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कृषि-बागवानी को बढ़ावा देने के लिए जमीनी स्तर पर हों काम
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जनपद के गंगा व यमुनाघाटी के काश्तकारों ने किसान सम्मान निधि योजना को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। एक ओर जहां कुछ काश्तकार योजना को उनके लिए फायदेमंद बता रहे हैं। वहीं कुछ ने योजना पर करोड़ों खर्च करने की जगह कृषि-बागवानी को बढ़ावा देने के लिए फसल सुरक्षा जैसे जमीनी स्तर के कार्य करने की मांग की। उनका कहना है कि फसल सुरक्षा होगी तो उनकी आय बढ़ेगी।
क्या कहते हैं काश्तकार
- किसान सम्मान निधि योजना लाभदायक है। इससे तहत काश्तकारों को कीटनाशक और खाद आदि खरीदने के लिए आर्थिक मदद मिलती है, लेकिन बेहतर होगा कि सेब की फसल को बचाने के लिए 8 फीट ऊंची जाली लगाई जाए, जिससे भालू और लंगूर फसल को नुकसान न पहुंचा सकें। - मोहन सिंह राणा, सुक्की गांव।
- हर्षिल घाटी में फल पट्टी को स्वीकृति मिलनी चाहिए। यहां काश्तकार लंबे समय से फलपट्टी विकसित करने की मांग कर रहे हैं। फलपट्टी विकसित होती है तो काश्तकारों को फसल सुरक्षा सहित कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी। - माधवेंद्र रावत, हर्षिल गांव।
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- किसान सम्मान निधि योजना पर करोड़ों खर्च करने की जगह कृषि व बागवानी को बढ़ावा देने के लिए जमीनी स्तर फसल सुरक्षा व सिंचाई के साधन बढ़ाने के काम होने चाहिए। स्योरी फलपट्टी में जंगली सूअर, लंगूर, भालू फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। इनसे फसलों को बचाने के लिए जालीदार घेरबाड़ की जानी चाहिए। - गजेंद्र नौटियाल, कोटियाल गांव।
- किसान सम्मान निधि योजना अपनी जगह सही है। इससे काश्तकारों को काफी लाभ मिल रहा है। फसल सुरक्षा के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए। भालू व लंगूर जैसे जंगली जानवर फसल के साथ पेड़ों को क्षति पहुंचाते हैं, जिससे काश्तकारों की आजीविका खतरे में है। - उमेश पंवार, धराली गांव।
उद्यान विभाग ने काश्तकारों को दिए 72 एनाइडर
हर्षिल घाटी से गत वर्ष सेब उत्पादन के सीजन में काश्तकार लंगूरों व भालुओं के फसलों को नुकसान पहुंचाने से खासे परेशान रहे, जिसके बाद काश्तकारों ने एनाइडर, कैनन गन आदि की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया। काश्तकारों के आंदोलन का असर ये हुआ कि हाल में यहां उद्यान विभाग ने काश्तकारों को 72 एनाइडर उपलब्ध कराए हैं, जो एक तरह की आवाज उत्पन्न करते हैं, जिससे भालू दूर रहते हैं। हालांकि काश्तकारों का कहना है कि जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए एनाइडर काफी नहीं है। उन्होंने कैनन गन भी उपलब्ध कराने की मांग की।
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क्या कहते हैं काश्तकार
- किसान सम्मान निधि योजना लाभदायक है। इससे तहत काश्तकारों को कीटनाशक और खाद आदि खरीदने के लिए आर्थिक मदद मिलती है, लेकिन बेहतर होगा कि सेब की फसल को बचाने के लिए 8 फीट ऊंची जाली लगाई जाए, जिससे भालू और लंगूर फसल को नुकसान न पहुंचा सकें। - मोहन सिंह राणा, सुक्की गांव।
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- हर्षिल घाटी में फल पट्टी को स्वीकृति मिलनी चाहिए। यहां काश्तकार लंबे समय से फलपट्टी विकसित करने की मांग कर रहे हैं। फलपट्टी विकसित होती है तो काश्तकारों को फसल सुरक्षा सहित कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी। - माधवेंद्र रावत, हर्षिल गांव।
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- किसान सम्मान निधि योजना पर करोड़ों खर्च करने की जगह कृषि व बागवानी को बढ़ावा देने के लिए जमीनी स्तर फसल सुरक्षा व सिंचाई के साधन बढ़ाने के काम होने चाहिए। स्योरी फलपट्टी में जंगली सूअर, लंगूर, भालू फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। इनसे फसलों को बचाने के लिए जालीदार घेरबाड़ की जानी चाहिए। - गजेंद्र नौटियाल, कोटियाल गांव।
- किसान सम्मान निधि योजना अपनी जगह सही है। इससे काश्तकारों को काफी लाभ मिल रहा है। फसल सुरक्षा के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए। भालू व लंगूर जैसे जंगली जानवर फसल के साथ पेड़ों को क्षति पहुंचाते हैं, जिससे काश्तकारों की आजीविका खतरे में है। - उमेश पंवार, धराली गांव।
उद्यान विभाग ने काश्तकारों को दिए 72 एनाइडर
हर्षिल घाटी से गत वर्ष सेब उत्पादन के सीजन में काश्तकार लंगूरों व भालुओं के फसलों को नुकसान पहुंचाने से खासे परेशान रहे, जिसके बाद काश्तकारों ने एनाइडर, कैनन गन आदि की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया। काश्तकारों के आंदोलन का असर ये हुआ कि हाल में यहां उद्यान विभाग ने काश्तकारों को 72 एनाइडर उपलब्ध कराए हैं, जो एक तरह की आवाज उत्पन्न करते हैं, जिससे भालू दूर रहते हैं। हालांकि काश्तकारों का कहना है कि जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए एनाइडर काफी नहीं है। उन्होंने कैनन गन भी उपलब्ध कराने की मांग की।