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Uttarkashi News: जड़भरत घाट के कमरे में लगा ताला
Sun, 20 Sep 2026 05:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sun, 20 Sep 2026 05:28 PM IST
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लोगों को हो रही है दिक्कत, श्रद्धालु हो रहे हैं परेशान
उत्तरकाशी। जड़भरत घाट पर महिलाओं के वस्त्र बदलने और धार्मिक आयोजनों के लिए नगर पालिका की ओर से वर्षों पहले बनाए गए कमरे पर ताला लगा होने से ब्राह्मण समाज और स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई। स्थानीय लोगों का कहना है कि महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर सुविधा के लिए बनाया गया कमरा बंद होने से श्रद्धालुओं और कर्मकांड कराने वालों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
जड़भरत घाट पर पीपल का पेड़ होने के कारण बडागड्डी क्षेत्र समेत आसपास के विभिन्न गांवों से लोग पितृ पूजन के लिए पहुंचते हैं। यहां 11वीं और 13वीं के धार्मिक कर्मकांड भी किए जाते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि बारिश के दौरान कमरे के बंद रहने से महिलाओं को वस्त्र बदलने में दिक्कत होती है।
वहीं, पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक कार्य खुले में करने पड़ते हैं। पंडित रमेश भट्ट और सुरेश शास्त्री ने बताया कि कमरे को खोलने के लिए पूर्व में ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पंडित बुद्धि प्रकाश नौटियाल और पंडित दिवाकर प्रसाद नैथानी की ओर से नगर पालिका को पत्र दिया गया था लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई।
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उन्होंने कमरे को अतिक्रमण मुक्त कर सार्वजनिक उपयोग के लिए खोलने की मांग की। वहीं, उन्होंने घाट के सौंदर्यीकरण की भी मांग उठाई है। इधर, नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी शालिनी चित्राण ने कहा कि मामले की जानकारी लेकर कमरे की स्थिति की जांच कराई जाएगी। अनधिकृत कब्जा पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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उत्तरकाशी। जड़भरत घाट पर महिलाओं के वस्त्र बदलने और धार्मिक आयोजनों के लिए नगर पालिका की ओर से वर्षों पहले बनाए गए कमरे पर ताला लगा होने से ब्राह्मण समाज और स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई। स्थानीय लोगों का कहना है कि महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर सुविधा के लिए बनाया गया कमरा बंद होने से श्रद्धालुओं और कर्मकांड कराने वालों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
जड़भरत घाट पर पीपल का पेड़ होने के कारण बडागड्डी क्षेत्र समेत आसपास के विभिन्न गांवों से लोग पितृ पूजन के लिए पहुंचते हैं। यहां 11वीं और 13वीं के धार्मिक कर्मकांड भी किए जाते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि बारिश के दौरान कमरे के बंद रहने से महिलाओं को वस्त्र बदलने में दिक्कत होती है।
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वहीं, पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक कार्य खुले में करने पड़ते हैं। पंडित रमेश भट्ट और सुरेश शास्त्री ने बताया कि कमरे को खोलने के लिए पूर्व में ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पंडित बुद्धि प्रकाश नौटियाल और पंडित दिवाकर प्रसाद नैथानी की ओर से नगर पालिका को पत्र दिया गया था लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई।
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उन्होंने कमरे को अतिक्रमण मुक्त कर सार्वजनिक उपयोग के लिए खोलने की मांग की। वहीं, उन्होंने घाट के सौंदर्यीकरण की भी मांग उठाई है। इधर, नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी शालिनी चित्राण ने कहा कि मामले की जानकारी लेकर कमरे की स्थिति की जांच कराई जाएगी। अनधिकृत कब्जा पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।