उत्तराखंडः चारधाम यात्रा में हो सकते हैं आपदा जैसे हालात
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चारधाम यात्रा शुरू होने से ठीक पहले मौसम के करवट बदलने से चारधाम यात्रा की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
चमोली जिले में तीन स्थानों पर मूसलाधार बरसात ने एक बार फिर आपदा से निपटने की तैयारी को नाकाफी साबित किया है। यह बरसात साफ बता रही है कि उत्तराखंड की मौसम की मारक क्षमता में इजाफा हुआ है। वहीं पूर्व चेतावनी का तंत्र पूरी तरह से विकसित नहीं होने के कारण प्रदेश में आपदा प्रबंधन अब भी राहत और बचाव के परंपरागत ढर्रे पर ही है।
आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक आठ मई को सुबह सात बजे कर्णप्रयाग में भारी बरसात के कारण करीब 30 मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। इसी तरह थराली में भारी बरसात के कारण कई वाहनों को मलबे के कारण नुकसान पहुंचा। इसी तरह चमोली में गैरसैंण के पास और अल्मोड़ा में भारी बरसात ने कहर बरपाया।
मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदला हुआ है
आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों के मुताबिक भारी बरसात की ये घटनाएं बेहद सीमित क्षेत्र में हुईं। जाहिर है कि प्रदेश में मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदला हुआ है।
यह तब है जबकि प्रदेश में कुछ दिन पहले ही जंगल बुरी तरह से आग की चपेट में थे। मई का महीना प्रदेश में बरसात न होने के लिए जाना जाता है।
इससे भी बड़ी चिंता का सबब यह है कि जून 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद से ही प्रदेश में करीब भूस्खलन के लिहाज से 400 से अधिक संवेदनशील जोन बन गए हैं। एक ही स्थान पर तेज बरसात इन क्षेत्रों के लिए कहर साबित हो सकती है।
ऐसे में चारधाम यात्रा भी इस बार 2012 की तर्ज पर बताई जा रही है। इसका मतलब यह है कि इस बार यात्रा में तीर्थ यात्रियों की खासी तादाद शामिल होगी। किसी पूर्व चेतावनी तंत्र के नहीं होने पर कोई भी आपदा प्रदेश में भयावह रूप भी ले सकती है।