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Uttarkashi News: महीनों से बंद जन औषधि केंद्र, ताले में कैद सस्ती दवाओं का सपना
Mon, 07 Sep 2026 05:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Mon, 07 Sep 2026 05:25 PM IST
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गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों को बाजार से खरीदनी पड़ रही है दवा
बड़कोट। गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों को बाजार से कम कीमत पर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री जन औषधि योजना बड़कोट में महज खानापूर्ति बनकर रह गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बड़कोट परिसर में संचालित जन औषधि केंद्र पिछले कई महीनों से बंद पड़ा है। केंद्र पर लंबे समय से ताला लटका होने के कारण अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
एक ओर सरकार जन औषधि योजना को आमजन तक पहुंचाने और इसके प्रचार-प्रसार पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर बड़कोट में योजना का केंद्र ही महीनों से बंद पड़ा है। ऐसे में सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर साफ नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केंद्र शुरू होने के शुरुआती दौर में यहां कुछ जरूरी दवाएं उपलब्ध होती थीं लेकिन धीरे-धीरे दवाओं की आपूर्ति और उपलब्धता कम होती गई। पर्याप्त दवाएं नहीं मिलने से मरीजों का केंद्र की ओर रुझान घटा और आखिरकार इसका संचालन पूरी तरह बंद हो गया।
सीएचसी बड़कोट में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और दूरस्थ इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में इलाज कराने के बाद जब उन्हें दवाओं की जरूरत पड़ती है तो बंद जन औषधि केंद्र के कारण उन्हें निजी मेडिकल स्टोरों का रुख करना पड़ रहा है। इससे उन मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है जिनके लिए जन औषधि केंद्र जैसी सुविधा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। सीएमओ डॉ श्याम विजय सिंह का कहना है कि एक दो दिन के भीतर औषधि केंद्र को संचालित करने का प्रयास किया जाएगा। संबंधित को जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
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बड़कोट। गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों को बाजार से कम कीमत पर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री जन औषधि योजना बड़कोट में महज खानापूर्ति बनकर रह गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बड़कोट परिसर में संचालित जन औषधि केंद्र पिछले कई महीनों से बंद पड़ा है। केंद्र पर लंबे समय से ताला लटका होने के कारण अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
एक ओर सरकार जन औषधि योजना को आमजन तक पहुंचाने और इसके प्रचार-प्रसार पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर बड़कोट में योजना का केंद्र ही महीनों से बंद पड़ा है। ऐसे में सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर साफ नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केंद्र शुरू होने के शुरुआती दौर में यहां कुछ जरूरी दवाएं उपलब्ध होती थीं लेकिन धीरे-धीरे दवाओं की आपूर्ति और उपलब्धता कम होती गई। पर्याप्त दवाएं नहीं मिलने से मरीजों का केंद्र की ओर रुझान घटा और आखिरकार इसका संचालन पूरी तरह बंद हो गया।
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सीएचसी बड़कोट में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और दूरस्थ इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में इलाज कराने के बाद जब उन्हें दवाओं की जरूरत पड़ती है तो बंद जन औषधि केंद्र के कारण उन्हें निजी मेडिकल स्टोरों का रुख करना पड़ रहा है। इससे उन मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है जिनके लिए जन औषधि केंद्र जैसी सुविधा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। सीएमओ डॉ श्याम विजय सिंह का कहना है कि एक दो दिन के भीतर औषधि केंद्र को संचालित करने का प्रयास किया जाएगा। संबंधित को जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
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