भारत केवल अपने क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देता है।
 

जयशंकर ने पाकिस्तान को वैश्विक आतंकवाद का केंद्र बताया

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 80वें संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में पाकिस्तान पर तीखा हमला करते हुए इसे वैश्विक आतंकवाद का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कारण दशकों से अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी हमलों की श्रृंखला जारी रही है और संयुक्त राष्ट्र की आतंकवादियों की सूची में इसके कई नागरिक शामिल हैं। जयशंकर ने इस वर्ष अप्रैल में पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों की हत्या को हालिया उदाहरण के रूप में पेश किया।

जयशंकर ने कहा कि भारत ने स्वतंत्रता के बाद से ही आतंकवाद से निपटना जारी रखा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है, क्योंकि यह घृणा, हिंसा, असहिष्णुता और भय का मिश्रण है। उन्होंने कहा कि जब कोई राष्ट्र आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में अपनाता है, आतंकवादी केंद्र औद्योगिक स्तर पर संचालित होते हैं और आतंकियों को सार्वजनिक रूप से महिमामंडित किया जाता है, तो ऐसे कार्यों की कड़ी निंदा होनी चाहिए।

विदेश मंत्री ने आतंकवाद के वित्तपोषण को पूरी तरह बंद करने, प्रमुख आतंकियों पर प्रतिबंध लगाने और पूरे आतंकवादी तंत्र पर लगातार दबाव बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश या संस्था आतंक को बढ़ावा देने वाले देशों का समर्थन करेंगे, उन्हें इसका नकारात्मक परिणाम भुगतना पड़ेगा। जयशंकर का यह भाषण भारत की आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति और वैश्विक सुरक्षा में सक्रिय भूमिका को स्पष्ट करता है।
 

रूस के विदश मंत्री लावरोव ने ईयू और नाटो को दी चेतावनी
80वें संयुक्त राष्ट्र महासभा के सामान्य बहस सत्र में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने नाटो और यूरोपीय संघ को चेतावनी दी कि अगर कोई आक्रामक कदम रूस पर उठाया गया तो रूस उसका निर्णायक जवाब देगा। लावरोव ने स्पष्ट किया कि रूस नाटो या यूरोपीय देशों पर हमला करने की योजना नहीं बना रहा है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति पुतिन ने इन सभी आरोपों को बार-बार खारिज किया है। लावरोव ने पश्चिमी देशों पर आरोप लगाया कि वे ईरान पर संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधों को पुनः लागू करने की कोशिश कर रहे हैं, जो 2015 के न्यूक्लियर डील के तहत पहले हटा दिए गए थे। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया। लावरोव के बयान ने वैश्विक कूटनीति में नए हलचल पैदा कर दी है।
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