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नियमितीकरण की राह ताक रहे नियत वेतन कर्मी
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Thu, 14 Apr 2016 10:34 PM IST
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विद्युत गृह के लिए हेल्परों के पद सृजित होने के बावजूद सवा दो मेगावाट की पिलंगगाड लघु जल विद्युत परियोजना में 11 सालों से नियत वेतन पर तैनात कर्मचारियों के भरोसे चल रही है। विनियमितीकरण के शासनादेश और कर्मचारियों ने परियोजना के लिए अपनी जमीन भी दी है। बावजूद इसके निगम प्रबंधन की ओर से उनकी सुध नहीं ली जा रही है।
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भेला टिपरी गांव के विनोद कुमार, प्रताप सिंह, मल्ला के राजेश सिंह और असी गंगा परियोजना में जमीन देने वाले हरि सिंह थापा पिलंगगाड परियोजना में निर्माण के समय वर्ष 2000 से मस्टरोल पर काम करते थे।
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कुछ समय विभागीय संविदा के बाद इन्हें वर्ष 2005 में 5450 रुपये प्रतिमाह नियत वेतन पर विद्युत गृह परिचालन के लिए तैनात किया गया। पावर हाउस और पावर चैनल के लिए दस कर्मचारियों के पद सृजित हैं, लेकिन यहां सिर्फ दो नियमित कर्मचारी तैनात हैं।
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भूमि अध्याप्त परिवार के सदस्यों के नाते युवकों को पहले मस्टरोल और फिर एक साल संविदा पर परियोजना में नौकरी दी गई। बाद में हटा दिया। भूख हड़ताल करने पर वर्ष 2004 में डीएम ने मजिस्ट्रेटी जांच कराई, जिसमें तथ्यों का हवाला देकर 21 मई 2004 को प्रमुख सचिव ऊर्जा को पत्र लिखकर हटाए गए कर्मचारियों को पुन: काम पर रखने और नियमित करने की संस्तुति की थी। इसके बाद इनको नौकरी पर तो रखा गया, लेकिन नियमित नहीं किया गया।
जल विद्युत निगम के उप महाप्रबंधक आरके गुप्ता का कहना है कि डीएम द्वारा प्रमुख सचिव ऊर्जा के माध्यम से और हमारे कार्यालय से भी पूर्व में पिलंगगाड परियोजना में नियत वेतन पर कार्यरत कर्मचारियों के विनयमितीकरण का प्रस्ताव निगम मुख्यालय के मानव संसाधन प्रकोष्ठ को भेजा जा चुका है। इस पर मुख्यालय से ही निर्णय होना है।a