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अब जांच व उपचार के साथ योग और पंचकर्म भी होगा
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आयुर्वेदिक चिकित्सा विभाग ने जिले के सात आयुर्वेदिक चिकित्सालयों को हेल्थ वेलनैस सेंटर के तौर पर विकसित करने की कवायद तेज कर दी है। इन सेंटरों पर पैथोलॉजी लैब स्थापित कर विभिन्न रोगों की जांच व उपचार के साथ ही योग एवं पंचकर्म के माध्यम से शरीर को निरोगी बनाने की व्यवस्था की जाएगी। वेलनैस सेंटरों की मदद से क्षेत्र में आयुर्वेद चिकित्सा को बढ़ावा मिलने के साथ ही भविष्य में केरल की तर्ज पर हेल्थ टूरिज्म की राह खुलने की उम्मीद है।
कोविड-19 महामारी ने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के महत्व और इसमें आयुर्वेद की भूमिका की ओर लोगों का ध्यान खींचा है। बीमारी के उपचार के साथ ही शरीर को स्वस्थ बनाए रखना भी जरूरी है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार की योजना के तहत उत्तराखंड के 200 आयुर्वेदिक चिकित्सालयों को हेल्थ वेलनैस सेंटर के तौर पर विकसित किया जा रहा है। प्रथम चरण में राज्य के 70 अस्पताल को इसके लिए चुना गया है, जिसमें उत्तरकाशी के सात अस्पताल शामिल हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सालय बौन, सौरा, साल्ड, भराणगांव, जिब्या दशगी, श्रीकोट एवं कुवां को हेल्थ वेलनैस सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रथम चरण में इन अस्पतालों में तैनात चिकित्सकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 31 मार्च तक इन वेलनैस सेंटरों को चालू किया जाना है।
योजना के अनुसार इन अस्पतालों में पैथोलॉजी लैब स्थापित कर विभिन्न रोगों की जांच की व्यवस्था की जाएगी। ताकि बीमारी का पता कर उपचार किया जा सके। इसके साथ ही यहां ग्रामीण शरीर को निरोगी रखने के लिए योग प्रशिक्षण एवं पंचकर्म के तहत नस्य, स्वेदन, शिरोधारा, अभ्यंग, वस्ति आदि क्रियाओं का लाभ ले सकेंगे। इन सेंटरों पर हर्बल गार्डन तैयार कर गांवों में औषधीय पादपों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
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जिले में सात आयुर्वेदिक अस्पतालों को हेल्थ वेलनैस सेंटर के तौर पर विकसित किया जा रहा है। प्रत्येक सेंटर के लिए प्रथम चरण में पांच लाख रुपये बजट स्वीकृत हुआ है। इन केंद्रों पर चिकित्सकों के साथ दो-दो योग प्रशिक्षक तैनात किए जाएंगे। 31 मार्च तक इन सेंटरों को चालू करने का लक्ष्य है।
- डा. कुसुमलता उनियाल, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी उत्तरकाशी।
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कोविड-19 महामारी ने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के महत्व और इसमें आयुर्वेद की भूमिका की ओर लोगों का ध्यान खींचा है। बीमारी के उपचार के साथ ही शरीर को स्वस्थ बनाए रखना भी जरूरी है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार की योजना के तहत उत्तराखंड के 200 आयुर्वेदिक चिकित्सालयों को हेल्थ वेलनैस सेंटर के तौर पर विकसित किया जा रहा है। प्रथम चरण में राज्य के 70 अस्पताल को इसके लिए चुना गया है, जिसमें उत्तरकाशी के सात अस्पताल शामिल हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सालय बौन, सौरा, साल्ड, भराणगांव, जिब्या दशगी, श्रीकोट एवं कुवां को हेल्थ वेलनैस सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रथम चरण में इन अस्पतालों में तैनात चिकित्सकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 31 मार्च तक इन वेलनैस सेंटरों को चालू किया जाना है।
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योजना के अनुसार इन अस्पतालों में पैथोलॉजी लैब स्थापित कर विभिन्न रोगों की जांच की व्यवस्था की जाएगी। ताकि बीमारी का पता कर उपचार किया जा सके। इसके साथ ही यहां ग्रामीण शरीर को निरोगी रखने के लिए योग प्रशिक्षण एवं पंचकर्म के तहत नस्य, स्वेदन, शिरोधारा, अभ्यंग, वस्ति आदि क्रियाओं का लाभ ले सकेंगे। इन सेंटरों पर हर्बल गार्डन तैयार कर गांवों में औषधीय पादपों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
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जिले में सात आयुर्वेदिक अस्पतालों को हेल्थ वेलनैस सेंटर के तौर पर विकसित किया जा रहा है। प्रत्येक सेंटर के लिए प्रथम चरण में पांच लाख रुपये बजट स्वीकृत हुआ है। इन केंद्रों पर चिकित्सकों के साथ दो-दो योग प्रशिक्षक तैनात किए जाएंगे। 31 मार्च तक इन सेंटरों को चालू करने का लक्ष्य है।
- डा. कुसुमलता उनियाल, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी उत्तरकाशी।