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Uttarkashi News: भालुओं ने उजाड़े सेब के बाग, वर्षों की मेहनत पर फेरा पानी
Sun, 20 Sep 2026 05:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sun, 20 Sep 2026 05:25 PM IST
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गोविंद पशु विहार पार्क की रूपिन रेंज के मसरी, भीतरी और सट्टा क्षेत्र में भालु से लोग परेशान
पुरोला। गोविंद पशु विहार पार्क की रूपिन रेंज के मसरी, भीतरी और सट्टा क्षेत्र में भालु बागवानों के लिए मुसीबत बन गए हैं। सेब की फसल तैयार होने के बीच भालू लगातार बागों में घुसकर पेड़ उखाड़ रहे हैं और टहनियां तोड़ने के साथ फलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे बागवानों की वर्षों की मेहनत पर पानी फिर रहा है।
भीतरी गांव के काश्तकार जगदीश कुंवर ने बताया कि फते पर्वत के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इन दिनों सेब की फसल तैयार है लेकिन भालुओं के झुंड बागों में घुसकर पेड़ों और फलों को बरबाद कर रहे हैं। उनका कहना है कि हर साल सेब सीजन में यही समस्या सामने आती है लेकिन अब तक बागों की सुरक्षा के लिए स्थायी घेरबाड़ नहीं हो सकी है और नुकसान का उचित मुआवजा भी नहीं मिल रहा है।
जगदीश कुंवर, प्यासराम सिंह, ज्ञान सिंह चौहान और जयचंद चौहान समेत बागवानों ने बताया कि वे कई वर्षों से पार्क प्रशासन से संवेदनशील क्षेत्रों में घेरबाड़ कराने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए प्रस्ताव भी भेजे गए लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। बागवानों के अनुसार, भालुओं के साथ जंगली सूअर भी गेहूं और आलू की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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बागवानों ने वन्यजीवों से फसलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी इंतजाम, क्षति का उचित मुआवजा और संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी घेरबाड़ की मांग की है। गोविंद पशु विहार की उप निदेशक निधि सेमवाल ने बताया कि भालुओं से फसलों और सेब बागानों को होने वाले नुकसान पर मुआवजा देने के लिए नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में वन्यजीवों को दूर रखने के लिए हर वर्ष सोलर एवं वॉयस सिस्टम भी लगाए जाते हैं।
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पुरोला। गोविंद पशु विहार पार्क की रूपिन रेंज के मसरी, भीतरी और सट्टा क्षेत्र में भालु बागवानों के लिए मुसीबत बन गए हैं। सेब की फसल तैयार होने के बीच भालू लगातार बागों में घुसकर पेड़ उखाड़ रहे हैं और टहनियां तोड़ने के साथ फलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे बागवानों की वर्षों की मेहनत पर पानी फिर रहा है।
भीतरी गांव के काश्तकार जगदीश कुंवर ने बताया कि फते पर्वत के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इन दिनों सेब की फसल तैयार है लेकिन भालुओं के झुंड बागों में घुसकर पेड़ों और फलों को बरबाद कर रहे हैं। उनका कहना है कि हर साल सेब सीजन में यही समस्या सामने आती है लेकिन अब तक बागों की सुरक्षा के लिए स्थायी घेरबाड़ नहीं हो सकी है और नुकसान का उचित मुआवजा भी नहीं मिल रहा है।
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जगदीश कुंवर, प्यासराम सिंह, ज्ञान सिंह चौहान और जयचंद चौहान समेत बागवानों ने बताया कि वे कई वर्षों से पार्क प्रशासन से संवेदनशील क्षेत्रों में घेरबाड़ कराने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए प्रस्ताव भी भेजे गए लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। बागवानों के अनुसार, भालुओं के साथ जंगली सूअर भी गेहूं और आलू की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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बागवानों ने वन्यजीवों से फसलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी इंतजाम, क्षति का उचित मुआवजा और संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी घेरबाड़ की मांग की है। गोविंद पशु विहार की उप निदेशक निधि सेमवाल ने बताया कि भालुओं से फसलों और सेब बागानों को होने वाले नुकसान पर मुआवजा देने के लिए नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में वन्यजीवों को दूर रखने के लिए हर वर्ष सोलर एवं वॉयस सिस्टम भी लगाए जाते हैं।