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बदलते मौसम के अनुरूप कृषि करने पर जोर
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Fri, 30 Sep 2016 10:49 PM IST
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पीजी कॉलेज के वनस्पति विभाग द्वारा हिमालयी पर्यावरण में फसल विविधता और उद्यमिता विकास पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर से आए विषय विशेषज्ञों का व्याख्यान व शोध पत्र प्रस्तुति का सिलसिला दूसरे दिन भी जारी रहा। वन अनुसंधान संस्थान देहरादून के डा. मनीष भंडारी की अध्यक्षता वाले प्रात:कालीन सत्र में डीएसटी नई दिल्ली के सीड डिवीजन के वैज्ञानिक डा. सुशील अग्रवाल ने डीएसटी द्वारा विविध योजनाओं की जानकारी दी।
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उन्होंने पर्वतीय क्षेत्र के निवासियों, विशेष रूप से एससी एवं जनजाति के जीवन स्तर को सुधारने में विज्ञान एवं तकनीकी के योगदान की चर्चा की। डीएसटी के सहयोग से उत्तराखंड में चल रही विविध लोक कल्याणकारी क्रियाकलापों की जानकारी देते हुए बताया कि उत्तराखंड में अनेक लोग इन योजनाओं से लाभ उठाकर स्वरोजगार स्थापित कर चुके हैं। इस सत्र में विपिन कुमार सती, कु. मीनू, कल्याणी वर्मा, शोभा बिष्ट, अरूण कुमार, डा. जीएस पंवार, रूचि सिंह, सोनिया सैनी आदि ने विविध विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए।
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समापन सत्र में मुख्य अतिथि श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति डा. उदय सिंह रावत ने परंपरागत कृषि के संरक्षण तथा बदलते मौसम के अनुरूप कृषि करने पर जोर दिया। एसपी नौटियाल ने कृषि उत्पादों को बाजार से सीधा जोड़ने पर जोर दिया। इस मौके पर महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. केएल मालगुड़ी, डा. आरपी सिंह, डा. एससी ममगांई, डा. आरएस रावत, डा. डीडी पैन्यूली, डा. डीपी पांडेय, डा. दीपा वर्मा, डा. मोमतेश कुमारी, डा. एमपी परमार, डा. एके अग्रवाल आदि उपस्थित थे।
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