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युवाओं ने खोजा अवाना बुग्याल-खलियाणी टॉप ट्रैक
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कोरोना महामारी के बीच उपला टकनौर के युवाओं ने क्षेत्र के अनछुए व उपेक्षित पर्यटन स्थलों की खोज के लिए विशेष अभियान चलाया है। अभियान का उद्देश्य इन पर्यटन स्थलों को प्रचारित कर देश विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करना है। पहले चरण में दल ने अवाना बुग्याल-खलियाणी टॉप ट्रैक की खोज की है।
अनवीर रौतेला के मार्गदर्शन में झाला, जसपुर, पुराली, सुक्की, हर्षिल, धराली आदि गांवों के युवाओं ने विशेष अभियान शुरू किया है, जिसके पहले चरण में उन्होंने 14 किमी लंबे झाला-अवाना बुग्याल-खलियाणी टॉप ट्रैक की खोज की है। बीते 6 जुलाई को झाला गांव से ट्रैकिंग अभियान का शुभारंभ किया गया था, जिसमें होटल, ट्रैकिंग आदि पर्यटन व्यवसाय से जुड़े करीब 30 युवा शामिल हुए। दल के सदस्य झाला पयारा से रथक्वाड़ा, कांडेया धार आदि पड़ावों को पार करते हुए नौ किमी दूर समुद्र तल से 3233 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अवाना बुग्याल पहुंचे। रात्रि विश्राम करने के बाद अगले दिन दल करीब पांच किमी की ट्रैकिंग करते हुए 4562 मीटर की ऊंचाई पर स्थित खलियाणी टॉप पहुंचा, जहां सभी सदस्यों द्वारा चट्टानों व ग्लेशियरों से भरे इस स्थान की जैव विविधता तथा आसपास की चोटियों का ब्यौरा जुटाया गया और झाला लौट आया। दल में माधवेंद्र रावत, दीपक राणा, दुर्गेश पंवार, शैलेंद्र पंवार, नत्थी नेगी, राहुल रावत, दीपक राणा, सोनम रौतेला, यशवीर, गजेंद्र, प्रकाश, राजेश, भारत रौतेला, भगवान सिंह, मनोजेंद्र रावत, जगवीर राणा, धीरेंद्र आदि शामिल रहे।
दुर्लभ जड़ी-बूटियों की खान है ट्रैक पर
हर्षिल ईको पर्यटन समिति के अध्यक्ष माधवेंद्र रावत ने बताया कि अवाना बुग्याल-खलियाणी टॉप ट्रैक के दौरान दल को काला भालू, लाल लोमड़ी, भरल आदि वन्यजीवों के साथ ही ब्रह्मकमल, जंगली लहसुन, लादू आदि दुर्लभ जड़ीबूटियां दिखी। वहीं इस स्थान से बंदरपूंछ, काला नाग, लमखागा पास, क्यारकोटी आदि पर्वत श्रृंखलाओं के अलावा संपूर्ण उपला टकनौर क्षेत्र का विहंगम दृश्य देखने को मिलता है। अभियान पर एक डॉक्यूमेंट्री व दस्तावेज भी तैयार किए जा रहे हैं, जिसे सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचारित करने के साथ ही पर्यटन विभाग को भी सौंपा जाएगा।
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अनवीर रौतेला के मार्गदर्शन में झाला, जसपुर, पुराली, सुक्की, हर्षिल, धराली आदि गांवों के युवाओं ने विशेष अभियान शुरू किया है, जिसके पहले चरण में उन्होंने 14 किमी लंबे झाला-अवाना बुग्याल-खलियाणी टॉप ट्रैक की खोज की है। बीते 6 जुलाई को झाला गांव से ट्रैकिंग अभियान का शुभारंभ किया गया था, जिसमें होटल, ट्रैकिंग आदि पर्यटन व्यवसाय से जुड़े करीब 30 युवा शामिल हुए। दल के सदस्य झाला पयारा से रथक्वाड़ा, कांडेया धार आदि पड़ावों को पार करते हुए नौ किमी दूर समुद्र तल से 3233 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अवाना बुग्याल पहुंचे। रात्रि विश्राम करने के बाद अगले दिन दल करीब पांच किमी की ट्रैकिंग करते हुए 4562 मीटर की ऊंचाई पर स्थित खलियाणी टॉप पहुंचा, जहां सभी सदस्यों द्वारा चट्टानों व ग्लेशियरों से भरे इस स्थान की जैव विविधता तथा आसपास की चोटियों का ब्यौरा जुटाया गया और झाला लौट आया। दल में माधवेंद्र रावत, दीपक राणा, दुर्गेश पंवार, शैलेंद्र पंवार, नत्थी नेगी, राहुल रावत, दीपक राणा, सोनम रौतेला, यशवीर, गजेंद्र, प्रकाश, राजेश, भारत रौतेला, भगवान सिंह, मनोजेंद्र रावत, जगवीर राणा, धीरेंद्र आदि शामिल रहे।
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दुर्लभ जड़ी-बूटियों की खान है ट्रैक पर
हर्षिल ईको पर्यटन समिति के अध्यक्ष माधवेंद्र रावत ने बताया कि अवाना बुग्याल-खलियाणी टॉप ट्रैक के दौरान दल को काला भालू, लाल लोमड़ी, भरल आदि वन्यजीवों के साथ ही ब्रह्मकमल, जंगली लहसुन, लादू आदि दुर्लभ जड़ीबूटियां दिखी। वहीं इस स्थान से बंदरपूंछ, काला नाग, लमखागा पास, क्यारकोटी आदि पर्वत श्रृंखलाओं के अलावा संपूर्ण उपला टकनौर क्षेत्र का विहंगम दृश्य देखने को मिलता है। अभियान पर एक डॉक्यूमेंट्री व दस्तावेज भी तैयार किए जा रहे हैं, जिसे सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचारित करने के साथ ही पर्यटन विभाग को भी सौंपा जाएगा।
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