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17 girls level serious allegations against Baba Swami Chaitanyananda in Delhi
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दिल्ली में बाबा स्वामी चैतन्यानंद पर 17 लड़कियों ने लगाए गंभीर आरोप
क्या वेब सीरीज ‘आश्रम’ की कहानी अब हकीकत बन गई है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि देश की राजधानी दिल्ली में बिल्कुल वैसा ही मामला सामने आया है, जहां आस्था और शिक्षा के नाम पर एक आश्रम में छात्राओं के साथ घिनौना खेल खेला गया। आरोप है कि दक्षिण भारत के एक प्रमुख मठ से जुड़े स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ पार्थ सारथी ने आश्रम में पढ़ रही छात्राओं को न सिर्फ गंदे मैसेज भेजे बल्कि शारीरिक संपर्क बनाने की कोशिश भी की।
वसंतकुंज स्थित श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट-रिसर्च में मैनेजमेंट की पढ़ाई होती है। यहां दो बैच में 70 से ज्यादा छात्राएं पढ़ती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी स्वामी ने खासतौर पर ईडब्ल्यूएस स्कॉलरशिप पाने वाली छात्राओं को टारगेट किया। उन पर गंदे कमेंट किए, अश्लील व्हाट्सएप और एसएमएस संदेश भेजे। जब छात्राओं ने इसका विरोध किया तो उन पर फैकल्टी और कुछ वार्डन दबाव डालने लगे कि वे चुप रहें और ‘मांगें पूरी करें’।
छात्राओं ने साहस दिखाते हुए मामला दर्ज कराया। कुल 32 छात्रों के बयान अदालत में धारा 183 के तहत दर्ज हुए। इनमें से 17 छात्राओं ने साफ-साफ कहा कि आरोपी ने गंदी भाषा का इस्तेमाल किया और शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाला। यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा था और पीड़ित छात्राएं मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न झेल रही थीं।
मामले में पीए मुरली, प्रशासक, श्री शृंगेरी मठ ने अगस्त 2025 में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थान की कुछ फैकल्टी और वार्डन खुद आरोपी के दबाव में थीं और छात्राओं को उसकी मांगें पूरी करने पर मजबूर करती थीं। इससे छात्रों का माहौल खराब हुआ और शिक्षा का पवित्र स्थान डर और गंदगी का केंद्र बन गया।
शिकायत मिलने के बाद थाना वसंतकुंज नॉर्थ पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने संस्थान पर छापेमारी की और बेसमेंट से आरोपी की महंगी वोल्वो कार जब्त की। इस कार पर यूएन डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट (39 UN 1) लगी हुई थी। लेकिन जब पुलिस ने जांच की तो सामने आया कि यह नंबर पूरी तरह फर्जी था। यानी आरोपी खुद को अंतरराष्ट्रीय संपर्क वाला व्यक्ति दिखाकर छात्रों और स्टाफ पर रौब जमाता था।
दिल्ली पुलिस ने संस्थान से एनवीआर और हार्ड डिस्क भी जब्त की है, जिन्हें जांच के लिए फॉरेंसिक लैब (FSL) भेजा गया है। सीसीटीवी फुटेज से आरोपी की गतिविधियों और संस्थान के भीतर के हालात साफ हो सकते हैं।
एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही आरोपी फरार है। पुलिस की जांच में उसकी आखिरी लोकेशन आगरा में मिली है। दिल्ली पुलिस की कई टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही हैं। दक्षिण-पश्चिमी जिले की डीसीपी ऐश्वर्या सिंह ने मीडिया को बताया कि “हमें अगस्त में शिकायत मिली थी। समय रहते एफआईआर दर्ज की गई और अब आरोपी की तलाश जारी है। आरोपी की कार जब्त कर ली गई है और जालसाजी का अलग केस दर्ज हुआ है।”
आरोप सामने आते ही दक्षिण भारत के शृंगेरी शारदापीठ ने आरोपी से सभी संबंध तोड़ लिए। मठ ने बयान जारी कर कहा कि चैतन्यानंद सरस्वती का आचरण न केवल अनुचित बल्कि संस्था के हितों के खिलाफ था। इस कारण उसे सभी जिम्मेदारियों से हटा दिया गया है और संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गई है।
मठ ने यह भी आश्वासन दिया कि संस्थान से जुड़े छात्रों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष डॉ. कृष्णा वेंकटेश ने स्पष्ट कहा कि छात्रों की पढ़ाई और कार्यक्रम प्रभावित नहीं होंगे और उनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी संस्था की है।
यह मामला सिर्फ एक आश्रम तक सीमित नहीं है। यह उन सभी संस्थानों और आश्रमों पर सवाल खड़ा करता है जहां आस्था और शिक्षा का इस्तेमाल ढाल बनाकर अपराध किए जाते हैं। छात्राएं जो ज्ञान पाने और भविष्य बनाने के लिए आई थीं, उन्हें डर, गंदे संदेश और शोषण का सामना करना पड़ा।
दिल्ली का यह ‘आश्रम कांड’ अब पुलिस और अदालत की अगली कार्रवाई पर निर्भर है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही पीड़ित छात्राओं को न्याय मिलेगा। लेकिन यह घटना समाज के लिए भी चेतावनी है कि आस्था और शिक्षा के नाम पर चल रही संस्थाओं की निगरानी और पारदर्शिता कितनी जरूरी है।
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