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Uttarkashi News: मुंबई के ट्रैकर्स ट्रैकिंग के साथ दूरस्थ क्षेत्रों में कर रहे बच्चों की मदद
Thu, 03 Oct 2024 06:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Thu, 03 Oct 2024 06:08 PM IST
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उत्तरकाशी। मुंबई के तीन ट्रैकर्स अपने ट्रैकिंग के शौक के साथ दूरस्थ क्षेत्रों में स्कूली बच्चों की मदद कर रहे हैं। वे सड़क से पांच से 15 किमी की दूरी पर स्थित गांवों में पहुंचते हैं। उसके बाद वहां पर बच्चों को स्टेशनरी सहित सामान्य ज्ञान, अंग्रेजी भाषा की कहानियों की किताबें आदि वितरित कर उन्हें अपने अनुभवों से रूबरू करवाते हैं।
ट्रैकर्स सुंदर नरसिम्हन ने बताया कि वे दो साथियों चंद्रशेखर अमीन और संजय सावंत के साथ मोरी विकासखंड के कलाप पहुंचे। सड़क से करीब आठ किमी की दूरी पर गांव में वे तीन घंटे की पैदल चढ़ाई कर पहुंचे। जहां पर स्टेशनरी सहित पुस्तकें वितरित की। वहीं, उनके साथ समय व्यतीत कर अपने अनुभवों को उनसे साझा किया।
गांव में रहकर वहां की परंपराओं सहित विषम भौगोलिक परिस्थिति में जीवन यापन करने की शैली की जानकारी ली। इसके साथ ही वहां से लौटने के बाद मोरी के सिरगा, पुरोला विकासखंड के भी दूरस्थ गांवों डेरिका, उदकोटी, कंडियाल गांव और तुनालका में बच्चों को स्टेशनरी वितरित की।
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सुंदर नरसिम्हन ने बताया कि उनके रिटायर हो चुके दोस्तों का एक समूह है, जो कि समय-समय पर ऐसे ट्रैक कर सरकारी विद्यालयों के बच्चों की मदद के लिए जाते हैं। इससे पूर्व जुलाई में करगिल के एलओसी पर बसे गांव में इसी प्रकार की मदद के लिए पहुंचे थे। इसके लिए करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर गांव पहुंचने के लिए दो घंटे पैदल चलना पड़ा था।
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ट्रैकर्स सुंदर नरसिम्हन ने बताया कि वे दो साथियों चंद्रशेखर अमीन और संजय सावंत के साथ मोरी विकासखंड के कलाप पहुंचे। सड़क से करीब आठ किमी की दूरी पर गांव में वे तीन घंटे की पैदल चढ़ाई कर पहुंचे। जहां पर स्टेशनरी सहित पुस्तकें वितरित की। वहीं, उनके साथ समय व्यतीत कर अपने अनुभवों को उनसे साझा किया।
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गांव में रहकर वहां की परंपराओं सहित विषम भौगोलिक परिस्थिति में जीवन यापन करने की शैली की जानकारी ली। इसके साथ ही वहां से लौटने के बाद मोरी के सिरगा, पुरोला विकासखंड के भी दूरस्थ गांवों डेरिका, उदकोटी, कंडियाल गांव और तुनालका में बच्चों को स्टेशनरी वितरित की।
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सुंदर नरसिम्हन ने बताया कि उनके रिटायर हो चुके दोस्तों का एक समूह है, जो कि समय-समय पर ऐसे ट्रैक कर सरकारी विद्यालयों के बच्चों की मदद के लिए जाते हैं। इससे पूर्व जुलाई में करगिल के एलओसी पर बसे गांव में इसी प्रकार की मदद के लिए पहुंचे थे। इसके लिए करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर गांव पहुंचने के लिए दो घंटे पैदल चलना पड़ा था।