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छत से झांक रही सरिया, बरामदे में हो रहा मरीजों का उपचार
उत्तरकाशी
Updated Fri, 27 Nov 2015 06:58 PM IST
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अटल आदर्श ग्राम साल्ड का आयुर्वेदिक अस्पताल भवन जर्जर हो चुका है। अस्पताल की छत क्षतिग्रस्त होने से सरिया बाहर की तरफ निकल रही है। डॉक्टर और फार्मासिस्ट भवन में घुसने में भी घबराते हैं। ऐसे में मरीजों का इलाज बरामदे में बैठकर किया जाता है। ग्रामीणों ने शीघ्र इस भवन को दुरुस्त कराने की मांग की है।
वरुणा घाटी क्षेत्र के 12 गांवों में चिकित्सा सेवाओं के लिए वर्ष 1987 में साल्ड गांव में आयुर्वेदिक अस्पताल खोला गया था। अस्पताल के मुख्य भवन के साथ ही यहां डॉक्टर, फार्मेसिस्ट आदि कर्मचारियों के लिए आवासीय भवन भी बनाए। देखरेख के अभाव में आज स्थिति यह है कि अस्पताल की छत जर्जर होकर गिरने को है। छत की सरिया बाहर झांक रही है। मरीज ही क्या डॉक्टर एवं फार्मेसिस्ट भी अंदर जाने में घबराते हैं। डॉक्टर बरामदे में बैठकर ही मरीजों का उपचार कर रहे हैं। अस्पताल के आवासीय भवन भी जर्जर हालत में है। कई सालों से अस्पताल का बिजली-पानी का कनेक्शन भी कटा हुआ है।
गांव के मंशाराम नौटियाल, जिला पंचायत सदस्य सरिता राणा आदि ने बताया कि क्षेत्र के एक दर्जन गांवों के मरीज चिकित्सा सेवाओं के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। भूकंप के लिहाज से संवेदनशील इस क्षेत्र में यदि समय रहते अस्पताल भवन को दुरुस्त नहीं कराया गया तो भूकंप आने पर भवन गिरने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने शीघ्र अस्पताल भवन को दुरुस्त कराने की मांग की है।
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अन्य सरकारी भवनों का भी यही हाल
अन्य सरकारी भवन भी बदहाल पड़े हैं। बंद पड़े पशु सेवा केंद्र व मातृ शिशु रक्षा केंद्र के भवनों में सालों से नेपाली परिवार कब्जा जमाए बैठे हैं। पटवारी चौकी, कृषि निवेश केंद्र, आंगनबाड़ी, साधन सहकारी समिति के मिनी बैंक पर अक्सर ताले ही लटके रहते हैं।
अस्पताल भवन बेहद जर्जर हालत में होने के कारण मरीजों को यहां भर्ती करने की स्थिति नहीं है। फिलहाल मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें जरूरी दवाएं और प्राथमिक उपचार देने की व्यवस्था ही है।
- डॉ. रतनमणी भट्ट, चिकित्साधिकारी-आयुर्वेदिक अस्पताल साल्ड।
मैंने दो बार अस्पताल का निरीक्षण किया है। स्थिति वास्तव में बड़ी खराब है। लोनिवि से भवन का निरीक्षण कर इसकी रिपोर्ट मांगी गई है। ताकि इसकी मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण कराया जा सके।
- डॉ. डीडी बधानी, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी।
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वरुणा घाटी क्षेत्र के 12 गांवों में चिकित्सा सेवाओं के लिए वर्ष 1987 में साल्ड गांव में आयुर्वेदिक अस्पताल खोला गया था। अस्पताल के मुख्य भवन के साथ ही यहां डॉक्टर, फार्मेसिस्ट आदि कर्मचारियों के लिए आवासीय भवन भी बनाए। देखरेख के अभाव में आज स्थिति यह है कि अस्पताल की छत जर्जर होकर गिरने को है। छत की सरिया बाहर झांक रही है। मरीज ही क्या डॉक्टर एवं फार्मेसिस्ट भी अंदर जाने में घबराते हैं। डॉक्टर बरामदे में बैठकर ही मरीजों का उपचार कर रहे हैं। अस्पताल के आवासीय भवन भी जर्जर हालत में है। कई सालों से अस्पताल का बिजली-पानी का कनेक्शन भी कटा हुआ है।
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गांव के मंशाराम नौटियाल, जिला पंचायत सदस्य सरिता राणा आदि ने बताया कि क्षेत्र के एक दर्जन गांवों के मरीज चिकित्सा सेवाओं के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। भूकंप के लिहाज से संवेदनशील इस क्षेत्र में यदि समय रहते अस्पताल भवन को दुरुस्त नहीं कराया गया तो भूकंप आने पर भवन गिरने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने शीघ्र अस्पताल भवन को दुरुस्त कराने की मांग की है।
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अन्य सरकारी भवनों का भी यही हाल
अन्य सरकारी भवन भी बदहाल पड़े हैं। बंद पड़े पशु सेवा केंद्र व मातृ शिशु रक्षा केंद्र के भवनों में सालों से नेपाली परिवार कब्जा जमाए बैठे हैं। पटवारी चौकी, कृषि निवेश केंद्र, आंगनबाड़ी, साधन सहकारी समिति के मिनी बैंक पर अक्सर ताले ही लटके रहते हैं।
अस्पताल भवन बेहद जर्जर हालत में होने के कारण मरीजों को यहां भर्ती करने की स्थिति नहीं है। फिलहाल मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें जरूरी दवाएं और प्राथमिक उपचार देने की व्यवस्था ही है।
- डॉ. रतनमणी भट्ट, चिकित्साधिकारी-आयुर्वेदिक अस्पताल साल्ड।
मैंने दो बार अस्पताल का निरीक्षण किया है। स्थिति वास्तव में बड़ी खराब है। लोनिवि से भवन का निरीक्षण कर इसकी रिपोर्ट मांगी गई है। ताकि इसकी मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण कराया जा सके।
- डॉ. डीडी बधानी, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी।