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पानी का गिलास 50 रुपए में, टैक्सी 20 हजार में
कोटद्वार/विमल सिंह
Updated Sat, 22 Jun 2013 01:56 PM IST
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पुण्य कमाने देवभूमि में आए देशभर के तीर्थयात्रियों को आपदा ने तो कभी न भूलने वाला दर्द दिया ही।
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साथ ही यहां के कुछ लोगों ने देवभूमि की अतिथि देवो भव: की परंपरा के बिल्कुल विपरीत व्यवहार कर प्रभावितों को जमकर लूटा।
स्थिति यह रही कि कुछ पीड़ितों को पानी का एक गिलास पचास रुपये तक में खरीदना पड़ा। आपदा की इस घड़ी में जिनसे मदद की उम्मीद की जा रही थी उनके हाथों लूटे गए यात्रियों ने जब अपने कटु अनुभव बताए तो सुनने वाले भी शर्मसार हो गए।
बस एक ही शब्द मुंह से निकला कि देवभूमि को इस तरह तो बदनाम न करो। यात्रियों की शिकायत यह भी है कि मदद दिलाने का मोर्चा संभालने वाले प्रशासनिक अधिकारियों ने भी यात्रियों की आपबीती सुनने के बावजूद कुछ करने से पल्ला झाड़ लिया।
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श्रीनगर से रूट डायवर्ट होने के बाद यात्रियों के कोटद्वार पहुंचने का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को भी 40 से अधिक यात्री वाहन यहां से गुजरे। इस दौरान कुछ यात्री गोविंदनगर स्थित गुरुद्वारे में रुके तो उनका दर्द भी नुमायां हो गया।
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लुधियाना के जमालपुर निवासी हरप्रीत सिंह ने बताया कि चमोली में उन्हें पानी का एक गिलास 50 रुपये में नसीब हुआ।
मलबे की दीवारें लांघ कर किसी तरह जोशीमठ पहुंचे तो टैक्सी वाले ने ऋषिकेश पहुंचाने के 20,000 मांगे। इस बाबत एसडीएम से शिकायत की तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि हम कुछ नहीं कर सकते।
हरप्रीत ने बताया कि जोशीमठ से कर्णप्रयाग तक जिस मैक्स में आए उसके चालक ने सौ रुपये प्रति सवारी किराया बताया, लेकिन जोशीमठ पहुंचने पर उसने सबसे दो-दो सौ रुपये वसूले।
दुखी मन से उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने लंगर लगाकर मदद की तो कई यहां लूटने पर आमादा हैं।
लुधियाना के पृथपाल सिंह के अनुसार जोशीमठ के पास एक परिवार बारिश में भीगने से बचने के लिए एक होटल के छज्जे के गई तो किसी ने फोन नहीं उठाया।
अन्य कर्मचारियों ने फोन उठाया तो किसी के शादी में जाने की तो किसी के कुछ और काम में व्यस्त होने की बात कहकर टाल दिया।
..तो हम घर छोड़ने आते
कोटद्वार। बातचीत के दौरान रुआंसे हुए हरप्रीत ने कहा कि अगर ऐसा कोई हादसा उत्तराखंड के लोगों के साथ पंजाब में होता तो वहां ऐसा बर्ताव बिलकुल नहीं होता।
हरप्रीत ने कहा पंजाब के लोग पीड़ितों की न सिर्फ पूरी मदद करते बल्कि जरूरत पड़ने पर खुद घर छोड़ने भी आ जाते।