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पार्टी से बगावत कर चुनाव लड़ने पर भी नहीं हुए सफल
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गंगोत्री विधानसभा क्षेत्र में पार्टी से बगावत कर चुनाव लड़ने वाले अब तक सफल नहीं हो पाए हैं। चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो कांग्रेस से दो और भाजपा से एक बार यहां बागियों ने चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई। बावजूद इसके पार्टी प्रत्याशी ही जीत दर्ज करने में सफल रहे।
राज्यगठन के बाद वर्ष 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में हरि सिंह राणा ने कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें चौथे स्थान पर रहे। वहीं कांग्रेस से विजयपाल सजवाण मामूली अंतर से जीते। वर्ष 2012 के चुनाव में कांग्रेस में फिर बगावत हुई, जिसमें कांग्रेस के सुरेश चौहान ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। लेकिन वह तीसरे पायदान पर रहे और बाद में भाजपा में शामिल हो गए। वहीं पार्टी प्रत्याशी विजयपाल सजवाण दूसरी बार जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। वर्ष 2017 के पिछले चुनाव में यहां भाजपा से बगावत हुई, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता सूरतराम नौटियाल पार्टी के निर्णय के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन वो भी तीसरे पायदान पर रहे और पार्टी प्रत्याशी स्व. गोपाल सिंह रावत विजयी हुए।
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राज्यगठन के बाद वर्ष 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में हरि सिंह राणा ने कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें चौथे स्थान पर रहे। वहीं कांग्रेस से विजयपाल सजवाण मामूली अंतर से जीते। वर्ष 2012 के चुनाव में कांग्रेस में फिर बगावत हुई, जिसमें कांग्रेस के सुरेश चौहान ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। लेकिन वह तीसरे पायदान पर रहे और बाद में भाजपा में शामिल हो गए। वहीं पार्टी प्रत्याशी विजयपाल सजवाण दूसरी बार जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। वर्ष 2017 के पिछले चुनाव में यहां भाजपा से बगावत हुई, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता सूरतराम नौटियाल पार्टी के निर्णय के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन वो भी तीसरे पायदान पर रहे और पार्टी प्रत्याशी स्व. गोपाल सिंह रावत विजयी हुए।
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