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Uttarkashi News: पांच वर्ष बाद भी नहीं बन पाए आपदा में बहे पुल

Sat, 04 Apr 2026 05:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी Updated Sat, 04 Apr 2026 05:33 PM IST
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Even after five years, the bridges washed away in the disaster have yet to be rebuilt.
गंगोत्री-केदारनाथ यात्रा सहित वन-वे सिस्टम में पुल की रहती है अहम भूमिका
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उत्तरकाशी। वर्ष 2021 की आपदा में मांडो-तेखला बाईपास और साड़ा के समीप बहे पुलों का पांच वर्ष बाद भी निर्माण नहीं हो पाया है। मांडो में जर्जर बैली ब्रिज से वाहनों की आवाजाही हो रही है। दोनों पुल एक बड़ी आबादी के साथ ही गंगोत्री-केदारनाथ यात्रा सहित वन-वे सिस्टम को जोड़ने वाले मार्ग पर अहम भूमिका निभाते हैं।
वर्ष 2021 में मांडो सहित कंकराड़ी और साड़ा में आपदा आई थी। इस दौरान मांडो-तेखला बाईपास का पुल बहने के कारण वहां पर कई दिनों तक आवाजाही बंद रही थी। साथ ही साड़ा के समीप पुल बहने के कारण बाड़ागड्डी के आधे क्षेत्र और धौंतरी क्षेत्र का जनपद मुख्यालय से संपर्क कट गया था।
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साड़ा में लोनिवि की ओर करीब 20 मीटर लंबे बैली ब्रिज का निर्माण कर आवाजाही शुरू करवाई गई। साथ ही मांडो में गदेरे के बीच से ही सड़क का निर्माण कर आवाजाही शुरू करवाई गई लेकिन आपदा के पांच वर्ष बीतने के बाद भी दोनों स्थानों पर पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। मांडो निवासी इंद्रेश उनियाल ने बताया कि बारिश के दौरान गदेरे में पानी आने के कारण वहां पर वाहनों की आवाजाही में खतरा बना रहता है। साथ ही मानसून सीजन में कई बार आवाजाही बंद हो जाती है जबकि यह मांडो-तेखला बाईपास सहित उत्तरकाशी लंबगांव मोटर मार्ग यात्रा के दौरान वन-वे और गंगोत्री-केदारनाथ यात्रा के मुख्य आवाजाही के मार्ग हैं।
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उसके बावजूद शासन-प्रशासन इसके निर्माण पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं कर रहा है। इससे चारधाम यात्रा में यात्रियों के साथ स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लोनिवि के एई स्वरोज चौहान का कहना है कि मांडो पुल की डीपीआर एक सप्ताह के भीतर शासन को भेजी जाएगी। जल्द ही इसकी आगे की प्रक्रिया शुरू किया जाएगा।
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