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उत्तराखंड: पर्यटकों के लिए खुली गर्तांग गली, एक बार में जा सकेंगे 10 पर्यटक

Wed, 18 Aug 2021 09:49 PM IST
देहरादून ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Wed, 18 Aug 2021 09:49 PM IST
सार

उत्तराखंड के सीमांत जनपद उत्तरकाशी की भैरोंघाटी के समीप गर्तांग गली में खड़ी चट्टानों को काटकर लकड़ी से निर्मित सीढ़ीदार ट्रेक बनाया गया है।

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Uttarakhand News: Gartang Gali open for tourists Now
गर्तांग गली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड में भारत-तिब्बत के बीच व्यापारिक रिश्तों की गवाह ऐतिहासिक गर्तांग गली पर्यटकों के लिए खुल गई है। बुधवार को उत्तरकाशी के डीएम मयूर दीक्षित ने गंगोत्री नेशनल पार्क के उप निदेशक व जिला पर्यटन विकास अधिकारी को गर्तांग गली को पर्यटकों के लिए खोलने के निर्देश दिए। उन्होंने यहां आने वाले पर्यटकों से कोविड एसओपी का अनुपालन कराने एवं भैरवघाटी के पास चेकपोस्ट बनाकर क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों का पंजीकरण करने के निर्देश दिए।       

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सीमांत जनपद उत्तरकाशी की भैरोंघाटी के समीप गर्तांग गली में खड़ी चट्टानों को काटकर लकड़ी से निर्मित सीढ़ीदार ट्रेक बनाया गया है। प्राचीन समय में सीमांत क्षेत्र में रहने वाले जादूंग, नेलांग को हर्षिल क्षेत्र से पैदल मार्ग के माध्यम से जोड़ा गया था। मार्ग से स्थानीय लोग तिब्बत से व्यापार भी करते थे। सेना भी सीमा की निगरानी के लिए इस मार्ग का उपयोग करती थी। बाद में चलन से बाहर होने पर ट्रेक क्षतिग्रस्त हो गया।
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गर्तांग गली जाने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण जल्द
गर्तांग गली जाने के लिए पर्यटक जल्द ऑनलाइन पंजीकरण भी करा सकेंगे। गर्तांग गली जाने के लिए गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन से परमिट जारी होता है। जिला प्रशासन ने बताया कि ऑनलाइन प्रक्रिया के लिए वन विभाग से टाईअप किया जा रहा है। जल्द सुविधा शुरू कर दी जाएगी।
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बीते 18 अगस्त को गर्तांग गली को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया था। समुद्र तल से करीब 11 हजार फीट ऊंचाई पर स्थित यह गली करीब 140 साल पुरानी है। इस गली में जाने के लिए गंगोत्री नेशनल पार्क के कोटबंगला व भैरवघाटी बैरियर से अनुमति (परमिट) लेना आवश्यक है। अभी परमिट की प्रक्रिया ऑफलाइन है।

डीएम मयूर दीक्षित का कहना है कि जल्द ही परमिट प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी जाएगी। इसके लिए वन विभाग से टाईअप किया जा रहा है। परमिट गंगोत्री नेशनल पार्क की वेबसाइट से जारी किए जाएंगे। पार्क प्रशासन ने शुल्क भी तय किया है। देशी पर्यटकों को 150 व विदेशी पर्यटकों को 600 रुपये का शुल्क पार्क प्रशासन को देना होगा।

अधिकतम 10 लोग ही जा सकेंगे

हाल में इस ट्रेक का जीर्णोद्धार कर 136 मीटर लंबे व 1.8 मीटर चौड़े लकड़ी से निर्मित सीढ़ीदार ट्रेक तैयार किया गया है, जिसे पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। पर्यटकों व ट्रेक की सुरक्षा के लिए एक बार में अधिकतम 10 लोग ही जा सकेंगे। ट्रेक में झुंड बनाकर आवागमन करने या एक जगह बैठने पर भी पाबंदी होगी। सुरक्षा के दृष्टिगत ट्रेक की रेलिंग से नीचे झांकने पर भी पाबंदी लगाई गई है। 

कैसे पहुंचें गर्तांग गली
देहरादून तक ट्रेन व वायुमार्ग तक आने की सुविधा है। निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है जो उत्तरकाशी से करीब 100 किमी की दूरी पर है। यहां से सड़क मार्ग से होते हुए उत्तरकाशी जिला मुख्यालय तक पहुंचना होगा। राज्य परिवहन की बसे नियमित रूप से उत्तरकाशी और ऋषिकेश के बीच चलती हैं। उत्तरकाशी से लंका पुल तक करीब 88 किमी तक सड़क मार्ग का सफर है। लंका पुल से करीब एक किमी पैदल ट्रेक के बाद गर्तांग गली शुरू होती है। 

पर्यटकों के लिए खोली जाए जादूंग वैली : महाराज
पर्यटन एंव संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तरकाशी जिले में जादूंग वैली को पर्यटकों के लिए खोला जाना चाहिए। इससे जहां राज्य में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा। बुधवार को महाराज ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से शिष्टाचार भेंट कर जादूंग वैली को पर्यटकों लिए खोलने की मांग उठाई। 

महाराज ने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह से उनके नई दिल्ली स्थित कार्यालय में शिष्टाचार भेंट की। महाराज ने अवगत कराया कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान सुरक्षा कारणों के चलते खाली कराए गए जादूंग वैली पर्यटन के लिए बंद है। यह वैली नैसर्गिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। इस वैली को पर्यटन के लिए खोलने से जादूंग गांव के लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा। साथ ही पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से सीमांत गांव आबाद होंगे। केंद्रीय मंत्री ने महाराज से इस संबंध में शीघ्र प्रस्ताव बना कर भेजने को कहा। जिस पर विचार किया जाएगा। 

पर्यटन मंत्री महाराज ने हरिद्वार में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण में सहयोग के लिए केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया। उन्होंने सुझाव दिया कि डीआरडीओ के वैज्ञानिक ऐसे नकाब या हेलमेट बनाएं। जिससे कोविड महामारी मास्क पहनने की आवश्यकता नहीं रहेगी। केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि इस सुझाव पर डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को निश्चित रूप से  काम सौंपा जाएगा। उत्तराखंड में सेना में भर्ती के विषय में चर्चा करते हुए महाराज ने सेना में महिलाओं की भर्ती होनी चाहिए। इसके लिए देहरादून व हल्द्वानी में शीघ्र ही भर्ती कैंप लगाने की मांग रखी है।
 

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