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Uttarkashi News: गढ़वाली बोली में प्रकाशित पहली शोध पुस्तक का विमोचन
Sat, 17 Aug 2024 06:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sat, 17 Aug 2024 06:25 PM IST
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उत्तरकाशी। लोक साहित्यकार मदनमोहन डुकलान के साहित्य पर आधारित पहली शोध पुस्तक ‘मदनमोहन डुकलान कु काव्य वैशिष्टय अर दर्शन’ का लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने विमोचन किया। यह पुस्तक लेखिका आशा ममगांई ने गढ़वाली लिखी है। वहीं यह गढ़वाली बोली में पहली शोध प्रकाशित पुस्तक है।
कलेक्ट्रेट ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में शोध पुस्तक विमोचन के साथ ही काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि गढ़वाली में शोध होने से रचनाकारों में एक नए उत्साह और ऊर्जा का संचार होगा। साहित्यकार अपना काम कर रहे हैं। समाज का भी दायित्व है कि वह अपनी मातृभाषा गढ़वाली-कुमाऊंनी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की पहल करें।
पुस्तक की लेखिका आशा ने बताया कि मदनमोहन डुकलान ने पहाड़ की संस्कृति और गढ़वाली बोली के संवर्धन के लिए जो कार्य किया है, उस आधार पर उन्होंने अपने कॉलेज के समय में इस पर शोध किया था। शोध के बाद डुकलान की कविताओं सहित गीतों और उनकी फिल्मों के भावार्थ को पुस्तक में लिखा गया है।
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वरिष्ठ कवियत्री बीना बेंजवाल ने कहा कि समालोचना का क्षेत्र एक नवोन्मेषी प्रयास है। ऐसे प्रयासों से लोगों को अपनी मातृभाषा में काम करने की प्रेरणा मिलेगी। इस मौके पर राघवेंद्र उनियाल, साधना जोशी जगूड़ी, जयप्रकाश राणा, विमल ममगाई, अजय नौटियाल, राजेश जोशी आदि मौजूद रहे।
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कलेक्ट्रेट ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में शोध पुस्तक विमोचन के साथ ही काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि गढ़वाली में शोध होने से रचनाकारों में एक नए उत्साह और ऊर्जा का संचार होगा। साहित्यकार अपना काम कर रहे हैं। समाज का भी दायित्व है कि वह अपनी मातृभाषा गढ़वाली-कुमाऊंनी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की पहल करें।
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पुस्तक की लेखिका आशा ने बताया कि मदनमोहन डुकलान ने पहाड़ की संस्कृति और गढ़वाली बोली के संवर्धन के लिए जो कार्य किया है, उस आधार पर उन्होंने अपने कॉलेज के समय में इस पर शोध किया था। शोध के बाद डुकलान की कविताओं सहित गीतों और उनकी फिल्मों के भावार्थ को पुस्तक में लिखा गया है।
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वरिष्ठ कवियत्री बीना बेंजवाल ने कहा कि समालोचना का क्षेत्र एक नवोन्मेषी प्रयास है। ऐसे प्रयासों से लोगों को अपनी मातृभाषा में काम करने की प्रेरणा मिलेगी। इस मौके पर राघवेंद्र उनियाल, साधना जोशी जगूड़ी, जयप्रकाश राणा, विमल ममगाई, अजय नौटियाल, राजेश जोशी आदि मौजूद रहे।