फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Uttarkashi News ›   psycho problem from asi ganga

चैन से सोने नहीं देती असी गंगा की आवाज

Sun, 28 Feb 2016 10:21 PM IST
उत्तरकाशी
उत्तरकाशी Updated Sun, 28 Feb 2016 10:21 PM IST
विज्ञापन
आपदा प्रभावित अन्य नुकसान के अलावा आपदा के आघात से उत्पन्न मानसिक समस्याओं से भी जूझ रहे हैं। बादलों की गरज के साथ तेज बारिश या फिर मशीनों की तेज गड़गड़ाहट आज भी प्रभावितों में सिहरन पैदा कर देती है। सरकारी तंत्र ने भले ही इस ओर ध्यान नहीं दिया, लेकिन मनोविज्ञान के जानकार प्रभावितों को इस आघात से उबारने के लिए ठोस उपाय की आवश्यकता जता रहे हैं।
विज्ञापन


सीमांत जनपद उत्तरकाशी दशकों से प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है। वर्ष 1978 में भागीरथी की बाढ़, 1991 का विनाशकारी भूकंप, 2003 में वरुणावत भूस्खलन और अब वर्ष 2012 एवं 2013 में दो साल लगातार प्रलयंकारी बाढ़ की विभीषिका ने जानमाल के नुकसान के साथ ही जनपदवासियों को गहरा मानसिक आघात भी पहुंचाया। अगस्त 2012 में असी गंगा की बाढ़ में खेती, घर गवां कर जल विद्युत निगम की गंगोरी कालोनी में शरणार्थियों का जीवन जी रहे केशर सिंह पंवार अभी तक आपदा के आघात से नहीं उबर पाए हैं। पास में बहती असी गंगा की आवाज उन्हें और उनके परिवारों को चैन से सोने नहीं देती। बादलों की गरज और तेज बारिश आज भी सिहरन पैदा कर देती है। नौगांव प्रखंड के कोटियालगांव निवासी देवेंद्र दत्त के मन से वर्ष 1991 के भूकंप का खौफ अभी तक नहीं गया है। इनके अलावा भी कई अन्य आपदा प्रभावित परिवार आपदा के आघात से उपजी मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं।
विज्ञापन


आपदा के आघात से होती है साईको समस्या
उत्तरकाशी। बीते माह उत्तरकाशी में आपदा पर तीन दिवसीय कार्यशाला करा चुके उत्तराखंड प्रशासनिक अकादमी के संयुक्त निदेशक बलवंत सिंह ने बताया कि आपदा के बाद हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट में भर्ती केदारघाटी के मरीजों में से सत्तर फीसदी साईको समस्या से ग्रस्त पाए गए। विशेषकर आपदा प्रभावित बच्चों को यदि समय पर मानसिक आघात से नहीं उबारा गया तो वे जीवनभर इस समस्या से छुटकारा नहीं पा सकते।
विज्ञापन
विज्ञापन


योग पद्धति से उपचार संभव
उत्तरकाशी। जापान योग निकेतन के मुखिया किनौरा तथा भारत में उनके सहयोगी अनिल कुमार एवं रीता कुमार जून-जुलाई माह में उत्तरकाशी के आपदा प्रभावित क्षेत्र में कैंप लगाने के इच्छुक हैं। वे बताते हैं कि मानसिक आघात से उबारने के लिए शोध कर विशेष योग पद्धति विकसित की गई है। उन्होंने नवंबर 2015 के भूकंप से बुरी तरह प्रभावित हुए नेपाल में भी कैंप लगाकर भूकंप पीड़ितों की आपदा के आघात से उबरने में मदद की।


कोट.........
जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में डाक्टर एवं सहयोगी स्टाफ तथा चिकित्सा उपकरणों की डिमांड की गई है। विशेषज्ञ स्टाफ एवं साजो सामान उपलब्ध होने पर ही इस तरह के मरीजों को जांच परीक्षण एवं सलाह की सुविधा उपलब्ध करायी जा सकती है।
डा.जीएस रावत, सीएमओ उत्तरकाशी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed