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Uttarkashi News: अस्सी गंगा संगम पर नहीं बने स्नान और मोक्ष घाट
Sun, 18 Jan 2026 06:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sun, 18 Jan 2026 06:03 PM IST
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जान जोखिम में डालकर स्नान कर रहे हैं श्रद्धालु
अस्सी गंगा त्रिवेणी संगम पर स्नान व मोक्ष घाट के पुनर्निर्माण की मांग उठाई
उत्तरकाशी। गंगोरी में अस्सी गंगा त्रिवेणी संगम पर आपदा से क्षतिग्रस्त मुख्य स्नान घाट और मोक्ष घाटों का पुननिर्माण नहीं हो पाया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस संबंध में डीएम को ज्ञापन सौंपकर जल्द घाटों के पुनर्निर्माण की मांग उठाई है।
त्रिवेणी संगम समिति गंगोरी से जुड़े पदाधिकारियों ने शनिवार को गंगोरी त्रिवेणी घाट पर मुख्य स्नान घाट और मोक्ष घाट का निर्माण सहित अन्य सौंदर्यीकरण के कार्यों की मांग को लेकर डीएम को ज्ञापन दिया। सामाजिक कार्यकर्ता ब्रह्मानंद नौटियाल ने बताया कि वर्ष 2012-13 की आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त गंगोरी त्रिवेणी घाट संगम पर देवी-देवताओं के लिए मुख्य स्नान घाट और दूसरी तरफ मोक्ष घाट का निर्माण नहीं हो पाया है। लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर गंगा स्नान करना पड़ रहा है।
घाट पर वर्ष में हर माह लोग धार्मिक अनुष्ठान के लिए कलश यात्रा सहित देव डोलियों के साथ गंगा स्नान के लिए आते हैं। इसी घाट पर सात ग्राम सभा केलशू घाटी व उत्तरों, गंगोरी, पाटा, संग्राली और बगियाल गांव के लोग शवों का दाह संस्कार करने आते हैं। कई बार घाट पर बड़े-बड़े बोल्डरों एवं पत्थरों के बीच दुर्घटना का खतरा बना रहता है। ज्ञापन देने वालों में जयवीर सिंह चौहान, चंद्रमोहन सिंह चौहान, देवेंद्र रावत, जयेंद्र सिंह, जसपाल सिंह, दयाल सिंह, सत्यनारायण सिंह, शिव सिंह भंडारी आदि भी शामिल रहे। संवाद
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अस्सी गंगा त्रिवेणी संगम पर स्नान व मोक्ष घाट के पुनर्निर्माण की मांग उठाई
उत्तरकाशी। गंगोरी में अस्सी गंगा त्रिवेणी संगम पर आपदा से क्षतिग्रस्त मुख्य स्नान घाट और मोक्ष घाटों का पुननिर्माण नहीं हो पाया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस संबंध में डीएम को ज्ञापन सौंपकर जल्द घाटों के पुनर्निर्माण की मांग उठाई है।
त्रिवेणी संगम समिति गंगोरी से जुड़े पदाधिकारियों ने शनिवार को गंगोरी त्रिवेणी घाट पर मुख्य स्नान घाट और मोक्ष घाट का निर्माण सहित अन्य सौंदर्यीकरण के कार्यों की मांग को लेकर डीएम को ज्ञापन दिया। सामाजिक कार्यकर्ता ब्रह्मानंद नौटियाल ने बताया कि वर्ष 2012-13 की आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त गंगोरी त्रिवेणी घाट संगम पर देवी-देवताओं के लिए मुख्य स्नान घाट और दूसरी तरफ मोक्ष घाट का निर्माण नहीं हो पाया है। लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर गंगा स्नान करना पड़ रहा है।
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घाट पर वर्ष में हर माह लोग धार्मिक अनुष्ठान के लिए कलश यात्रा सहित देव डोलियों के साथ गंगा स्नान के लिए आते हैं। इसी घाट पर सात ग्राम सभा केलशू घाटी व उत्तरों, गंगोरी, पाटा, संग्राली और बगियाल गांव के लोग शवों का दाह संस्कार करने आते हैं। कई बार घाट पर बड़े-बड़े बोल्डरों एवं पत्थरों के बीच दुर्घटना का खतरा बना रहता है। ज्ञापन देने वालों में जयवीर सिंह चौहान, चंद्रमोहन सिंह चौहान, देवेंद्र रावत, जयेंद्र सिंह, जसपाल सिंह, दयाल सिंह, सत्यनारायण सिंह, शिव सिंह भंडारी आदि भी शामिल रहे। संवाद
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