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घराट में अब मसाले पीस सकेंगे

Wed, 17 Mar 2021 10:10 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 17 Mar 2021 10:10 PM IST
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Will now be able to grind spices in gharat
उत्तरकाशी के नाकुरी में मसाले तैयार करने की यूनिट का रिबन काटकर शुभारंभ करते पर्यावरणविद् डा.अन? - फोटो : UTTER KASHI
नाकुरी के रिटेल ग्राम में आईआईटी रुड़की के सहयोग से पहली बार घराट का आधुनिकीकरण कर मसाले पीसने की चक्की तैयार की। बुधवार को पर्यावरणविद पद्म भूषण डा. अनिल जोशी व अतिरिक्त प्रमुख वन संरक्षक (एपीसीसीएफ) डा. कपिल जोशी ने यूनिट का शुभारंभ किया।
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श्री केदार जन विकास समिति डुंडा के अध्यक्ष अनिल डंगवाल ने रुड़की आईआईटी के तकनीकी सहयोग से घराट को नया रूप दिया है। चार किलो वाट क्षमता के घराट में मसाले पीसने, उनकी पैकेजिंग के लिए मशीनें लगाई गई है। पर्यावरणविद् डा. जोशी ने कहा कि यूनिट के जरिये आईआईटी रुड़की जैसे संस्थान के वैज्ञानिक, सामाजिक संस्थान और घर-गांव के लोगों ने मिलकर अपने ज्ञान को जमीं पर उतारा है। समिति के अध्यक्ष डंगवाल ने बताया कि वर्तमान समय में नाकुरी, अस्तल, डुंडा, वीरपुर व पाब के गांवों को यूनिट से जोड़ा गया है।
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वहीं, आईआईटी रुड़की के प्रबंधन विभाग ने रिटेल ग्राम में उत्तर-पश्चिम हिमालयी क्षेत्रों के औषधीय व सुगंधित पौधों पर आधारित नवाचारी कार्यशाला का भी आयोजन किया। कार्यशाला में डीएफओ दीपचंद आर्य, आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर डा. विनय शर्मा, डा. पार्थो रॉय, यूपीईएस के डा. नीरज महेंद्रू, डा. किरन कुमार, डा. गुंजन बोर्डे, रिटायर्ड आईएएस नारायण सिंह, डा. वंदना, डा. हिमानी, नागेंद्र, ओमप्रकाश, वरदेई रावत, शांति परमार, पद्म जोशी, संदीप उनियाल, द्वारिका सेमवाल आदि मौजूद रहे।
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पिरूल व लैंटाना से तैयारी टिकिया को जलाने से मरेंगे मच्छर
अतिरिक्त प्रमुख वन संरक्षक डा. कपिल जोशी ने बताया कि आईआईटी रुड़की, पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी और वन विभाग ने पिरूल व लैंटाना को मिलाकर छोटी-छोटी टिकिया बनाने की हस्तचालित मशीन तैयार की है। टिकिया को जलाने से इसके धुएं से जहां खुशबू फैलेगी, वहीं मच्छर भी मरेंगे। उन्होंने नाकुरी में इसकी भी एक यूनिट लगाने का भरोसा दिलाया। बताया कि 10 रुपये लागत से तैयार एक डब्बे की कीमत 100 रुपये तक है। दो हजार मशीनें लगाकर 4 हजार लोगों को रोजगार दिया जा सकता है।
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