India In UNGA: खतरों का दृढ़ता से सामना करने पर जोर, आतंकवाद का मुकाबला हमारी प्राथमिकता; यूएन में बोले जयशंकर
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर 80वें संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। महासभा में उन्होंने आतंकवाद से लेकर टैरिफ तक कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने यूएन महासभा में पाकिस्तान पर कड़ा प्रहार किया और कहा कि वहां आतंकवादी ठिकाने संचालित हो रहे हैं और आतंकियों को सार्वजनिक रूप से महिमामंडित किया जाता है।
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आगे उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि हमें खुद से पूछना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरा है। इसी दौरान उन्होंने आतंकवाद के वित्तीय संसाधनों को बंद करने पर भी जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने यूएन की वैश्विक भूमिका, वैश्वीकरण के साथ इसके विस्तार और टैरिफ अस्थिरता के चलते व्यापारिक अनिश्चितता पर चिंता जताई, और पारदर्शिता एवं स्थिरता की आवश्यकता को रेखांकित किया। आइए जानते हैं जयशंकर ने वैश्विक मंच से क्या-क्या कहा।
वैश्वीकरण के साथ यूएन की भूमिका बढ़ी- जयशंकर
जयशंकर ने पाकिस्तान पर किया कड़ा प्रहार
टैरिफ अस्थिरता पर जताई चिंता
देश को 'भारत' कहकर किया संबोधित
#WATCH | EAM Dr S Jaishankar begins his address at the 80th session of the United Nations General Assembly (UNGA)
— ANI (@ANI) September 27, 2025
"Namaskar from the people of Bharat. We are gathered here, eight decades since the founding of this unique body. The UN Charter calls on us not just to prevent war,… pic.twitter.com/uA4jX2Q7Rd
भारत ने वैश्विक शांति, सुरक्षा और मानवीय सहायता में निभाई अहम भूमिका
जयशंकर ने भारत की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों की व्यापकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिक शांति बनाए रखते हैं, नौसेना जहाजों की सुरक्षा करती है, सुरक्षा बल आतंकवाद का मुकाबला करते हैं, डॉक्टर और शिक्षक वैश्विक मानव विकास में योगदान देते हैं, उद्योग किफायती उत्पाद तैयार करता है और तकनीकी विशेषज्ञ डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देते हैं। इसके साथ ही भारत के प्रशिक्षण संस्थान दुनिया के लिए खुले हैं।
उनका यह भाषण भारत की विदेश नीति की केंद्रीय प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है, जिसमें शांति, सुरक्षा, मानवीय सहायता और वैश्विक विकास को बढ़ावा देना शामिल है। जयशंकर ने वैश्विक नेताओं को याद दिलाया कि भारत केवल अपने क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देता है।
#WATCH | At the 80th session of UNGA, EAM Dr S Jaishankar says, "...The people of Afghanistan and those of Myanmar saw India extend its hand during recent earthquakes. Our efforts at ensuring safe commerce, combating piracy and preventing attacks on shipping in the northern… pic.twitter.com/EoSeOfFlJw
— ANI (@ANI) September 27, 2025
जयशंकर ने पाकिस्तान को वैश्विक आतंकवाद का केंद्र बताया
जयशंकर ने कहा कि भारत ने स्वतंत्रता के बाद से ही आतंकवाद से निपटना जारी रखा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है, क्योंकि यह घृणा, हिंसा, असहिष्णुता और भय का मिश्रण है। उन्होंने कहा कि जब कोई राष्ट्र आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में अपनाता है, आतंकवादी केंद्र औद्योगिक स्तर पर संचालित होते हैं और आतंकियों को सार्वजनिक रूप से महिमामंडित किया जाता है, तो ऐसे कार्यों की कड़ी निंदा होनी चाहिए।
विदेश मंत्री ने आतंकवाद के वित्तपोषण को पूरी तरह बंद करने, प्रमुख आतंकियों पर प्रतिबंध लगाने और पूरे आतंकवादी तंत्र पर लगातार दबाव बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश या संस्था आतंक को बढ़ावा देने वाले देशों का समर्थन करेंगे, उन्हें इसका नकारात्मक परिणाम भुगतना पड़ेगा। जयशंकर का यह भाषण भारत की आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति और वैश्विक सुरक्षा में सक्रिय भूमिका को स्पष्ट करता है।
#WATCH | At the 80th session of UNGA, EAM Dr S Jaishankar says, "India has confronted this challenge since its independence, having a neighbour that is an epicentre of global terrorism. For decades now, major international terrorist attacks are traced back to that one country.… pic.twitter.com/WNV5pJDnFe
— ANI (@ANI) September 27, 2025
80वें संयुक्त राष्ट्र महासभा के सामान्य बहस सत्र में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने नाटो और यूरोपीय संघ को चेतावनी दी कि अगर कोई आक्रामक कदम रूस पर उठाया गया तो रूस उसका निर्णायक जवाब देगा। लावरोव ने स्पष्ट किया कि रूस नाटो या यूरोपीय देशों पर हमला करने की योजना नहीं बना रहा है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति पुतिन ने इन सभी आरोपों को बार-बार खारिज किया है। लावरोव ने पश्चिमी देशों पर आरोप लगाया कि वे ईरान पर संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधों को पुनः लागू करने की कोशिश कर रहे हैं, जो 2015 के न्यूक्लियर डील के तहत पहले हटा दिए गए थे। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया। लावरोव के बयान ने वैश्विक कूटनीति में नए हलचल पैदा कर दी है।