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मंदिर से पहले मदिरा की दुकानों के दर्शन
ब्यूरो/अमर उजाला पौड़ी
Updated Wed, 03 Jun 2015 07:40 PM IST
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पतितपावनी गंगा-यमुना का मायका और देवी-देवताओं की धरती कहे जाने वाला उत्तरकाशी जनपद अपनी धार्मिक पहचान खोता जा रहा है। यहां गंगोत्री-यमुनोत्री धाम पहुंचने वाले देश-विदेश के तीर्थ यात्रियों को मंदिरों से पहले मदिरा की दुकानों के दर्शन हो रहे हैं। धरासू से लेकर गंगोत्री और यमुनोत्री तक यात्रा मार्ग से सटकर कई अंग्रेजी शराब की दुकान एवं बीयर बार खुल चुके हैं। यात्रा मार्ग के अधिकांश होटल मयखाने बनने से यात्रियों की अटूट आस्था को ठेस पहुंच रही है।
धार्मिक दृष्टि से अपनी अलग पहचान रखने वाले उत्तरकाशी जिले में हर साल मदिरा की दुकानों की संख्या बढ़ती जा रही है। बीते साल तक यहां अग्रेजी शराब की बारह दुकानें थीं। इस बार मार्च माह में जोशियाड़ा, आराकोट, डामटा, राजगढ़ी, नालूपाणी और जोगत में छह नई दुकानें खोली गई। तीन दिन पहले मातली में भी बीयर बार खोल दिया गया।
उत्तरकाशी, जोशियाड़ा, डुंडा, नालूपाणी, चिन्यालीसौड़, बड़कोट, नौगांव, भटवाड़ी और धौंतरी की शराब दुकानें यात्रा मार्ग से लगी हुई है, जिस कारण देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों की आस्था को ठेस पहुंच रही है। यात्रियों को मंदिरों से पहले शराब की दुकानों के दर्शन हो रहे हैं। यात्रा मार्ग पर नशे का प्रचलन बढ़ गया है। यहां के अधिकांश होटल मयखाने बन गए हैं। होटलों में मांस-अंडों के साथ शराब परोसे जाने से शाकाहारी भोजन मिलना असंभव हो गया है।
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असफल हो रहे ग्रामीणों के आंदोलन
उत्तरकाशी।
शराब की दुकानों का स्थानीय ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं। बावजूद शासन-प्रशासन झूठे आश्वासन देकर ग्रामीणों को शांत करा रहा है। जोशियाड़ा, जोगत तथा उत्तरकाशी की दुकान के विरोध में कई दिनों तक स्थानीय लोगों ने आंदोलन किया, लेकिन परिणाम सिफर रहे। जोशियाड़ा में विरोध के चलतेकुछ दिनों तक मोबाइल वैन से शराब बेची गई, लेकिन कुछ दिन बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत होने पर यहां एक किराया की दुकान में शराब बेची जा रही है।
मानकों को ताक पर रखकर खुल रहे ठेके
उत्तरकाशी।
जिले में शराब की दुकानें मानकों को ताक पर रखकर खोली जा रही है। मातली गांव की प्रधान चंद्रकला, संगीता नौटियाल, मनवीर रावत आदि का आरोप है कि बीयर बार ऐसे स्थान पर खोला गया है, जिसके समीप तीन शिक्षण संस्थाओं के साथ एक मंदिर भी है। इसके अलावा उत्तरकाशी, जोशियाड़ा, डुंडा, चिन्यालीसौड़ सहित अन्य शराब की दुकानों भी मुख्य बाजार में खोली गई है।
कोट.........
जिले में शराब की सभी दुकानें नियमानुसार खोली गई है। मातली में एक कंपनी की बीयर का आउट लेट खोला गया है। इसमें सिर्फ उसी कंपनी की बीयर ही बिक सकती है।
राजेंद्र लाल, जिला आबकारी अधिकारी उत्तरकाशी।
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धार्मिक दृष्टि से अपनी अलग पहचान रखने वाले उत्तरकाशी जिले में हर साल मदिरा की दुकानों की संख्या बढ़ती जा रही है। बीते साल तक यहां अग्रेजी शराब की बारह दुकानें थीं। इस बार मार्च माह में जोशियाड़ा, आराकोट, डामटा, राजगढ़ी, नालूपाणी और जोगत में छह नई दुकानें खोली गई। तीन दिन पहले मातली में भी बीयर बार खोल दिया गया।
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उत्तरकाशी, जोशियाड़ा, डुंडा, नालूपाणी, चिन्यालीसौड़, बड़कोट, नौगांव, भटवाड़ी और धौंतरी की शराब दुकानें यात्रा मार्ग से लगी हुई है, जिस कारण देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों की आस्था को ठेस पहुंच रही है। यात्रियों को मंदिरों से पहले शराब की दुकानों के दर्शन हो रहे हैं। यात्रा मार्ग पर नशे का प्रचलन बढ़ गया है। यहां के अधिकांश होटल मयखाने बन गए हैं। होटलों में मांस-अंडों के साथ शराब परोसे जाने से शाकाहारी भोजन मिलना असंभव हो गया है।
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असफल हो रहे ग्रामीणों के आंदोलन
उत्तरकाशी।
शराब की दुकानों का स्थानीय ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं। बावजूद शासन-प्रशासन झूठे आश्वासन देकर ग्रामीणों को शांत करा रहा है। जोशियाड़ा, जोगत तथा उत्तरकाशी की दुकान के विरोध में कई दिनों तक स्थानीय लोगों ने आंदोलन किया, लेकिन परिणाम सिफर रहे। जोशियाड़ा में विरोध के चलतेकुछ दिनों तक मोबाइल वैन से शराब बेची गई, लेकिन कुछ दिन बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत होने पर यहां एक किराया की दुकान में शराब बेची जा रही है।
मानकों को ताक पर रखकर खुल रहे ठेके
उत्तरकाशी।
जिले में शराब की दुकानें मानकों को ताक पर रखकर खोली जा रही है। मातली गांव की प्रधान चंद्रकला, संगीता नौटियाल, मनवीर रावत आदि का आरोप है कि बीयर बार ऐसे स्थान पर खोला गया है, जिसके समीप तीन शिक्षण संस्थाओं के साथ एक मंदिर भी है। इसके अलावा उत्तरकाशी, जोशियाड़ा, डुंडा, चिन्यालीसौड़ सहित अन्य शराब की दुकानों भी मुख्य बाजार में खोली गई है।
कोट.........
जिले में शराब की सभी दुकानें नियमानुसार खोली गई है। मातली में एक कंपनी की बीयर का आउट लेट खोला गया है। इसमें सिर्फ उसी कंपनी की बीयर ही बिक सकती है।
राजेंद्र लाल, जिला आबकारी अधिकारी उत्तरकाशी।