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बंगाल: अभिषेक बनर्जी के सहयोगी सुमित रॉय को कोर्ट लेकर पहुंची सीआईडी, जमीन घोटाला केस में कल हुई थी गिरफ्तारी
Fri, 11 Sep 2026 01:16 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
पीटीआई, मेदिनीपुर
पीटीआई, मेदिनीपुर
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Fri, 11 Sep 2026 01:16 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल सीआईडी ने सरकारी जमीन की कथित अवैध बिक्री और जाली दस्तावेजों के मामले में टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी के सहयोगी सुमित रॉय को गिरफ्तार किया। सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच मेदिनीपुर कोर्ट में पेश किया गया।
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सुमित रॉय, अभिषेक बनर्जी के सहयोगी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पश्चिम बंगाल आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने शुक्रवार को टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी के सहयोगी सुमित रॉय को सरकारी जमीन की कथित अवैध बिक्री के मामले में पेश करने के लिए मेदिनीपुर कोर्ट में ले जाया गया। यह जानकारी अधिकारियों ने दी।
अधिकारियों ने क्या बताया?
रॉय को कोर्ट में पेश करने से पहले मेडिकल जांच के लिए कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम अस्पताल ले जाया गया था, जिसके बाद उन्हें पश्चिम मेदिनीपुर जिले की कोर्ट में लाया गया। उन्होंने बताया कि रॉय की पेशी से पहले कोलकाता से लगभग 130 किलोमीटर दूर कोर्ट परिसर और उसके आस-पास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। साथ ही, यह भी उम्मीद है कि सीआईडी इस मामले में आगे की पूछताछ के लिए रॉय की कस्टडी की मांग करेगी।
क्यों हुई यह गिरफ्तारी?
एजेंसी ने गुरुवार को रॉय को तब गिरफ्तार किया, जब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पश्चिम मेदिनीपुर जिले के सालबोनी में जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके सरकारी जमीन के कथित अवैध कन्वर्जन और बिक्री से जुड़े मामले में अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। रॉय को दक्षिण कोलकाता में 121 कालीघाट रोड स्थित तृणमूल कांग्रेस के ऑफिस-कम-रेसिडेंस से गिरफ्तार किया गया, जो पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बनर्जी से जुड़ा है।
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कोर्ट ने पहले क्या आदेश दिया था?
यह गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट की ओर से रॉय को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा को रद्द करने और उन्हें राहत देने से इनकार करने के बाद हुई। कोर्ट ने पहले उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था, जबकि राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि उन्होंने जांच में ठीक से सहयोग नहीं किया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला जाली दस्तावेजों के जरिए सालबोनी में सरकारी जमीन के कथित अवैध कन्वर्जन और बिक्री के आरोपों से जुड़ा है। इस मामले में पहले टीएमसी के पूर्व विधायक सुजॉय हाजरा को गिरफ्तार किया गया था। सूत्रों ने बताया कि हाजरा से पूछताछ के बाद जांचकर्ताओं ने रॉय से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन का पता लगाया। जांच के दौरान सीआईडी ने रॉय को कई बार समन भेजा था। एजेंसी ने जून में रॉय की तलाश के दौरान बनर्जी से जुड़े कालीघाट परिसर की तलाशी भी ली थी।
टीएमसी ने भाजपा पर क्या आरोप लगाया?
उनकी गिरफ्तारी से राजनीतिक टकराव शुरू हो गया। शुभेंदु अधिकारी और अन्य भाजपा नेताओं ने मामले में रॉय की कथित भूमिका को लेकर बनर्जी पर निशाना साधा। वहीं, टीएमसी ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए और सरकार पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाया।
अधिकारी ने राज्य विधानसभा में गिरफ्तारी की घोषणा करते हुए रॉय को वसूलीबाज बताया। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार और भाजपा विधायक सजल घोष ने भी आरोप लगाया था कि रॉय की गिरफ्तारी की आंच टीएमसी नेतृत्व तक पहुंच सकती है।
वहीं, टीएमसी ने भाजपा सरकार पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही कहा कि रॉय की गिरफ्तारी का समय इस तरह चुना गया ताकि बनर्जी को निशाना बनाया जा सके, जो सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से इलाज के लिए विदेश गई हुई थीं।
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अधिकारियों ने क्या बताया?
रॉय को कोर्ट में पेश करने से पहले मेडिकल जांच के लिए कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम अस्पताल ले जाया गया था, जिसके बाद उन्हें पश्चिम मेदिनीपुर जिले की कोर्ट में लाया गया। उन्होंने बताया कि रॉय की पेशी से पहले कोलकाता से लगभग 130 किलोमीटर दूर कोर्ट परिसर और उसके आस-पास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। साथ ही, यह भी उम्मीद है कि सीआईडी इस मामले में आगे की पूछताछ के लिए रॉय की कस्टडी की मांग करेगी।
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क्यों हुई यह गिरफ्तारी?
एजेंसी ने गुरुवार को रॉय को तब गिरफ्तार किया, जब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पश्चिम मेदिनीपुर जिले के सालबोनी में जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके सरकारी जमीन के कथित अवैध कन्वर्जन और बिक्री से जुड़े मामले में अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। रॉय को दक्षिण कोलकाता में 121 कालीघाट रोड स्थित तृणमूल कांग्रेस के ऑफिस-कम-रेसिडेंस से गिरफ्तार किया गया, जो पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बनर्जी से जुड़ा है।
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कोर्ट ने पहले क्या आदेश दिया था?
यह गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट की ओर से रॉय को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा को रद्द करने और उन्हें राहत देने से इनकार करने के बाद हुई। कोर्ट ने पहले उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था, जबकि राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि उन्होंने जांच में ठीक से सहयोग नहीं किया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला जाली दस्तावेजों के जरिए सालबोनी में सरकारी जमीन के कथित अवैध कन्वर्जन और बिक्री के आरोपों से जुड़ा है। इस मामले में पहले टीएमसी के पूर्व विधायक सुजॉय हाजरा को गिरफ्तार किया गया था। सूत्रों ने बताया कि हाजरा से पूछताछ के बाद जांचकर्ताओं ने रॉय से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन का पता लगाया। जांच के दौरान सीआईडी ने रॉय को कई बार समन भेजा था। एजेंसी ने जून में रॉय की तलाश के दौरान बनर्जी से जुड़े कालीघाट परिसर की तलाशी भी ली थी।
टीएमसी ने भाजपा पर क्या आरोप लगाया?
उनकी गिरफ्तारी से राजनीतिक टकराव शुरू हो गया। शुभेंदु अधिकारी और अन्य भाजपा नेताओं ने मामले में रॉय की कथित भूमिका को लेकर बनर्जी पर निशाना साधा। वहीं, टीएमसी ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए और सरकार पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाया।
अधिकारी ने राज्य विधानसभा में गिरफ्तारी की घोषणा करते हुए रॉय को वसूलीबाज बताया। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार और भाजपा विधायक सजल घोष ने भी आरोप लगाया था कि रॉय की गिरफ्तारी की आंच टीएमसी नेतृत्व तक पहुंच सकती है।
वहीं, टीएमसी ने भाजपा सरकार पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही कहा कि रॉय की गिरफ्तारी का समय इस तरह चुना गया ताकि बनर्जी को निशाना बनाया जा सके, जो सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से इलाज के लिए विदेश गई हुई थीं।