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आकर्षण का केंद्र बना पारंपरिक शैली का भवन
ब्यूरो/अमर उजाला उत्तरकाशी
Updated Sat, 14 Jan 2017 09:31 PM IST
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Traditional-style building
- फोटो : amarujala
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हुनर किसी परिचय का मोहताज नहीं होता। काष्ठ शिल्पी मोहन सिंह रावत का माघ मेले परिसर में अपने हुनर से तराशे गए पारंपरिक शैली से निर्मित पांच मंजिला भवन का मॉडल लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना है। भवन के मॉडल को देखने के लिए यहां लोगों की भीड़ उमड़ रही।
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दरअसल, दंदालका (ढासड़ा) निवासी काष्ठ शिल्पी मोहन सिंह रावत ने पारंपरिक शैली से फोल्डिंग वाला पांच मंजिला भवन का मॉडल तैयार किया है। मेले में भवन का मॉडल देख लोग मंत्रमुग्ध हो गए। इसे देखने और फोटो खींचने के लिए लोगों की कतार लग गई।
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विभिन्न प्रजाति के पेड़ों की लकड़ी से तैयार यह मॉडल मोहन ने पहाड़ से विलुप्त होती पारंपरिक शैली के भवनों को पुनर्जीवित रखने के उद्देश्य से तैयार किया है। जिसको बनाने में उनको डेढ़ साल से अधिक का समय लग गया। उत्तरकाशी जिले के अनेक गांवों में आज भी इसी शैली से निर्मित भवन बने हैं, जो अब विलुप्त होने की कगार पर हैं।
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पारंपरिक शैली से निर्मित ऐसे भवन आपदाओं के लिहाज से भी सुरक्षित हैं। ठंड में गर्म व गर्मी में ठंड का अहसास कराने वाले पारंपरिक शैली के ये भवन स्थानीय स्तर पर आसानी से मिलने वाली विभिन्न प्रजाति के पेड़ों की लकड़ी से बनाए जाते हैं। रैल गांव के पांचपुरी सहित अनेक गांवों में बने पारंपरिक शैली के इन भवनों पर 1991 के प्रलयकारी भूकंप से कोई नुकसान नहीं हुआ।
मोहन ने भवन के मॉडल को दैड़, मोरिंड, थुनेर आदि छह प्रजाति के पेड़ों की लकड़ी से तराशा है। वे बताते हैं कि आज गांवों में पारंपरिक शैली के मकानों की संख्या कम हो गई है। जिले के पुरोला, मोरी, खरसाली, भटवाड़ी ब्लाक के अनेक गांवों में पारंपरिक शैली के मकान बने हैं। बताते हैं कि प्रसिद्ध लेखक यशोधर मठवाल की किताब पढ़कर उन्हें काष्ठ शिल्पी बनने की प्रेरणा मिली और उन्होंने इसका काम शुरू किया।