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‘सनातन धर्म विरोधी है देवस्थानम प्रबंधन एक्ट’
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ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने उत्तराखंड सरकार द्वारा बनाए गए देवस्थानम प्रबंधन एक्ट को सनातन धर्म विरोधी बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार को धर्मस्थलों की व्यवस्था में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने इसके खिलाफ तीर्थ पुरोहितों को सुप्रीम कोर्ट में विधिक सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया है।
द्वारका एवं ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को पीठ पर विराजमान हुए 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इस वर्ष स्वर्ण जयंती मनाई जा रही है। इस मौके पर चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के संयोजक गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष पं. सुरेश सेमवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने जबलपुर मध्यप्रदेश स्थित परमहंसी आश्रम पहुंचा। यहां उन्होंने शंकराचार्य को उत्तराखंड सरकार द्वारा बनाए गए देवस्थानम प्रबंधन एक्ट के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए तीर्थ पुरोहितों की आपत्ति के बारे में बताया।
तीर्थ पुरोहितों से वार्ता में शंकराचार्य ने देवस्थानम प्रबंधन एक्ट को सनातन धर्म के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि सरकार को धर्म स्थलों की व्यवस्थाओं में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। महापंचायत के प्रवक्ता डॉ. बृजेश सती ने बताया कि तीर्थ पुरोहितों ने शंकाराचार्य को मामला सुप्रीम कोर्ट में होने की जानकारी दी, तो उन्होंने विधिक सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। साथ ही देशभर के संतों को इसके खिलाफ एकजुट करने की बात कही। प्रतिनिधिमंडल में महापंचायत के उपाध्यक्ष उमेश सती, अनिरुद्ध उनियाल, राजेश सेमवाल, एसएन सेमवाल आदि तीर्थ पुरोहित शामिल थे।
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द्वारका एवं ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को पीठ पर विराजमान हुए 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इस वर्ष स्वर्ण जयंती मनाई जा रही है। इस मौके पर चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के संयोजक गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष पं. सुरेश सेमवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने जबलपुर मध्यप्रदेश स्थित परमहंसी आश्रम पहुंचा। यहां उन्होंने शंकराचार्य को उत्तराखंड सरकार द्वारा बनाए गए देवस्थानम प्रबंधन एक्ट के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए तीर्थ पुरोहितों की आपत्ति के बारे में बताया।
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तीर्थ पुरोहितों से वार्ता में शंकराचार्य ने देवस्थानम प्रबंधन एक्ट को सनातन धर्म के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि सरकार को धर्म स्थलों की व्यवस्थाओं में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। महापंचायत के प्रवक्ता डॉ. बृजेश सती ने बताया कि तीर्थ पुरोहितों ने शंकाराचार्य को मामला सुप्रीम कोर्ट में होने की जानकारी दी, तो उन्होंने विधिक सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। साथ ही देशभर के संतों को इसके खिलाफ एकजुट करने की बात कही। प्रतिनिधिमंडल में महापंचायत के उपाध्यक्ष उमेश सती, अनिरुद्ध उनियाल, राजेश सेमवाल, एसएन सेमवाल आदि तीर्थ पुरोहित शामिल थे।
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