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Published by: Bhaskar Tiwari
Updated Thu, 06 Aug 2026 03:45 AM IST
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झारखंड की राजधानी रांची में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के विरोध में पिछले 12 दिनों से आंदोलन कर रहे झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के अभ्यर्थी आखिरकार राज्य सरकार से बातचीत के लिए तैयार हो गए हैं। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे छात्रों ने स्पष्ट किया है कि सरकार के साथ होने वाली पूरी बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाए, ताकि बातचीत पूरी तरह पारदर्शी रहे और भविष्य में किसी भी तरह के विवाद या गलतफहमी की स्थिति उत्पन्न न हो। छात्रों का कहना है कि रिकॉर्डिंग से यह सुनिश्चित होगा कि बैठक में जो भी आश्वासन दिए जाएं, उनका स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध रहे। इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से प्रदर्शनकारी छात्रों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री आवास पर बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया था। शुरुआत में छात्रों ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री को छात्रों के बीच आकर उनकी समस्याएं सुननी चाहिए, क्योंकि यह आंदोलन हजारों युवाओं की भावनाओं और भविष्य से जुड़ा हुआ है।
हालांकि, बाद में छात्रों ने सरकार के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए दो घंटे का समय मांगा और आपसी चर्चा के बाद बातचीत के लिए सहमति दे दी। इसके बावजूद उन्होंने साफ कर दिया कि बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग उनकी सबसे महत्वपूर्ण शर्त रहेगी और बिना पारदर्शिता के किसी भी बातचीत का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। इस बीच नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ भी आंदोलनकारी छात्रों से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि उन्होंने छात्रों की समस्याओं और परेशानियों को गंभीरता से सुना है तथा उनकी सभी मांगों का विस्तृत ज्ञापन प्राप्त किया है। विनोद जाखड़ ने कहा कि वह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर छात्रों की शिकायतों और मांगों को सरकार के सामने मजबूती से रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में, विशेष रूप से झारखंड जैसे राज्यों में, भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं की घटनाएं युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। इसलिए पेपर लीक और भर्ती घोटालों पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून बनाए जाने की आवश्यकता है, ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सके और युवाओं का भर्ती प्रक्रिया पर विश्वास बहाल हो। अब सभी की निगाहें सरकार और छात्रों के बीच होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक पर टिकी हैं, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि लंबे समय से जारी आंदोलन का कोई सकारात्मक समाधान निकल सकता है और अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय लिया जा सकता है।
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