फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Uttarkashi News ›   Work should be done at the grassroot level to promote agro-horticulture

कृषि-बागवानी को बढ़ावा देने के लिए जमीनी स्तर पर हों काम

Sun, 09 Jan 2022 09:39 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 09 Jan 2022 09:39 PM IST
विज्ञापन
Work should be done at the grassroot level to promote agro-horticulture
जनपद के गंगा व यमुनाघाटी के काश्तकारों ने किसान सम्मान निधि योजना को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। एक ओर जहां कुछ काश्तकार योजना को उनके लिए फायदेमंद बता रहे हैं। वहीं कुछ ने योजना पर करोड़ों खर्च करने की जगह कृषि-बागवानी को बढ़ावा देने के लिए फसल सुरक्षा जैसे जमीनी स्तर के कार्य करने की मांग की। उनका कहना है कि फसल सुरक्षा होगी तो उनकी आय बढ़ेगी।
विज्ञापन

क्या कहते हैं काश्तकार
- किसान सम्मान निधि योजना लाभदायक है। इससे तहत काश्तकारों को कीटनाशक और खाद आदि खरीदने के लिए आर्थिक मदद मिलती है, लेकिन बेहतर होगा कि सेब की फसल को बचाने के लिए 8 फीट ऊंची जाली लगाई जाए, जिससे भालू और लंगूर फसल को नुकसान न पहुंचा सकें। - मोहन सिंह राणा, सुक्की गांव।
विज्ञापन

- हर्षिल घाटी में फल पट्टी को स्वीकृति मिलनी चाहिए। यहां काश्तकार लंबे समय से फलपट्टी विकसित करने की मांग कर रहे हैं। फलपट्टी विकसित होती है तो काश्तकारों को फसल सुरक्षा सहित कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी। - माधवेंद्र रावत, हर्षिल गांव।
विज्ञापन
विज्ञापन

- किसान सम्मान निधि योजना पर करोड़ों खर्च करने की जगह कृषि व बागवानी को बढ़ावा देने के लिए जमीनी स्तर फसल सुरक्षा व सिंचाई के साधन बढ़ाने के काम होने चाहिए। स्योरी फलपट्टी में जंगली सूअर, लंगूर, भालू फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। इनसे फसलों को बचाने के लिए जालीदार घेरबाड़ की जानी चाहिए। - गजेंद्र नौटियाल, कोटियाल गांव।
- किसान सम्मान निधि योजना अपनी जगह सही है। इससे काश्तकारों को काफी लाभ मिल रहा है। फसल सुरक्षा के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए। भालू व लंगूर जैसे जंगली जानवर फसल के साथ पेड़ों को क्षति पहुंचाते हैं, जिससे काश्तकारों की आजीविका खतरे में है। - उमेश पंवार, धराली गांव।

उद्यान विभाग ने काश्तकारों को दिए 72 एनाइडर
हर्षिल घाटी से गत वर्ष सेब उत्पादन के सीजन में काश्तकार लंगूरों व भालुओं के फसलों को नुकसान पहुंचाने से खासे परेशान रहे, जिसके बाद काश्तकारों ने एनाइडर, कैनन गन आदि की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया। काश्तकारों के आंदोलन का असर ये हुआ कि हाल में यहां उद्यान विभाग ने काश्तकारों को 72 एनाइडर उपलब्ध कराए हैं, जो एक तरह की आवाज उत्पन्न करते हैं, जिससे भालू दूर रहते हैं। हालांकि काश्तकारों का कहना है कि जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए एनाइडर काफी नहीं है। उन्होंने कैनन गन भी उपलब्ध कराने की मांग की।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed