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अब पर्यटक निहार पाएंगे नेलांग की खूबसूरती

Wed, 13 May 2015 08:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी Updated Wed, 13 May 2015 08:26 AM IST
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बमंगलवार को वन मंत्री दिनेश अग्रवाल ने भैरोंघाटी से इको टूरिज्म सफारी गाड़ियों के जत्थे को नेलांग के लिए रवाना किया। साथ ही बीआरओ को सीमावर्ती सड़कें शीघ्र दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
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मंगलवार को वन मंत्री स्वयं भी घाटी की खूबसूरती देखने के लिए नेलांग गए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इसका शुभारंभ कर ऐतिहासिक कदम उठाया है।
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इससे जहां देश विदेश से आने वाले पर्यटकों को यहां की खूबसूरती देखने को मिलेगी, वहीं स्थानीय लोगों को स्वरोजगार भी मिलेगा।
सफारी में शामिल संसदीय सचिव गंगोत्री विधायक विजयपाल सजवाण ने कहा कि भारत-चीन सीमा से लगी इस घाटी में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं।

जल्द ही घाटी में पर्यटन की ढांचागत सुविधाएं विकसित कर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार की व्यवस्था की जाएगी। इस मौके पर मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक डीवीएस खाती, गंगोत्री नेशनल पार्क के डीएफओ श्रवण कुमार, विजय बहादुर सिंह, वीपी सिंह, रेंजर पीएस पंवार आदि मौजूद रहे।
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नेलांग घाटी में कुदरत ने बरसाई हैं नेमतें
भारत-चीन युद्ध के समय खाली कराए गए नेलांग और जाढ़ूंग गांव के अवशेष आज भी मौजूद हैं। इन गांवों का कुछ हिस्सा आईटीबीपी के प्रयोग में है।

कई भवनों के अवशेष पुरानी वास्तुकला तथा जीवन शैली का परिचय देते हैं। नेलांग घाटी से कालिंदी-बदरीनाथ ट्रैक के साथ ही हिमाचल तथा हरकीदून क्षेत्र में खुलने वाले कई उच्च हिमालयी ट्रैक का रास्ता भी है।

इनके अलावा ग्लेशियरों से निकलने वाली सदानीरा जाड़गंगा आदि छोटी नदियां, झरने, सरहद की सुरक्षा में जुटे आईटीबीपी एवं सेना के जवानों की कठोर जीवन शैली भी देखने को मिलती है।

सर्दियों में भीषण बर्फबारी के कई माह बाद तक भी हिमखंडों की मौजूदगी और बरसात सीजन में हिमालयी पठारों की हरियाली पर्यटकों को आकर्षित करेगी। गंगोत्री नेशनल पार्क में पड़ने वाली घाटी में हिम तेंदुआ, भूरा भालू, बारहसिंघा, भरल, गुलदार आदि दुर्लभ वन्य जीवों तथा हिमालयी पक्षियों का दीदार भी हो सकता है।


प्रशासन से लेना होगा इनर लाइन परमिट
मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक डीवीएस खाती ने बताया कि भारत-चीन सीमा से लगी होने के कारण नेलांग घाटी सामरिक दृष्टि से संवेदनशील भी है।

इस वजह से इसे प्रतिबंधित इनर लाइन में रखा गया है। घाटी में प्रवेश के लिए प्रशासन से इनर लाइन का परमिट लेना अनिवार्य होगा, जबकि शेष अनुमति वन विभाग के माध्यम से मिलेगी।


पर्यटक अपने वाहनों से घाटी में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। इसके लिए वन विभाग की ओर से लगाए गए वाहनों में ही आवाजाही की जा सकेगी। जल्द ही शुल्क तथा अन्य नियमों का निर्धारण किया जा रहा है।
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