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Uttarkashi News: गुर्जरों को पुरोला और मोरी में नहीं मिल रहा चुगान का परमिट
Sun, 25 May 2025 07:05 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sun, 25 May 2025 07:05 PM IST
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सड़क किनारे जमाए हैं डेरा, चकरात और टौंस वन प्रभाग ने रोका है जगह-जगह
संवाद न्यूज एजेंसी
पुरोला (उत्तरकाशी)। बुग्यालों में गर्मियों के दौरान मवेशियों को चराने के लिए जाने वाले वन गुर्जरों को इस साल वन विभाग से परमिट नहीं मिल रहा है। इससे कई गुर्जर परिवार अपने सैकड़ों मवेशियों के साथ रास्तों में ही डेरा डाले हुए हैं। चकराता और टौंस वन प्रभागों ने सहारनपुर, मोहंड जैसे उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों से आने वाले गुर्जरों के काफिले को रोक दिया है।
तीन दर्जन से अधिक वन गुर्जर टौंस वन प्रभाग और मोरी पार्क के जंगलों और बुग्यालों में अपनी मवेशियों के साथ पहुंचने शुरू हो गए थे, लेकिन वन विभाग से अनुमति नहीं मिलने के कारण वे मियांगाड़, नासना तपड़ सांद्रा, ठडियार और चकराता वन प्रभाग के त्यूणी में सड़कों और जंगलों में कई दिनों से डेरा डाले हुए हैं।
उत्तराखंड राज्य वन नियमावली के तहत, उत्तराखंड राज्य के बाहर के गुर्जरों को बुग्यालों में जाने की अनुमति नहीं है। टौंस वन प्रभाग के उप वन संरक्षक डीपी बलूनी ने बताया कि राज्य वन नियमावली और कार्य योजना के तहत राज्य के बाहर के गुर्जरों को बुग्यालों में परमिट देने की मनाही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी को जंगलों में जाने से रोक दिया गया है और शासनस्तर के निर्देशों के बाद ही जंगलों में जाने की अनुमति दी जा सकती है।
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गुर्जरों का कहना है कि सालों से उन्हें ग्रीष्मकाल के चार महीने अपने पशुओं को टौंस समेत गोविंद वन्य जीव विहार की रूपिन, सुपीन और अन्य जंगलों में चराने का परमिट मिलता रहा है। गुर्जर इरशाद ने बताया कि इस वर्ष वन विभाग ने सभी गुर्जरों को बगैर परमिट के एक सप्ताह से त्यूणी, सांद्रा, मियां गाड़ में ही रोक दिया है, जिससे उनके मवेशी बगैर चारे के हैं। बच्चों और महिलाओं को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर जहां वन विभाग की अनुमति की प्रत्याशा में दर्जनों गुर्जर जगह-जगह सड़कों पर डेरा डाले हुए हैं, वहीं उनकी मवेशियों को अब चारा और घास की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
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पुरोला (उत्तरकाशी)। बुग्यालों में गर्मियों के दौरान मवेशियों को चराने के लिए जाने वाले वन गुर्जरों को इस साल वन विभाग से परमिट नहीं मिल रहा है। इससे कई गुर्जर परिवार अपने सैकड़ों मवेशियों के साथ रास्तों में ही डेरा डाले हुए हैं। चकराता और टौंस वन प्रभागों ने सहारनपुर, मोहंड जैसे उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों से आने वाले गुर्जरों के काफिले को रोक दिया है।
तीन दर्जन से अधिक वन गुर्जर टौंस वन प्रभाग और मोरी पार्क के जंगलों और बुग्यालों में अपनी मवेशियों के साथ पहुंचने शुरू हो गए थे, लेकिन वन विभाग से अनुमति नहीं मिलने के कारण वे मियांगाड़, नासना तपड़ सांद्रा, ठडियार और चकराता वन प्रभाग के त्यूणी में सड़कों और जंगलों में कई दिनों से डेरा डाले हुए हैं।
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उत्तराखंड राज्य वन नियमावली के तहत, उत्तराखंड राज्य के बाहर के गुर्जरों को बुग्यालों में जाने की अनुमति नहीं है। टौंस वन प्रभाग के उप वन संरक्षक डीपी बलूनी ने बताया कि राज्य वन नियमावली और कार्य योजना के तहत राज्य के बाहर के गुर्जरों को बुग्यालों में परमिट देने की मनाही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी को जंगलों में जाने से रोक दिया गया है और शासनस्तर के निर्देशों के बाद ही जंगलों में जाने की अनुमति दी जा सकती है।
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गुर्जरों का कहना है कि सालों से उन्हें ग्रीष्मकाल के चार महीने अपने पशुओं को टौंस समेत गोविंद वन्य जीव विहार की रूपिन, सुपीन और अन्य जंगलों में चराने का परमिट मिलता रहा है। गुर्जर इरशाद ने बताया कि इस वर्ष वन विभाग ने सभी गुर्जरों को बगैर परमिट के एक सप्ताह से त्यूणी, सांद्रा, मियां गाड़ में ही रोक दिया है, जिससे उनके मवेशी बगैर चारे के हैं। बच्चों और महिलाओं को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर जहां वन विभाग की अनुमति की प्रत्याशा में दर्जनों गुर्जर जगह-जगह सड़कों पर डेरा डाले हुए हैं, वहीं उनकी मवेशियों को अब चारा और घास की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है।