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Rules for bulk FDs are set to change from October 1; how will this impact investors?
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1अक्टूबर से बल्क FD के नियमों में बदलाव होने जा रहा है,निवेशकों पर क्या होगा असर?
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम
Published by: Bhaskar Tiwari
Updated Mon, 28 Sep 2026 03:30 AM IST
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1 अक्टूबर 2026 से कमर्शियल बैंकों में बड़ी रकम की फिक्स्ड डिपॉजिट यानी Bulk FD करने वाले ग्राहकों के लिए ब्याज दरों से जुड़े नियमों में बदलाव होने जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के नए नियमों का मुख्य उद्देश्य Bulk Deposit की ब्याज दरों को ज्यादा पारदर्शी बनाना और ग्राहकों के लिए दरों की तुलना करना आसान बनाना है। साथ ही यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि एक ही तरह के डिपॉजिट पर बैंक की अलग-अलग शाखाओं में अलग दरें लागू न हों।
नए नियम कमर्शियल बैंकों के अलावा स्मॉल फाइनेंस बैंक, रीजनल रूरल बैंक, लोकल एरिया बैंक, पेमेंट बैंक और अर्बन कोऑपरेटिव बैंक जैसे संस्थानों पर भी लागू होंगे। इसका सीधा महत्व उन ग्राहकों के लिए है जो FD में बड़ी रकम निवेश करते हैं, क्योंकि Bulk Deposit की ब्याज दरें आम रिटेल FD से अलग तरीके से तय और पेश की जा सकती हैं।
नए नियमों के तहत बैंकों को प्रत्येक कार्यदिवस सुबह 10 बजे तक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर लागू Bulk Deposit ब्याज दरें प्रकाशित करनी होंगी। इसके लिए 10 मिनट का ग्रेस पीरियड भी दिया गया है, यानी बैंक इन दरों को सुबह 10:10 बजे तक अपडेट कर सकेंगे। महत्वपूर्ण बात यह है कि पात्र Bulk Deposit पर ब्याज देते समय बैंक को अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित संबंधित दरों का पालन करना होगा।
इस बदलाव से बड़ी रकम निवेश करने वाले ग्राहकों को एक स्पष्ट रेफरेंस पॉइंट मिलेगा। उदाहरण के लिए, यदि कोई ग्राहक बड़ी राशि की FD कराने जा रहा है, तो वह बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध दर देखकर यह समझ सकेगा कि उस दिन संबंधित Bulk Deposit पर बैंक कितनी ब्याज दर लागू कर रहा है। इससे ब्याज दरों को लेकर जानकारी की अस्पष्टता कम होने की उम्मीद है और ग्राहक के लिए बैंक से बातचीत करते समय उपलब्ध दरों को समझना आसान होगा।
हालांकि, Bulk Deposit की परिभाषा सभी बैंक श्रेणियों के लिए एक जैसी नहीं है। अनुसूचित कमर्शियल बैंकों के मामले में आम तौर पर 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक का सिंगल-रुपया टर्म डिपॉजिट Bulk Deposit की श्रेणी में आता है। कुछ अन्य बैंकिंग श्रेणियों के लिए निर्धारित सीमा अलग हो सकती है।
इसलिए बड़ी रकम FD में लगाने वाले निवेशकों के लिए 1 अक्टूबर के बाद बैंक की वेबसाइट पर प्रकाशित दरों को देखना महत्वपूर्ण होगा। नए नियमों का असर मुख्य रूप से ब्याज दरों की पारदर्शिता, जानकारी की उपलब्धता और बड़ी FD बुक करने की प्रक्रिया पर दिखाई देगा।
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