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गंगोत्री धाम में गीले कचरे से बनेगी कंपोस्ट खाद
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नगर पंचायत गंगोत्री की योजना रंग लाई तो गंगोत्री धाम में गीले कचरे से भी कमाई होगी। नगर पंचायत गंगोत्री ने कंपोस्ट मशीन की खरीद के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव को शासन की स्वीकृति मिलती है, तो पर्यावरण का संरक्षण भी होगा। साथ ही नगर पंचायत की आय भी बढ़ेगी।
चारधामों में प्रमुख गंगोत्री धाम में यात्राकाल के दौरान प्रतिदिन करीब 100 किलो गीला कचरा (जैविक कचरा) निकलता है, लेकिन यह नगर पंचायत के लिए अनुपयोगी बना हुआ है। जबकि सूखे कचरे से नगर पंचायत ने नौ हजार की कमाई की। अब नगर पंचायत प्रशासन की योजना अनुपयोगी गीले कचरे से कंपोस्ट खाद बनाकर कमाई करने की है।
नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी रविराज बंगारी का कहना है कि यात्रा काल में सर्वाधिक मात्रा में गीला कचरा निकलता है, जिसमें बचा हुआ खाना, सब्जी और फलों की छिलन, पत्तल आदि अपशिष्ट खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। वर्तमान समय सूखे कचरे को तो छंटनी कर बेचा जा रहा है, लेकिन सर्वाधिक मात्रा में होने के बाद भी गीले कचरा किसी काम नहीं आ रहा है। इससे खाद बनती है, तो यह नगर पंचायत के साथ ही काश्तकारों के लिए भी लाभदायक होगा।
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जिला प्रशासन व शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, स्वचालित कंपोस्टिंग मशीन लगाने की मंजूरी मिलती है तो यह कचरा निपटान में मददगार होगा।
-रविराज बंगारी, ईओ, नगर पंचायत गंगोत्री।
क्या होती है कंपोस्ट खाद
कंपोस्ट एक प्रकार की खाद होती है, जिसे कूड़ा खाद भी कहते हैं। यह जैविक पदार्थों के अपघटन एवं पुन: चक्रण से बनती है। यह जैविक खेती का मुख्य घटक है। कंपोस्ट बनाने के लिए बचा खाना, फल व सब्जी की छिलन आदि का ढेर बनाकर विघटन के लिए छोड़ दिया जाता है, विघटन में कुछ सप्ताह या महीने लगते हैं। जो ह्यूमस में बदल जाता है, जो मिट्टी के लिए उर्वरता बढ़ाने में सहायक है।
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चारधामों में प्रमुख गंगोत्री धाम में यात्राकाल के दौरान प्रतिदिन करीब 100 किलो गीला कचरा (जैविक कचरा) निकलता है, लेकिन यह नगर पंचायत के लिए अनुपयोगी बना हुआ है। जबकि सूखे कचरे से नगर पंचायत ने नौ हजार की कमाई की। अब नगर पंचायत प्रशासन की योजना अनुपयोगी गीले कचरे से कंपोस्ट खाद बनाकर कमाई करने की है।
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नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी रविराज बंगारी का कहना है कि यात्रा काल में सर्वाधिक मात्रा में गीला कचरा निकलता है, जिसमें बचा हुआ खाना, सब्जी और फलों की छिलन, पत्तल आदि अपशिष्ट खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। वर्तमान समय सूखे कचरे को तो छंटनी कर बेचा जा रहा है, लेकिन सर्वाधिक मात्रा में होने के बाद भी गीले कचरा किसी काम नहीं आ रहा है। इससे खाद बनती है, तो यह नगर पंचायत के साथ ही काश्तकारों के लिए भी लाभदायक होगा।
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जिला प्रशासन व शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, स्वचालित कंपोस्टिंग मशीन लगाने की मंजूरी मिलती है तो यह कचरा निपटान में मददगार होगा।
-रविराज बंगारी, ईओ, नगर पंचायत गंगोत्री।
क्या होती है कंपोस्ट खाद
कंपोस्ट एक प्रकार की खाद होती है, जिसे कूड़ा खाद भी कहते हैं। यह जैविक पदार्थों के अपघटन एवं पुन: चक्रण से बनती है। यह जैविक खेती का मुख्य घटक है। कंपोस्ट बनाने के लिए बचा खाना, फल व सब्जी की छिलन आदि का ढेर बनाकर विघटन के लिए छोड़ दिया जाता है, विघटन में कुछ सप्ताह या महीने लगते हैं। जो ह्यूमस में बदल जाता है, जो मिट्टी के लिए उर्वरता बढ़ाने में सहायक है।