{"_id":"613cae818ebc3e074916ae1c","slug":"emphasis-on-giving-new-direction-to-hill-agriculture-utter-kashi-news-drn3900520186","type":"story","status":"publish","title_hn":"पर्वतीय कृषि को नई दिशा देने पर जोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पर्वतीय कृषि को नई दिशा देने पर जोर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आजादी के अमृत महोत्सव के तहत विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की ओर से दो दिवसीय वेबिनार का आयोजन किया गया, जिसमें पर्वतीय कृषि के लिए कौशल कृषि विषय पर चर्चा की गई। इस दौरान काश्तकारों को आगामी सीजन में बोई जाने वाली सब्जियों के बीज की किट भी वितरित की गई।
प्रधान वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डा. चित्रांगद सिंह राघव ने पर्वतीय कृषि को एक नई दिशा देने, कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों के समावेश करने व पर्वतीय कृषि को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से वेबिनार का आयोजन किया गया है। वेबिनार के पहले दिन केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजीव शर्मा ने पर्वतीय क्षेत्रों में आलू की उन्नत उत्पादन तकनीकी के बारे में बताया। भारतीय कदन्न अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. जे स्टेनली ने पर्वतीय फसलों में एकीकृत कीट प्रबंधन और संरक्षित कृषि प्रौद्योगिकी केंद्र नई दिल्ली के प्रधान वैज्ञानिक डा. अवनी कुमार सिंह ने पर्वतीय क्षेत्रों में आय वृद्धि के लिए संरक्षित खेती जैसे विषयों पर विचार व्यक्त किए। वेबिनार के दूसरे दिन कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के प्रधान वैज्ञानिक डा. कृष्ण कांत मिश्रा ने मशरूम उत्पादन तकनीकी एवं पर्वतीय फसलों में एकीकृत रोग प्रबंधन तथा बेमौसमी सब्जी उत्पादन पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में डा. पंकज नौटियाल, डा. गौरव पपनै, नीरज जोशी, रोहिणी, वरुण सुप्याल, ख्याली राम, रीतिका भास्कर आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
प्रधान वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डा. चित्रांगद सिंह राघव ने पर्वतीय कृषि को एक नई दिशा देने, कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों के समावेश करने व पर्वतीय कृषि को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से वेबिनार का आयोजन किया गया है। वेबिनार के पहले दिन केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजीव शर्मा ने पर्वतीय क्षेत्रों में आलू की उन्नत उत्पादन तकनीकी के बारे में बताया। भारतीय कदन्न अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. जे स्टेनली ने पर्वतीय फसलों में एकीकृत कीट प्रबंधन और संरक्षित कृषि प्रौद्योगिकी केंद्र नई दिल्ली के प्रधान वैज्ञानिक डा. अवनी कुमार सिंह ने पर्वतीय क्षेत्रों में आय वृद्धि के लिए संरक्षित खेती जैसे विषयों पर विचार व्यक्त किए। वेबिनार के दूसरे दिन कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के प्रधान वैज्ञानिक डा. कृष्ण कांत मिश्रा ने मशरूम उत्पादन तकनीकी एवं पर्वतीय फसलों में एकीकृत रोग प्रबंधन तथा बेमौसमी सब्जी उत्पादन पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में डा. पंकज नौटियाल, डा. गौरव पपनै, नीरज जोशी, रोहिणी, वरुण सुप्याल, ख्याली राम, रीतिका भास्कर आदि मौजूद थे।
विज्ञापन